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माफिया ने रुकवाया दीवार का काम, लोनिवि कर रहा था काम

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अवैध खनन के लिए खोह नदी में उतरने का रास्ता हो रहा था बंद

कोटद्वार (उत्तराखंड)। खोह नदी में अवैध खनन करने वाले अब सरकारी काम में भी बाधा बनने लगे हैं। नदियों में टैक्टर ट्राली उतारने का रास्ता बंद होने पर ही सड़क सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य रुकवा दिया। दिनभर अवैध खनन से भरी ट्रैक्टर ट्रालियां सड़कों पर दौड़ती रहती है। जिसके वजह से प्रशासन ने ऐसा निर्णय लिया था। खननकारियों ने लोक निर्माण विभाग की तरफ से काशीरामपुर तल्ला में करवाया जा रहा सड़क सुरक्षा दीवार का निर्माण रुकवाया दिया। जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने तहसील पहुंचकर इसकी शिकायत की। ग्रामीणों ने कहा कि खोह नदी में अवैध खनन से आबादी को खतरा बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार खननकारियों को दौड़ा चुके हैं। लेकिन उन पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। गांव की हर गली और सड़क पर खननकारियों के ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं। विस्तार से देखें

खाकी की कमी , माफिया की चांदी

 

खनन सामग्री से भरे ट्रक ने रोका डीजीपी का रास्ता

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उत्तराखंड मे खनन माफिया जगह – जगह पहाड़ एवं नदियों का सीना चीर रहे है। यही हालत हर राज्य मे है। खदान को लेकर कोर्ट ने भी कई बार प्रशासन को निर्देश दिया है। उसके बावजूद इससे निवारण नही हो रहा है। पुलिस और प्रशासन का जरा भी खौफ माफिया पर नहीं दिख रहा है। बेखौफ नदियां खोद रहे खनन माफिया को वाहन पकड़े जाने पर जुर्माना देना नहीं खल रहा है। अवैध खनन पर सिर्फ जुर्माने का प्रावधान है, माफिया तत्काल जुर्माने की राशि अदा कर वाहन रिलीज करा लेता है। फिर खनन कार्य मे लग जाता है। कहानी जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण बार – बार आरोप लगाते है।  कार्यवाही होती है। थोड़ा शांत होने के बाद माफिया पुनः सक्रिय हो जाते है।  विस्तार से देखें

ऐसे तो रुकने से रहा अवैध खनन

क्रशरों के खिलाफ फूटा गुस्सा

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साइट का निरीक्षण करने पहुंचे पीसीबी के अफसर को लोगों ने घेरा

कीर्तिनगर। स्टोन क्रशर के विरोध में आंदोलित ग्रामीणों ने साइट का निरीक्षण करने पहुंचे उत्तराखंड पर्यावरण सरंक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी का घेराव किया।
ग्रामीणों ने आक्रोश जताया कि पर्यावरण बोर्ड से एनओसी लिए बिना ही चल रहे क्रशरों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है कि दो क्रशरों के आवेदन विभाग को मिले हैं। अभी एनओसी निर्गत किया जाना बाकी है। बिना एनओसी के चल रहे क्रशरों पर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्र में पांच स्टोन क्रशरों को लगाए जाने की शासन से मिली अनुमति के विरोध में मलेथा के ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन 19वें दिन भी जारी रहा। रविवार को मलेथा में स्टोन क्रशरों की साइट का निरीक्षण करने उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एनएस राणा पहुंचे तो ग्रामीणों ने उनका घेराव कर दिया। ग्रामीणों ने आक्रोश जताया कि क्षेत्र में बिना पर्यावरण बोर्ड की अनुमति के क्रशर चल रहे हैं, लेकिन विभाग उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एनएस राणा ने कहा कि दो क्रशरों ने विभाग में आवेदन किया है। मानकों की पूर्ति के बाद ही इन क्रशरों को एनओसी निर्गत की जाएगी। शेष तीन क्रशरों ने विभाग में कोई आवेदन नहीं किया है। घेराव करने वालों में ग्राम प्रधान शूरवीर सिंह बिष्ट, राजेंद्र सिंह राणा, हरीश बलूनी, दिनेश भट्ट, गंगा सिंह, नंदा देवी, रुकमणी देवी, लक्ष्मी देवी, विधाता देवी, सीता देवी यशोदा देवी आदि शामिल थे।
 
 
 
सौजन्य: अमरउजाला
 
 

खनन के खिलाफ आधी सदी का कामयाब मोर्चा

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चंबा (नई टिहरी)। जहां एक ओर माफिया ने अवैध खनन के जरिये उत्तराखंड के कई पहाड़ और नदियां खोद डाले हैं। ऐसे में गढ़वाल की हेंवलघाटी के लोगों के साहस को सलाम करना होगा जिन्होंने 1962 से लगातार खनन के खिलाफ आंदोलन चलाकर माफिया के मंसूबों को नेस्तनाबूद कर दिया है। मार्ग में बड़ी-बड़ी बाधाएं आईं, धनबल, बाहुबल का इस्तेमाल हुआ लेकिन आंदोलनकारी न टूटे, न झुके। खनन तो दूर क्या मजाल कभी कोई एक पत्थर भी उठा पाया हो। इस आंदोलन के कई अगुवा तो स्वर्ग भी सिधार गए हैं, लेकिन यह आंदोलन 2014 में भी पूरे जोश के साथ जारी है। कटाल्डी गांव में खनन का पट्टा सरकार ने दिया है। ग्रामीणों के विरोध के बाद बीते साल टिहरी के डीएम ने खनन को क्षेत्र के लिए नुकसानदेह बताकर अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। शासन स्तर से मामला अभी लंबित है। इस बाबत ग्रामीण एक बड़ी बैठक बुलाने की तैयारी कर रहे हैं। विस्तार से देखें..

सौजन्य से: अमरउजाला

डॉक्टर पहाड़ जाएगा तो ज्यादा सैलरी पाएगा

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मुख्यमंत्री ने विशेषाधिकार का इस्‍तेमाल कर जारी की चिकित्सकों की अटकी तबादला नीति

उत्तराखंड मे पहाड़ो पर रहने वाले लोगों को सरकार ने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए राहत का काम किया है। पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्रों में चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराने पर ज्यादा जोर दिया गया है। पहले डॉक्टर दुर्गम पहाड़ो पर स्वास्थ्य सुविधा देने नही जाते थे। लेकिन सरकार की पहल के बाद अब जो डॉक्टर पहाड़ो पर जाकर स्वास्थ्य सुविधायेँ देंगे। उन्हे 20 फीसदी ज्यादा वेतन दिया जाएगा और उनके परिवार को शहर के अनुरूप सुविधाएं दी जाएंगी। नई नीति में हाउस रेंट की भी व्यवस्था है। यदि कोई डॉक्टर सुगम स्थानों पर सेवा दे रहा है तो उसका 5 साल बाद तबादला किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों को यह आदेश दिया कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवायें दुर्गम स्थानों पर रहने वाले लोगों को बेहतर मिले। उसमे किसी प्रकार की कोताही न हो। विस्तार से देखें।

 

Four Gram Panchayats in Uttarakhand joined forces to oppose a cement plant.

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When Basanti Devi entered the village of Bachwadi in Uttarakhand’s Takula block on one of her routine visits, she knew that something was wrong. Instead of the normal hustle, groups of men stood about talking quietly. She asked them what the matter was.

Basanti and the Gram Panchayat
Basanti Devi was on a  secure enough footing with the men of the village to ask them what was troubling them. After all, for the last five years she had been visiting them regularly. Her visits enabled the creation of women’s groups, helped them open bank accounts and generally allowed them access to a better, more dignified life. Inspired by her, the women of the five villages in that gram panchayat had pledged to protect their forest and stringently applied measures to minimise lopping. As a result of this, today the once-degraded forest was coming back to life. This  also resurrected the once-diminished stream that issued from the forest. If this were not enough, Basanti-di’s entire life and her long association with the Lakshmi Ashram were proof that she could be relied upon. Read more..

Courtesy: India Water Portal

चमोली और उत्तरकाशी मे बादल फटा, भारी नुकसान

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उत्तराखंड के उत्तरकाशी और चमोली ज़िले मे बुद्धवार 06 अगस्त 2014, को बादल फट गया। जिससे लोगो का काफी नुकसान हुआ है। अभी इस त्रासदी से पहले भी लोग पीड़ित थे, कि आसमान से फिर कहर गिर गया। चमोली ज़िले के कर्णप्रयाग क्षेत्र मे आसमानी विजली गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गयी। जबकि भूस्खलन होने से ध्वस्त हुये मकान मे चार लोग घायल हो गए। लगातार बारिश होने की वजह से नदियां ऊफान पर चल रही है। जिससे लोगो को काफी दिक्कते उठानी पद रही है। उत्तरकाशी ज़िले के कामर गाँव के पास बुद्धवार रात मे बादल-फटने से तकरीबन तीन-चार गाँव को गोशालाओ से जोड़ने वाली पाँच पुलिया बह गयी। जिसकी वजह से कामर गाँव के पंद्रह और जामर गाँव के पाँच परिवार गोशालाओं मे ही फंश गए। विस्तार से देखें

लोहाली की पहाड़ी का सीना चीरा

सौजन्य से: जागरण.कॉम

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