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‘दिल्ली की सड़कों पर 15 साल से अधिक पुराने वाहनों को चलने की अनुमति नहीं’

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नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण से चिंतित, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को कहा कि 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को दिल्ली की सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। एनजीटी प्रमुख न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि इस तरह के वाहन जहां भी मिलें, संबंधित अधिकारी वाहनों को जब्त करने सहित कानून के अनुरूप उचित कदम उठाएं।

पीठ ने कहा कि यह निर्विवाद और सवालों से परे है कि एनजीटी, दिल्ली में वायु प्रदूषण हर दिन गुजरने के साथ बढ़ रहा है। यह न केवल बहुत खराब स्थिति को पेश करता है बल्कि यह संकेत देता है कि और मुसीबत आ सकती है। पीठ ने कहा कि 15 साल से अधिक पुराने डीजल या पेट्रोल के सभी वाहनों को सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह निर्देश दुपहिया, तीन पहिया, चार पहिया, हल्के वाहनों और भारी वाहनों सहित सभी पर लागू होगा।

पीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति को प्लास्टिक या पेड़ के पत्तों सहित कोई अन्य सामग्री खुले में जलाने की अनुमति नहीं होगी।

सौजन्य से: जी न्यूज़

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Public hearing on Odisha coal block called off following strong resistance by villagers

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A controversial public hearing for the Mahaguj Colliery Limited’s coal block here had to be called off today after angry people of five panchayats including Bagadia, Machakut under Chhendipada block of Angul district in Odisha dismantled the stage and the tent put up here by the administration for the hearing.

The people are opposed to a coal mining project in their area as it is a fertile land that offers them subsistence.

There are reports that the senior district officials including the sub-collector and the ADM, who had reached the spot of the public hearing, have had to face the ire of the people. Read more

Courtesy: Odisha Sun Times

Cancel public hearing at Chhendipada: Samantara

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Well-known social activist and president of Lok Shakti Abhiyan Prafulla Samantara has urged the Odisha State Pollution Control Board to cancel public hearing for Machakut coal mining scheduled to be held on Thursday at Chhendipada in Angul district of the State.

“The people of five gram panchayats including Bagadia, Machakut under Chhendipada Block Angul district have been protesting not to allow mining of coal in their agriculture land since the notification for land acquisition came out,” Samantara has said in a letter to the Member-Secretary of Odisha State Pollution Control Board.

“The natural resources like fertile agricultural land, forest, natural streams, and rivers will be destroyed by mining of coal.”

But against the will of the villagers the government is trying to have acquisition of land forcefully which could not take place till now due to democratic people’s resistance, Samantara said. Read more

Courtesy: Odisha Channel

खनन सामग्री से भरे ट्रक ने रोका डीजीपी का रास्ता

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उत्तराखंड मे खनन माफिया जगह – जगह पहाड़ एवं नदियों का सीना चीर रहे है। यही हालत हर राज्य मे है। खदान को लेकर कोर्ट ने भी कई बार प्रशासन को निर्देश दिया है। उसके बावजूद इससे निवारण नही हो रहा है। पुलिस और प्रशासन का जरा भी खौफ माफिया पर नहीं दिख रहा है। बेखौफ नदियां खोद रहे खनन माफिया को वाहन पकड़े जाने पर जुर्माना देना नहीं खल रहा है। अवैध खनन पर सिर्फ जुर्माने का प्रावधान है, माफिया तत्काल जुर्माने की राशि अदा कर वाहन रिलीज करा लेता है। फिर खनन कार्य मे लग जाता है। कहानी जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण बार – बार आरोप लगाते है।  कार्यवाही होती है। थोड़ा शांत होने के बाद माफिया पुनः सक्रिय हो जाते है।  विस्तार से देखें

ऐसे तो रुकने से रहा अवैध खनन

क्रशरों के खिलाफ फूटा गुस्सा

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साइट का निरीक्षण करने पहुंचे पीसीबी के अफसर को लोगों ने घेरा

कीर्तिनगर। स्टोन क्रशर के विरोध में आंदोलित ग्रामीणों ने साइट का निरीक्षण करने पहुंचे उत्तराखंड पर्यावरण सरंक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी का घेराव किया।
ग्रामीणों ने आक्रोश जताया कि पर्यावरण बोर्ड से एनओसी लिए बिना ही चल रहे क्रशरों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है कि दो क्रशरों के आवेदन विभाग को मिले हैं। अभी एनओसी निर्गत किया जाना बाकी है। बिना एनओसी के चल रहे क्रशरों पर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्र में पांच स्टोन क्रशरों को लगाए जाने की शासन से मिली अनुमति के विरोध में मलेथा के ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन 19वें दिन भी जारी रहा। रविवार को मलेथा में स्टोन क्रशरों की साइट का निरीक्षण करने उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एनएस राणा पहुंचे तो ग्रामीणों ने उनका घेराव कर दिया। ग्रामीणों ने आक्रोश जताया कि क्षेत्र में बिना पर्यावरण बोर्ड की अनुमति के क्रशर चल रहे हैं, लेकिन विभाग उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एनएस राणा ने कहा कि दो क्रशरों ने विभाग में आवेदन किया है। मानकों की पूर्ति के बाद ही इन क्रशरों को एनओसी निर्गत की जाएगी। शेष तीन क्रशरों ने विभाग में कोई आवेदन नहीं किया है। घेराव करने वालों में ग्राम प्रधान शूरवीर सिंह बिष्ट, राजेंद्र सिंह राणा, हरीश बलूनी, दिनेश भट्ट, गंगा सिंह, नंदा देवी, रुकमणी देवी, लक्ष्मी देवी, विधाता देवी, सीता देवी यशोदा देवी आदि शामिल थे।
 
 
 
सौजन्य: अमरउजाला
 
 

Supreme Court Finds Problems with Coal Allocation

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The Supreme Court of India in a Judgement on coal allocation on Aug 25, 2014 finds huge problems. In Para 154 it sums up ‘the entire allocation of coal block as per recommendations made by the Screening Committee from 14.07.1993 in 36 meetings and the allocation through the Government dispensation route suffers from the vice of arbitrariness and legal flaws. The Screening Committee has never been consistent, it has not been transparent, there is no proper application of mind, it has acted on no material in many cases, relevant factors have seldom been its guiding factors, there was no transparency and guidelines have seldom guided it. On many occasions, guidelines have been honoured more in their breach. There was no objective criteria, nay, no criteria for evaluation of comparative merits. The approach had been ad-hoc and casual. There was no fair and transparent procedure, all resulting in unfair distribution of the national wealth. Common good and public interest have, thus, suffered heavily. Hence, the allocation of coal blocks based on the recommendations made in all the 36 meetings of the Screening Committee is illegal.’

बीमार बना रहा पानी, मुश्किल में जिंदगानी

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भगवानपुर में फैक्ट्रियों के प्रदूषण से एक लाख लोग प्रभावित, पर्यावरण दिवस पर भी नहीं उठा मुद्दा

रुड़की/भगवानपुर। पर्यावरण दिवस पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक बार फिर बड़ी-बड़ी बातें हुईं। जगह-जगह रैलियों, गोष्ठियों और कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अधिकारियों और संगठनों ने भी कई दावे किए। लेकिन हर रोज प्रदूषण की मार झेल रहे भगवानपुर क्षेत्र के लोगों की किसी ने सुध नहीं ली। इसके लिए जिम्मेदार फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई की बात किसी की जुबां पर नहीं आई।

दरअसल, भगवानपुर क्षेत्र में कई फैक्ट्रियों से निकलने वाला अवशिष्ट केमिकल (गंदा पानी) क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। फैक्ट्रियां में इसका समुचित निस्तारण नहीं होने के कारण खुले में छोड़ दिया जाता है, जिससे ग्राउंड लेवल वाटर प्रदूषित हो रहा है। इस कारण घरों में लगे नलों में गंदा पानी आने लगा है। क्षेत्र की करीब एक लाख की आबादी पर बीमारियों का संकट बढ़ रहा है। खेतों में फसल भी प्रभावित हो रही है और पशुओं में भी बीमारियां बढ़ रही हैं। लोगों में इस बात को लेकर रोष है कि कई बार उन्होंने फैक्ट्रियों का अवशिष्ट निस्तारण कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

केमिकल युक्त पानी का निस्तारण नहीं होने से बढ़ा खतरा
फैक्ट्रियां लगने के बाद हमारे नलों में गंदा पानी आ रहा है। अधिकारियों से पानी की शुद्धता के लिए कई बार अपील की, लेकिन समस्या बनी हुई है। — मेमो देवी, निवादा

फैक्ट्रियां हैं क्षेत्र में
क्षेत्र में वर्ष 2005 के बाद से अस्तित्व में आए औद्योगिक क्षेत्र में सिसौना, मक्खनपुर, रायपुर, चौल्ली, सिकंदरपुर और शाहपुर तथा नन्हेड़ा आदि गांवों में करीब 480 फैक्ट्रियां हैं। इनमें से कई फैक्ट्रियों का अवशिष्ट केमिकल फैक्ट्री में लगे ट्रीटमेंट प्लांट से शोधन करने के बजाय खुले में ही बहाया जा रहा है। कई फैक्ट्रियों का अवशिष्ट कई लोगों के खेतों में बहाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से पानी की निकासी के लिए नाले का निर्माण कराना भी प्रस्तावित है लेकिन इसका प्रस्ताव भी फाइलों में ही बंद पड़ा है।

फसल भी हो रही प्रभावित
फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी बाग में घुस जाने से मक्खनपुर निवासी अमीर आलम और जान आलम के बाग में आम की फसल प्रभावित हुई। दोनों किसानों का कहना है कि पिछले दो साले में उनके बाग के कई पेड़ सूख गए। एसडीएम से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

बीमारियों की चपेट में आ रहे लोग
सरकारी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विकांत सिरोही का कहना है कि प्रदूषित पानी के कारण टायफायड, उल्टी-दस्त, पीलिया, मलेरिया, हैजा, चर्मरोग जैसे रोग क्षेत्र में बढ़ रहे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन हैजा और टायफायड के करीब 50 मरीज आ रहे हैं। वहीं भगवानपुर कस्बे के निजी चिकित्सक प्रवीण कुमार ने बताया कि पीलिया और पेट दर्द जैसे रोगों के मरीजों की संख्या दूषित पानी के कारण बढ़ रही है।

फैक्ट्रियों के अवशिष्ट के समुचित निस्तारण नहीं कराने का मामला पहले भी सामने आया था। इस बारे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ सभी फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया जाएगा। जिन फैक्ट्रियों में ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा है वहां इसे लगवाने और लगा है तो उसका उपयोग करने के लिए कहा जाएगा। खुले में अवशिष्ट छोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -प्रत्यूष सिंह, एसडीएम

ऐसे प्रदूषित हो रहा पानी
जानकारों के अनुसार, फैक्ट्रियों की ओर से केमिकलयुक्त पानी खुले में ही छोड़ देने के कारण यह धीरे-धीरे भूतल के नीचे पहुंचकर पानी में मिल जाता है। इसके बाद जब नलों से पानी खींचा जाता है तो उसके हानिकारक तत्व पानी के साथ मिलकर बाहर आ जाते हैं। कई फैक्ट्रियों में ऐसा अवशिष्ट पानी बोरवेल करके भूतल में पहुंचाने के भी आरोप लग रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कराई गई जांच में भी दूषित पानी की पुष्टि हो चुकी है।

जांच में भी फेल
कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने इस क्षेत्र में नलों में आ रहे पानी के सैंपल लिए। जांच करने पर पानी प्रदूषित पाया गया। इसका कारण यह है कि सभी फैक्ट्रियां अपने यहां लगे ट्रीटमेंट प्लांट को नियमित रूप से नहीं चलाती हैं। ऐसे में केमिकल युक्त पानी बाहर छोड़ दिया जाता है। उद्योग बंधु की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया जा चुका है। गंदे पानी का निस्तारण नहीं होने के कारण पिछले साल 78 फैक्ट्रियों को कारण बताओ नोटिस और दस को बंदी के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। इनमें से कई ने तो नोटिस के बाद अपने यहां मिली कमियों को दूर कर लिया, जबकि तीन फैक्ट्रियां फिलहाल बंद चल रही हैं। – डॉ. अंकुर कंसल, क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

सौजन्य से: अमर उजाला ब्यूरो

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