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टिहरी के बाद अब उत्तरकाशी मे फटा बादल

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उत्तराखंड मे प्रकृति ने इस कदर कहर बरपा रही है कि लोगों पर बिन बुलाये मुसीबत आ रही है। विगत वर्षो मे आई आपदा को अभी लोग भूल नही पाये थे, कि टिहरी मे दुबारा बादल फटने से आपदा आ गयी। और आपदा यहीं नही रुकी। दो दिन बाद ही उत्तरकाशी ज़िले के मोरी ब्लॉक मे बादल फटने से दो दर्जन मवेशी बह गए। 64 परिवारों ने घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानो पर पनाह ले ली है। चारधाम यात्रा मार्गों के खुलने और बंद होने का सिलसिला थम नही पा रहा है। पर्यटक आ नही रहे है। जिनकी रोजी-रोटी पर्यटक के बल पर चल रही थी। वो आज खाली बैठे पड़े है। लोगो की खेती योग्य जमीन नस्ट हो गयी। लगातार बारिश होने से नदियां ऊफान पर है। ऐसे हालात मे इन्सान करे तो क्या करे। विस्तार से देखें।

सौजन्य से: दैनिक जागरण

बारिश से थमी पहाड़ की जिंदगी, जगह-जगह मलबा आने से बंद हो गए कई रास्ते, लोग फंसे

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उत्तराखंड मे हो रही बारिश से लोगों की ज़िंदगी थम सी गयी है। वही कुछ राज्यो मे समय से बारिश न होने से लोग आसमान की तरफ टकटकी लगाए हुये है। इतना जोरदार बारिश होने के कारण नदिया लबालब बह रही है। और जगह जगह हाइवे रोड पर भूस्खलन हो गया है। जिससे यातायात भी प्रभावित हो गया है। अभी पिछले साल का घाव हरा ही था, कि इस बार फिर लोग बारिश से परेशान हो गए है। बारिश से अलग अलग जिले के बहुत से यातायात मार्ग को बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने मलबा साफ करने के लिए लोनिवि ने जेसीबी लगा दी है। बारिश के कारण मलबा हटाने में कामयाबी नहीं मिल पा रही। बृहस्पतिवार से जारी बारिश के कारण बदरीनाथ हाईवे मूल्यागांव में करीब आठ घंटे बंद रहा। हाईवे बंद होने से शहर में दूध और अन्य जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हुई। लामबगड़ में हाईवे पर भारी मात्रा में भूस्खलन हो गया है। जबकि कंचनगंगा में जलस्तर बढ़ गया है और यहां बडे़-बडे़ बोल्डर हाईवे पर आ गए हैं। सीमा सड़क संगठन के कमांडर कर्नल निलेश चंदाराना का कहना है कि लामबगड़ में लगातार भूस्खलन हो रहा है। बारिश थमने के बाद ही हाईवे को खोला जा सकता है। जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने बताया कि हाईवे सुचारु होने के बाद धाम और पड़ावों पर रोके गए तीर्थयात्रियों को आवाजाही की अनुमति दी जाएगी। विस्तार से देखें

सौजन्य से: अमर उजाला ब्यूरो

बीमार बना रहा पानी, मुश्किल में जिंदगानी

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भगवानपुर में फैक्ट्रियों के प्रदूषण से एक लाख लोग प्रभावित, पर्यावरण दिवस पर भी नहीं उठा मुद्दा

रुड़की/भगवानपुर। पर्यावरण दिवस पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक बार फिर बड़ी-बड़ी बातें हुईं। जगह-जगह रैलियों, गोष्ठियों और कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अधिकारियों और संगठनों ने भी कई दावे किए। लेकिन हर रोज प्रदूषण की मार झेल रहे भगवानपुर क्षेत्र के लोगों की किसी ने सुध नहीं ली। इसके लिए जिम्मेदार फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई की बात किसी की जुबां पर नहीं आई।

दरअसल, भगवानपुर क्षेत्र में कई फैक्ट्रियों से निकलने वाला अवशिष्ट केमिकल (गंदा पानी) क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। फैक्ट्रियां में इसका समुचित निस्तारण नहीं होने के कारण खुले में छोड़ दिया जाता है, जिससे ग्राउंड लेवल वाटर प्रदूषित हो रहा है। इस कारण घरों में लगे नलों में गंदा पानी आने लगा है। क्षेत्र की करीब एक लाख की आबादी पर बीमारियों का संकट बढ़ रहा है। खेतों में फसल भी प्रभावित हो रही है और पशुओं में भी बीमारियां बढ़ रही हैं। लोगों में इस बात को लेकर रोष है कि कई बार उन्होंने फैक्ट्रियों का अवशिष्ट निस्तारण कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

केमिकल युक्त पानी का निस्तारण नहीं होने से बढ़ा खतरा
फैक्ट्रियां लगने के बाद हमारे नलों में गंदा पानी आ रहा है। अधिकारियों से पानी की शुद्धता के लिए कई बार अपील की, लेकिन समस्या बनी हुई है। — मेमो देवी, निवादा

फैक्ट्रियां हैं क्षेत्र में
क्षेत्र में वर्ष 2005 के बाद से अस्तित्व में आए औद्योगिक क्षेत्र में सिसौना, मक्खनपुर, रायपुर, चौल्ली, सिकंदरपुर और शाहपुर तथा नन्हेड़ा आदि गांवों में करीब 480 फैक्ट्रियां हैं। इनमें से कई फैक्ट्रियों का अवशिष्ट केमिकल फैक्ट्री में लगे ट्रीटमेंट प्लांट से शोधन करने के बजाय खुले में ही बहाया जा रहा है। कई फैक्ट्रियों का अवशिष्ट कई लोगों के खेतों में बहाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से पानी की निकासी के लिए नाले का निर्माण कराना भी प्रस्तावित है लेकिन इसका प्रस्ताव भी फाइलों में ही बंद पड़ा है।

फसल भी हो रही प्रभावित
फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी बाग में घुस जाने से मक्खनपुर निवासी अमीर आलम और जान आलम के बाग में आम की फसल प्रभावित हुई। दोनों किसानों का कहना है कि पिछले दो साले में उनके बाग के कई पेड़ सूख गए। एसडीएम से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

बीमारियों की चपेट में आ रहे लोग
सरकारी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विकांत सिरोही का कहना है कि प्रदूषित पानी के कारण टायफायड, उल्टी-दस्त, पीलिया, मलेरिया, हैजा, चर्मरोग जैसे रोग क्षेत्र में बढ़ रहे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन हैजा और टायफायड के करीब 50 मरीज आ रहे हैं। वहीं भगवानपुर कस्बे के निजी चिकित्सक प्रवीण कुमार ने बताया कि पीलिया और पेट दर्द जैसे रोगों के मरीजों की संख्या दूषित पानी के कारण बढ़ रही है।

फैक्ट्रियों के अवशिष्ट के समुचित निस्तारण नहीं कराने का मामला पहले भी सामने आया था। इस बारे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ सभी फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया जाएगा। जिन फैक्ट्रियों में ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा है वहां इसे लगवाने और लगा है तो उसका उपयोग करने के लिए कहा जाएगा। खुले में अवशिष्ट छोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -प्रत्यूष सिंह, एसडीएम

ऐसे प्रदूषित हो रहा पानी
जानकारों के अनुसार, फैक्ट्रियों की ओर से केमिकलयुक्त पानी खुले में ही छोड़ देने के कारण यह धीरे-धीरे भूतल के नीचे पहुंचकर पानी में मिल जाता है। इसके बाद जब नलों से पानी खींचा जाता है तो उसके हानिकारक तत्व पानी के साथ मिलकर बाहर आ जाते हैं। कई फैक्ट्रियों में ऐसा अवशिष्ट पानी बोरवेल करके भूतल में पहुंचाने के भी आरोप लग रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कराई गई जांच में भी दूषित पानी की पुष्टि हो चुकी है।

जांच में भी फेल
कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने इस क्षेत्र में नलों में आ रहे पानी के सैंपल लिए। जांच करने पर पानी प्रदूषित पाया गया। इसका कारण यह है कि सभी फैक्ट्रियां अपने यहां लगे ट्रीटमेंट प्लांट को नियमित रूप से नहीं चलाती हैं। ऐसे में केमिकल युक्त पानी बाहर छोड़ दिया जाता है। उद्योग बंधु की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया जा चुका है। गंदे पानी का निस्तारण नहीं होने के कारण पिछले साल 78 फैक्ट्रियों को कारण बताओ नोटिस और दस को बंदी के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। इनमें से कई ने तो नोटिस के बाद अपने यहां मिली कमियों को दूर कर लिया, जबकि तीन फैक्ट्रियां फिलहाल बंद चल रही हैं। – डॉ. अंकुर कंसल, क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

सौजन्य से: अमर उजाला ब्यूरो

POSCO to get water from Mahanadi

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People protest Odisha government’s decision to allocate water from the Mahanadi and Hansua rivers, saying it will turn large tracts of farms barren in Jagatsinghpur and Cuttack districts

The controversial POSCO steel plant project in Odisha has been allocated water from the Mahanadi and Hansua rivers. The South Korean steel company proposes to construct the steel plant in the seaside gram panchayats of Dhinkia, Nuagaon and Gadakujang in Jagatsinghpur district, and the move to allocate water for the project has spurred protests among farmers and people campaigning against the project from the outset.

“The water resources department has informed POSCO that it can draw 138,000 cumecs (cubic metre per second) of water from the Mahanadi river at Jobra barrage for the project work,” informed S K Mallick, district collector of Jagatsinghpur, on Wednesday. During the first phase, POSCO will get 69,000 cumecs water from December 2018. From 2021, during the second phase, POSCO will get another 69,000 cumecs. POSCO will also receive 3,400 cumecs water from the river Hansua from June 16, 2016 till December 2018 for the construction work, said Mallick.

The company will build anicuts, check-dams, barrages, drainages, storage system and sluice gates to take water from both rivers as per the 35 conditions imposed by the state government, he added.

The proposed steel plant project, which made no headway for many years because of public protests, got a boost in June last year when the district administration completed the land acquisition work. The Union government has already revalidated environment clearance to POSCOto build a steel plant. The district administration will soon organise Rehabilitation Periphery Development Advisory Committee ( RPDC) meeting in Jagatsinghpur to sort out land acquisition, compensation, rehabilitation and other issues to pave the way for the project. Read more

Courtesy: Down to Earth

तीन दिन में 30 लीटर पानी, लोग गाँव छोड़ने को मजबूर

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पीने को पानी नहीं
असनोड़ी गांव में प्रति तीन दिन में 30 लीटर पानी ही नसीब, 30 परिवारों ने किया पलायन
श्रीनगर से 10 और पौड़ी रोड से मात्र एक किलोमीटर दूर बसे असनोड़ी गांव में पानी की कहानी काफी दुखभरी है। गांव में पेयजल संकट के चलते अभी तक करीब 30 परिवार पलायन कर चुके हैं। 40 परिवार मजबूरी में ही गांव में रह रहे हैं। यहां रहने वाले प्रत्येक परिवार को भी तीन दिन में 30 लीटर पानी ही नसीब हो पाता है। असनोड़ी गांव श्रीनगर से दस किलोमीटर दूर पौड़ी रोड स्थित खंडाह बस स्टापेज से करीब एक किलोमीटर दूर है। गांव को जोड़ने के लिए कच्ची सड़क भी है। गांव में प्रवेश करते ही खंडहर पड़े घर यहां पहुंचने वालों का स्वागत और गांव में जरूरी सुविधाओं की तस्वीर बयां करते हैं।
जानकारी के अनुसार आज से दस साल पहले तक गांव 70 परिवारोें से गुलजार था। लेकिन सड़क से नजदीक और विकास से दूर गांव से पलायन शुरू हो गया। अब गांव में मजबूरी में 40 परिवार ही बचे हैं। जिसमें से ज्यादातर दलित परिवार हैं। पलायन का मुख्य कारण बना पीने के पानी की कमी। गांव में पेयजल संकट का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक परिवार को तीन दिन में तीस लीटर पानी ही नसीब हो पाता है। ऐसे में ग्रामीणों को एक किलोमीटर दूर प्राकृतिक स्रोत से पानी ढोना पड़ता है। यहां भी पानी इतना कम है कि एक बर्तन पानी के लिए घंटों इंतजार।
कई गांवों में पेयजल संकट
पौड़ी। कल्जीखाल ब्लाक के कई गांव पीने की पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों को गाड़ गदेरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अगरोड़ा के सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत मोहन बिष्ट , मदन सेमवाल, रवींद्र असवाल, लक्ष्मण सिंह आदि ने बताया कि कफोलस्यूं पट्टी के कई गांवों पेयजल संकट गहराने लगा है। केवर्स, पाली, कठूड़, सिलेथ और नौली आदि गांवों ज्वाल्पा पंपिग योजना से पानी की आपूर्ति की जाती है। लेकिन एक सप्ताह से गांवों में नियमित सप्लाई नहीं की जा रही है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरके रोहेला ने बताया कि योजना ठीक है। गरमी शुरू होते ही पानी की मांग बढ़ जाती है। जिससे यह समस्या आ रही है।
लीकेज के चलते सड़कें तर, सूख रहे हलक
कर्णप्रयाग। जलसंस्थान नगर की लीकेज लाइनों की मरम्मत तक नहीं करा पा रहा है। हालत यह है कि कई जगह लाइनों पर लीकेज होने से पानी सड़कों और नालियों में बह रहा है जिससे कई मोहल्लों में पानी की किल्लत बनी हुई है। स्थिति यह है कि लोग पिंडर और अलकनंदा नदी में मोटर लगाकर पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। नगर के छह वार्ड और पोखरी ब्लाक के देवतोली कस्बे की पेयजल आपूर्ति जलसंस्थान के हवाले है। विभाग की घटगाड़ योजना से जहां नगर के छह वार्डों को पेयजल आपूर्ति होती है वहीं देवतोली के वाशिंदे बदरीनाथ हाईवे पर खड़ीखाड़ पेयजल योजना निर्भर हैं। 60 के दशक में बनी घटगाड़ योजना का पुनर्गठन न होने से यह जर्जर हालत में है। पूर्व वार्ड सभासद प्रह्लाद सती ने कहा कि नौटी रोड से अपर बाजार और सुभाषनगर सहित कई स्थानों पर पेयजल लाइन लीकेज कर रही है जिससे मुख्य बाजार, सुभाषनगर, सांकरी, प्रेमनगर, आईटीआई सहित कई मोहल्लों में अनियमित पेयजल आपूर्ति हो रही है।
चुनाव के बाद कोई हाल जानने नहीं आता
गांव के ही मुकेश पांडे, लक्ष्मी देवी और रमेश चंद्र का कहना है गांव सड़क के करीब ही है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सभी दलों के नेता वोट मांगने आते हैं। उनके सामने हर चुनाव में पानी की समस्या को रखा जाता है। चुनाव के समय नेता समस्या समाधान का आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई हमारे हाल जानने नहीं आता है। पिछले 14 दिन पानी इतना कम आ रहा है कि टंकी नहीं भर पाई है, जिससे पानी का वितरण नहीं हुआ। ऐसे में पानी की जरूरत को कैसे पूरा करें समझ नहीं आता। ताले में बंद रहता है नल। असनोड़ी गांव के लिए वर्ष 2006 में मासू पेयजल योजना बनी थी। शुरूआत में तो ग्रामीणों पूरा पानी मिलता रहा। इसके लिए गांव में पंद्रह स्टैंडपोस्ट भी लगाए गए थे। लेकिन इसी योजना से बाद में ओली, धरीगांव और गिरीगांव को जोड़ दिया गया। जिससे गांव में पानी बहुत कम पहुंचता है। पानी कम होने से टंकी पर ताला लगाकर पहले भंडारण किया जाता है। तीन दिन में टंकी भरती है। इसके बाद ग्रामीणों को पांच लीटर के डिब्बे से भरकर प्रत्येक परिवार को तीस लीटर पानी दिया जाता है।
लोग नदी में मोटर लगाकर कर रहे पानी की सप्लाई
पानी की समस्या नगर में गहराती जा रही है। अभी से शुरू हुई अनियमित आपूर्ति गरमियों और यात्रा सीजन में गहरा सकती है। जलसंस्थान को लीकेज और स्रोत पर पानी बर्बाद न हो इसके लिए काम करना चाहिए। – महेश खंडूड़ी/अनूप डिमरी/बीरेंद्र मिंगवाल कर्णप्रयाग।
पूरी पाइप लाइन के लीकेज ठीक कर दिए गए हैं। कहीं पर पंचायत की ओर से निर्माण कार्य करने के दौरान लाइन तोड़ी गई होगी जिसे जल्द ठीक कर दिया जाएगा। योजना के पुनर्गठन का काम जलनिगम का है। – पीके पांडे, सहायक अभियंता, जलसंस्थान कर्णप्रयाग।

सौजन्य से: अमर उजाला

एक करोड़ खर्च, फिर भी यमुनोत्री धाम के लिए पैदल बाईपास चलने लायक नहीं

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फिर मिला बजट, अब तो बनाएं रास्‍ता
बड़कोट (उत्तरकाशी)। यमुनोत्री धाम के लिए बनाए गए पैदल बाईपास मार्ग पर इस बार भी सुरक्षित आवाजाही संभव नहीं है। वन विभाग की ओर से 1.06 करोड़ खर्च कर बनाए गए मार्ग को दुरुस्त करने के लिए पर्यटन विभाग ने 20 लाख का बजट फिर वन विभाग को दिया है। यात्रा सिर पर है, लेकिन वन विभाग ने अभी तक यहां काम शुरू नहीं किया है।
यात्रा सीजन में यमुनोत्री पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चर एवं डंडी-कंडी के साथ तीर्थयात्रियों की आवाजाही से जाम की समस्या रहती है। जाम में फंसने से यात्रियों का शेड्यूल गड़बड़ाने के साथ ही यहां हादसे की आशंका भी बनी रहती है। इस समस्या से निजात के लिए पर्यटन मंत्रालय की ओर से वित्त पोषित योजना में भिंडियालीगाड से यमुनोत्री तक ढाई किमी बाईपास पैदल मार्ग का निर्माण कराया गया था। अपर यमुना वन प्रभाग ने वर्ष 2011 तक मार्ग पर 1.06 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं, लेकिन रास्ता आवाजाही लायक नहीं बन पाया है।
इस वैकल्पिक मार्ग को दुरुस्त करने की तीर्थ पुरोहितों एवं स्थानीय लोगों की मांग पर इस बार पर्यटन विभाग ने फिर वन विभाग को 20 लाख का बजट दिया है। हैरानी की बात यह है कि यात्रा सिर पर है, लेकिन अभी तक वन विभाग ने धरातल पर काम शुरू नहीं किया है।
मिला बजट
पर्यटन विभाग ने वन विभाग को मार्ग दुरुस्तीकरण को 20 लाख रुपये और दिए
भिंडियालीगाड-यमुनोत्री बाइपास पैदल मार्ग सुरक्षित आवाजाही लायक नहीं है। वन विभाग को इसी शर्त पर 20 लाख रुपये दिए गए हैं कि वह रास्ते को दुरुस्त कराएगा। जल्द ही मार्ग का निरीक्षण किया जाएगा। खुशहाल सिंह नेगी, पर्यटन अधिकारी उत्तरकाशी।
वन विभाग के लिए यह मार्ग सरकारी बजट का वारा न्यारा करने का जरिया बन गया है। एक करोड़ से अधिक खर्च करने के बाद भी रास्ता चलने लायक नहीं है। यहां मानकों के विपरीत निम्न गुणवत्ता के कार्य कराए गए हैं। मनमोहन उनियाल, तीर्थ पुरोहित यमुनोत्री।
पैदल मार्ग पर काम कराने के लिए पानी की जरूरत है। अब मार्ग पर पेयजल लाइन बिछने के साथ आज से ही काम शुरू कराया जा रहा है। किशोर लाल, वन क्षेत्राधिकारी यमुनोत्री।
सौजन्य से : अमर उजाला

पानी पूरा, फिर भी ‘चक्का जाम’

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मनेरी बैराज गेटों से हो रहे रिसाव से चल रही केवल दो टरबाइन
उत्तरकाशी। सर्दियों में भागीरथी में कम पानी वाले सीजन में मनेरी बैराज गेटों की मरम्मत नहीं कराने की जल विद्युत निगम की चूक अब भारी पड़ने लगी है। भागीरथी में पर्याप्त पानी के बावजूद तिलोथ विद्युत गृह में सिर्फ दो टरबाइनें ही चल पा रही हैं। जबकि एक टरबाइन लायक पानी मनेरी बैराज गेटों बेकार बह रहा है। गर्मियां बढ़ने के साथ ही जलागम क्षेत्र में बर्फ पिघलने के कारण भागीरथी में वाटर डिस्चार्ज बढ़ता जा रहा है। ऐसे में 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना में विद्युत उत्पादन भी बढ़ना चाहिए था, लेकिन निगम प्रबंधन की चूक उत्पादन हानि का सबब बन गई है। मनेरी बैराज गेटों से भारी रिसाव के कारण तिलोथ विद्युत गृह में दो टरबाइनें चलाने लायक पानी भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसी तरह खींचतान कर रोजाना 0.8 मिलियन यूनिट उत्पादन हो रहा है।
विद्युत गृह में सुरंग से महज 30.46 क्यूमेक्स पानी पहुंचने से पीक आवर्स में ही 30-30 मेगावाट की दो टरबाइनें चल पा रही हैं, जबकि मनेरी बैराज गेट और फ्लशिंग कंड्यूट गेट से करीब 20 क्यूमेक्स पानी रिस कर बेकार बह रहा है। जानकारों के मुताबिक यदि सर्दियों में भागीरथी में कम पानी वाले सीजन में गेटों की मरम्मत करा ली जाती, तो इस समय तिलोथ विद्युत गृह से क्षमता के अनुरूप उत्पादन लिया जा सकता था।
लापरवाही
सर्दियों में भागीरथी में पानी कम होने पर भी नहीं कराया गया काम
बीते साल निगम को हुआ 75 मिलियन यूनिट का नुकसान
हर साल कम हो रहा विद्युत उत्पादन
आपदा की मार कहें या फिर कुप्रबंधन, 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण जल विद्युत परियोजना से विद्युत उत्पादन में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। वर्ष 2011-12 में परियोजना से 516.112 मिलियन यूनिट उत्पादन हुआ था। वर्ष 2012-13 में यह घट कर 454.964 मिलियन यूनिट और बीते वित्तीय वर्ष में लक्ष्य से 75 मिलियन यूनिट कम महज 382.174 मिलियन यूनिट ही रह गया है, जिससे निगम को करीब 5.25 करोड़ की हानि उठानी पड़ी। फिलहाल मनेरी बैराज से विद्युत गृह को 30.46 क्यूमेक्स पानी मिल रहा है, जिससे पीकिंग आवर्स में दो मशीनों को चलाकर रोजाना 0.8 मिलियन यूनिट उत्पादन हो रहा है। बीते वित्तीय वर्ष में परियोजना से लक्ष्य 457 मिलियन यूनिट के सापेक्ष 382.174 मिलियन यूनिट उत्पादन हुआ। -अंबरीश यादव, अधिशासी अभियंता, तिलोथ विद्युत गृह।
करीब छह करोड़ लागत से मनेरी बैराज गेटों की मरम्मत करानी है। फरवरी से इसके लिए तीन बार निविदा कराने पर भी कोई ठेकेदार नहीं आया। डाउन स्ट्रीम में बाढ़ सुरक्षा कार्यों के कारण क्लोजर भी नहीं मिल पा रहा है। अब विद्युत गृह में मशीनों की मरम्मत के दौरान क्लोजर लेकर गेटों से हो रहा रिसाव रोका जाएगा।
जेबी सिंह, डीजीएम जल विद्युत निगम।
सौजन्य से : अमर उजाला

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