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Centre, states get notice on jail wages

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NEW DELHI: The Supreme Court on Friday issued notice to Centre and state governments on a PIL seeking its direction to fix wage for prison workers on par with minimum wages and to provide eight hours work to all prisoners and under-trials who volunteer for such work.

Agreeing to hear the PIL filed by a Bihar-based NGO Bandi Adhikar Andolan, a bench headed by Chief Justice H L Dattu sought response from the governments. The petitioner alleged that denying reasonable wages to a prisoner for his work amounts to violation of their rights.

“This Court had directed in 1998 to fix the wages of the prisoners according to the Minimum Wages Act, 1948. Inspite of the directions of this Court, the prisoners’ wages continue to be much below than the average minimum wage thus violating the constitutional rights of a prisoner,” the petition said. Read more

More link: zeenews.india.comwww.business-standard.com

Courtesy: THE TIMES OF INDIA

Will give the nation 2% GDP from the port and road sector

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Gadkari came down heavily on social organizations and NGOs, saying they were a hurdle to development. “There are microscopic minorities that stop ongoing works and get excessive coverage in the media. With such a mentality, how can we get investments and move forward?” he asked. He claimed that power, mining and infrastructure projects were pending because of non-clearance from the forest and environment departments. He said major road projects were also pending because land acquisition had become a tedious procedure.

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Coutesy: TOI

खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने की दुग्ध विक्रेताओ पर कार्यवाही

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(मध्य प्रदेश) पन्ना ज़िले के पवई मे मिलावटी दूध पर लगाम लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने सख्ती से निपटने के लिए कमर कस लिया है। बार-बार  समाचार पत्र मे खबर आने के बाद अधिकारी ने इस पर अमल करना शुरू कर दिया है। मिलावट खोरों को रोकने के लिए दूधियो से दूध के सेमपल इकट्ठा किया जा रहा है। अधिकारी महोदया ने आम जनता को इस बात से अवगत कराया कि कोई भी दूधवाला बिना लाइसेन्स के दूध बेचता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सक्त से सक्त कार्यवाही की जाएगी। क्योकि यह पूरी तरह गैर कानूनी है। साथ ही उन्होने किराना ब्यावसायी, मिस्ठान भंडार, सब्जी की दुकान आदि से अपील की है कि दुकानों मे शुद्ध खोया रखें एवं साफ सफाई पर विशेष ध्यान रखें। वरना उनके खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी।
विस्तार से देखें।

Govt approved house for Bidi workers in 2007, They’re still waiting,Pls help…

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Shahida Bano is President of Bidi laborers union in Rewa Madhya Pradesh and says Govt had approved housing for 961 bidi laborers in 2007. The money for the same was also released in 2012 but the laborers are yet to get the houses because of lack of co-ordination between various Govt agencies. You are requested to call Collector at 09425147040 and S.D.M at 09425948788 to help.For more Shahida Ji can be reached at 07580975579 for details click here

APR 15, 2014, BY SHAHIDA BANO

लाखों रुपये जारी गए कहां, पता नहीं

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हरिद्वार। शिक्षा विभाग का हाल देखिए। कहीं बजट जारी होने के बाद भी भवन नहीं बन रहे हैं और कहीं पांच-पांच वर्ष से अधूरे भवन बजट के इंतजार में खड़े हैं। मजबूरन बच्चों को कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर उच्च शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही हैं। अभिभावक परेशान हैं। लेकिन संबंधित विभागीय अधिकारी इस तरफ ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। लक्सर ब्लॉक के एक प्राइमरी स्कूल भवन के लिए पांच वर्ष पहले बजट जारी हुआ है। लेकिन मौके पर नींव तक नहीं खुदी। बहादराबाद ब्लॉक के चार और रुड़की क्षेत्र का एक प्राइमरी स्कूल तीसरी किस्त जारी न होने पर अधूरा पड़ा है। लक्सर ब्लॉक के गांव नैतवाला सैदाबाद के ग्रामीण लंबे समय से जूनियर हाईस्कूल खोलने की मांग कर रहे हैं। बार-बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को अवगत कराया गया कि प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद छोटे-छोटे बच्चों को कई किलोमीटर पैदल चलकर अन्य गांवों में स्थापित जूनियर हाईस्कूलों में जाना पड़ रहा है। सर्दियों और बरसात में बच्चों को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। इसके लिए ग्राम पंचायत की ओर से भी जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया। वर्ष 2008 में शिक्षा विभाग ने नैतवाला सैदाबाद गांव में जूनियर हाईस्कूल की मंजूरी दी। सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक दिनेश प्रसाद ने बताया कि जूनियर स्कूल के भवन निर्माण के लिए नौ लाख रुपये दिया जाता है। शासन से इसकी स्वीकृति भी मिली है। वर्ष 2008 में ही पहली किस्त के तौर पर इसके लिए 3 लाख 10 हजार रुपये जारी किए जा चुके हैं। शिक्षा विभाग की ओर से जूनियर स्कूूलों की सूची में नेतवाला सैदाबाद का नाम भी शामिल कर लिया। जबकि हकीकत यह है कि गांव में जूनियर स्कूल की नींव तक नहीं खोदी गई। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि पहली किस्त गई कहां। सर्व शिक्षा अभियान के जिला स्तरीय अधिकारियों के पास इसका कोेई जवाब नहीं हैं।

शिक्षा विभाग के पास नहीं इन सवालों के जवाब
पांच साल में भवन का निर्माण शुरू क्यों नहीं हुआ।
भवन निर्माण का पैसा किसके खाते में किया ट्रांसफर।
निर्माण शुरू नहीं हुआ तो पैसा अब कहां गया।
भवन नहीं तो स्कूलोें की सूची में कैसे किया नाम शामिल।
भवन ही नहीं तो फिर तीन शिक्षकों के रिक्त पद क्यों दिखाए।
लेखाधिकारी आएंगे तभी देखेंगे
पांच स्कूलों को तीसरी किस्त का इंतजार
वर्ष 2008 में नैतवाला सैदाबाद जूनियर स्कूल के लिए किस्त जारी, नींव अब तक नहीं खुदी
सर्व शिक्षा अभियान के जिला स्तरीय अधिकारी नहीं दे पा रहे जवाब
वर्ष 2008-09 से पांच प्राइमरी स्कूलों को अंतिम किस्त का इंतजार
सरकारी धन को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों की गंभीरता देखिए। जब जिला शिक्षाधिकारी (बेसिक) एवं सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना अधिकारी जगमोहन सोनी से नैतवाला सैदाबाद स्कूल के लिए जारी हुई प्रथम किस्त की धनराशि के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं तो दो-ढाई महीने से ही यहां हूं। यह मामला मेरे कार्यकाल से पहले का है। फरवरी में यहां सहायक लेखाधिकारी रिटायर हो गए थेे। नए लेखाधिकारी की नियुक्त होते ही नैतवाला सैदाबाद के पैसे की स्थिति और प्राथमिक स्कूलोें की तीसरी किस्त क्यों जारी नहीं की गई। इसका पता लगाया जाएगा। इस पर भी लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि एक सहायक लेखाधिकारी के रिटायरमेंट होने के बाद विभाग का पूरा सिस्टम ही ठप हो गया है।

ब्लॉक बहादराबाद में राजकीय प्राथमिक विद्यालय उत्तमनगर, भिल्डियाना, गैंडीखाता गुजर बस्ती न. एक और पथरी गुजर बस्ती न. दो के स्कूल भवनों का आधे से ज्यादा निर्माण पूरा हो चुका है। रुड़की स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय खाताखेड़ी न. दो का निर्माण 90 फीसदी पूरा हो चुका है। इन सभी पांच विद्यालयों के लिए कुल रकम 5.46 लाख रुपये में से 1.10 लाख रुपये की तीसरी किस्त जारी नहीं की जा रही है। जबकि विभाग के पास बजट भी मौजूद है। यह स्कूल वर्ष 2008-09 से तीसरी किस्त का इंतजार कर रहे हैं।

सौजन्य से : अमर उजाला

गौचर से होगी केदारनाथ हाईवे की निगरानी

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रुद्रप्रयाग। पिछले वर्ष की आपदा से क्षतिग्रस्त केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग दोबारा से 21 बीआरटीएफ (बार्डर रोड टास्क फोर्स) जोशीमठ के हवाले होने जा रहा है। नए वित्तीय वर्ष अप्रैल माह से रुद्रप्रयाग-केदारनाथ एनएच-109 की देखरेख 36 बीआरटीएफ उत्तरकाशी नहीं करेगी। यह निर्णय राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय बनाने और उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के बीच अधिक दूरी को देखते हुए लिया गया है।
करीब 12 साल पूर्व केदारनाथ मोटर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा देते हुए इसे लोनिवि से बीआरओ/ग्रिफ (जनरल रोड इंजीनियरिंग फोर्स) को सौंप दिया गया था। दो साल पूर्व तक इस मार्ग को 21 बीआरटीएफ जोशीमठ की 66 आरसीसी (सड़क निर्माण इकाई) गौचर देख रही थी। लेकिन अचानक इसे 200 किलोमीटर दूर 36 बीआरटीएफ को सौंप दिया गया। तब से 1442 बीसीसी (पुल निर्माण इकाई) उत्तरकाशी एनएच की देखरेख करती आ रही है। बीआरओ के इस निर्णय पर उस समय सवाल भी उठे थे। क्योंकि गौचर रुद्रप्रयाग से सिर्फ 22 किमी दूर है। 21 बीआरटीएफ के ओसी गौचर में और कमांडर जोशीमठ में बैठते हैं। जबकि 36 बीआरटीएफ के कमांडर और ओसी दोनों ही उत्तरकाशी बैठते हैं। जो रुद्रप्रयाग से ठीक विपरीत दिशा में हैं। जून माह में आई आपदा में भी यह दूरी काफी खली थी। उत्तरकाशी से मशीनरी, मजदूर और अधिकारियों को आने में वक्त लग गया। साथ ही प्रशासन और शासन से समन्वय में भी काफी दिक्कतें हुई। कई बार उत्तरकाशी के अधिकारी प्रदेश शासन के अधिकारियोें के साथ मीटिंग में नहीं पहुंच पाए। यही वजह रही कि बीआरओ ने दोबारा से इसको जोशीमठ के हवाले करने का फैसला लिया।
रामबाड़ा तक मार्ग 30 अप्रैल तक होगा तैयार
रुद्रप्रयाग। जिला प्रशासन ने 30 अप्रैल तक केदारनाथ पैदल मार्ग को रामबाड़ा तक सुगम और सुरक्षित करने का दावा किया है। काम में और तेजी आए, इसके लिए जिलाधिकारी डा. राघव लंगर ने स्वयं रामबाड़ा तक पैदल मार्ग का निरीक्षण किया।
आपदा से क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग का सोनप्रयाग से रामबाड़ा तक लोनिवि और रामबाड़ा से ऊपर केदारनाथ तक एनआईएम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी के मजदूर मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य कर रहे हैं। लोनिवि ने 10 किमी के पैच में 550 मजदूर काम पर लगाए गए हैं। जबकि रामबाड़ा में मंदाकिनी नदी की दूसरी ओर एनआईएम के 109 मजदूर काम कर रहे हैं। रामबाड़ा से करीब साढे़ तीन किमी ऊपर छोटा लिनचोली में 70 मजदूर मार्ग खोलने में जुटे हुए हैं। रामबाड़ा और छोटा लिनचोली के बीच तीन स्थानों पर ग्लेशियर हैं। मजदूरों ने यहां बर्फ हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन ऊपर से बर्फ दोबारा रास्ते में आ रही है। बर्फ को स्थायी रुप से हटाने के लिए अब बर्फ काटने की मशीन मंगवाई जा रही है। डीएम डा. राघव लंगर ने बताया कि लोनिवि ने रामबाड़ा तक मार्ग लगभग खोल दिया है। गौरीकुंड से आगे दो स्थानों में स्लाइड है। यहां स्थायी मार्ग बनाया जा रहा है। लोनिवि अन्य सुधारीकरण कार्य कर रही है।
अभी तक उत्तरकाशी से होता था देखरेख का काम
वित्तीय वर्ष 2013-14 की समाप्ति के बाद देखेगी आरसीसी
कंट्रोलिंग और प्रशासन के साथ समन्वय की समस्या हो रही थी। उत्तरकाशी से अधिकारियों को आने-जाने में दिक्कत हो रही थी। लंबे समय से यह फेरबदल चल रहा था। काम तो वही है, सिर्फ डिवीजन चेंज हो रही है। – बिग्रेडियर केके राजदान, चीफ इंजीनियर बीआरओ
डीएम ने किया पैदल मार्ग का स्थलीय निरीक्षण
गौरीकुंड-केदारनाथ यात्रा पैदल मार्ग की मरम्मत करते लोनिवि के मजदूर।
Courtesy: अमर उजाला ब्यूरो

Hill of death

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More than 200 people in 14 villages near Roro hill in Jharkhand are dying slowly because of an abandoned asbestos mine

During a film shoot at the beautiful Roro hill in Jharkhand’s Chaibasa district, the villain takes out his gun to kill a young man. The moment he shoots, onlooker Rango Deogam bursts into laughter and yells at the camera crew, “You are shooting a death scene on the hill of death.”

The shoot is stopped because of his outrageous act and Deogam is escorted out when he starts coughing blood.

The 65-year-old resident of the Roro village then clears his throat and says, “That’s death.” Deogam is not the only one in the Roro village who is coughing blood. An estimated 200 people in the 14 villages near the Roro hill are dying slowly from a lung disease called abestosis because of an abandoned crysotile asbestos mine in the area. “The exact number of the victims can only be known after an extensive medical camp is held in the affected villages,” says Punit Minz, convener of Bindrai Institute for Research Study and Action (BIRSA), a non-profit that has been working in the area for the past decade to educate the residents about the problems with asbestos.

Guidelines flouted

The crysotile asbestos mine—which was owned by Birla’s Hyderabad Asbestos Cement Products Limited (HAPCL)—was operational for 20 years between 1963 and 1983 at Roro hill. It was abruptly closed after the mine ran into huge losses. HAPCL has since then changed its name thrice and is now called HIL and is owned by C K Birla. The company website says it provides green solutions.

The company, which employed over 1,500 workers at the site, chose not to inform the workers about the health hazards because of exposure to asbestos. If the company would have sensitised the people, it could have saved the workers who are suffering from asbestosis, which is curable if diagnosed early. Asbestosis is a chronic disease that affects the functioning of lungs. Advanced asbestosis leads to heart or respiratory failure.

The development of asbestosis is slow and the disease becomes critical about 15 years after the first exposure to asbestos. Also, excessive exposure can result in death within 10 years.

“The company never told us about the health hazards of asbestos. It also never conducted medical checkups for the workers for the fear of getting caught. Most of us came to know about the disease long after the mine was shut down,” says Deogam, who worked with the company for five years. “There used to be lots of dust. By the end of my shift, I would look like a white ghost,” he adds. Read more

Courtesy: down to earth

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