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Green Tribunal order will debar locals, whereas private companies will promote and operate tourism beyond Manali

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By Guman Singh*

The Principal Bench of the National Green Tribunal (NGT) in its order dated January 21, 2015 has said that vehicles which are more than 15 years old should stop playing from Manali to Rohtang with the coming tourism season.

The NGT has also ordered to “immediately demolish” all kihokas and dhabas which are “unauthorised” and “illegally being carried on at Solang Nallah”. It insists that the directions contained in a judgement/order passed earlier should be applicable to this location as well. The earlier order was issued last year regarding other places up to Rohtang on similar grounds.

The NGT has also ordered to start a ropeway project from Vashist to Rohtang and ply CNG buses only.

The order asks the Chief Secretary and all other concerned authorities of the state government to immediately take a decision on providing a ropeway from Vashisht to Rohtang Pass. The state government decision is supposed to be backed by the report of the expert/s. “This tribunal primarily feels and is of the opinion that with modern technical know-how, the ropeway can be provided, especially on a public-private partnership mode”, the NGT said. Read more

Courtesy: COUNTERVIEW.ORG

‘दिल्ली की सड़कों पर 15 साल से अधिक पुराने वाहनों को चलने की अनुमति नहीं’

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नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण से चिंतित, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को कहा कि 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को दिल्ली की सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। एनजीटी प्रमुख न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि इस तरह के वाहन जहां भी मिलें, संबंधित अधिकारी वाहनों को जब्त करने सहित कानून के अनुरूप उचित कदम उठाएं।

पीठ ने कहा कि यह निर्विवाद और सवालों से परे है कि एनजीटी, दिल्ली में वायु प्रदूषण हर दिन गुजरने के साथ बढ़ रहा है। यह न केवल बहुत खराब स्थिति को पेश करता है बल्कि यह संकेत देता है कि और मुसीबत आ सकती है। पीठ ने कहा कि 15 साल से अधिक पुराने डीजल या पेट्रोल के सभी वाहनों को सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह निर्देश दुपहिया, तीन पहिया, चार पहिया, हल्के वाहनों और भारी वाहनों सहित सभी पर लागू होगा।

पीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति को प्लास्टिक या पेड़ के पत्तों सहित कोई अन्य सामग्री खुले में जलाने की अनुमति नहीं होगी।

सौजन्य से: जी न्यूज़

आसान होंगे पर्यावरण क़ानून?

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अगर सरकार की बनाई सुब्रह्मण्यम कमेटी की सिफ़ारिशों पर अमल हुआ, तो जंगलों की कटाई और पहाड़ों की खुदाई आसान हो जाएगी। उद्योग जगत खुद ही तय करेगा कि उसने कायदे तोड़े हैं या नहीं। अब जानकार ये भी कह रहे हैं कि कमेटी ही गैरकानूनी है।

विडियो लिंक पर क्लिक करें आसान होंगे पर्यावरण क़ानून?

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने हिमाचल में ब्यास नदी के किनारे निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को कहा गया है। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल को बताया गया कि मंडी के बिंद्राबणी, सोली खड्ड, पुरानी मंडी और खलियार में नदी के 35 मीटर के दायरे में निर्माण हो रहा है।

बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद ब्यास के किनारे निर्माण कार्य नहीं रुक रहा है। इससे ब्यास को नुकसान हो रहा है। ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के बाद राज्य सरकार को आदेश दिए कि इस मामले की जांच कर शपथपत्र के माध्यम से उसे अवगत कराए। मामले की अगली सुनवाई नौ जनवरी को होगी।

एक अन्य मामले में ट्रिब्यूनल ने रोहतांग पर प्रदूषण रोकने के लिए कदम न उठाने पर आरटीओ मनाली को हटाने की सिफारिश की है। ट्रिब्यूनल ने रोहतांग वैली की वस्तुस्थिति जानने के लिए गठित चार सदस्यीय आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरटीओ के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने और इस पद पर किसी पर्यावरणप्रिय व्यक्ति को नियुक्त करने के लिए मुख्य सचिव को कहा है। मढ़ी के अलावा रोहतांग सड़क पर बने स्टालों को बंद करने के आदेश दिए हैं।

Courtesy: Amar Ujala, Shimla

174 क्रेशरों पर ग्रीन ट्रिब्यूनल की रोक, 52 लाइसेंसी और बाकी गैर लाइसेंसी

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बैंच ने सीकर जिले में स्थित 174 स्टोन क्रेशरों को तुरंत प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है। नीमकाथाना के भराला गांव निवासी कैलाश मीणा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दिलीप सिंह ने 174 क्रेशरों पर रोक लगाने का आदेश दिए। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सभी स्टोन क्रेशरों की मशीनरी जब्त करने और इनकी बिजली व पानी की आपूर्ति तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए हैं। और साथ ही राज्य सरकार से ये भी कहा कि समूचे प्रदेश में सर्वे कराया जाए और अवैध रूप से चल रहे स्टोन क्रेशरों को जब्त किया जाए।

ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 52 ऐसे स्टोन क्रेशरों को राहत देने से इनकार कर दिया, जिनके पास लाइसेंस थे। विस्तार से देखें।

सौजन्य से- दैनिक भास्कर

24 पट्टाधारकों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का नोटिस, पूछा-क्‍यों न लगाया जाए जुर्माना

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(हरिद्वार) नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की टीम ने जिले मे हुये अवैध खनन तथा पर्यावरण को हुये नुकसान की भरपाई करने के लिए 24 खनन पट्टाधारकों को नोटिस भेजा है। आठ जुलाई को पट्टाधारको को नोटिस जारी किए गए हैं। जिससे पट्टाधारकों मे खलबली मच गयी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का कहना है कि क्यों न अवैध खनन से पर्यावरण को हुए नुकसान की भरवाई के लिए उन पर जुर्माना लगा दिया जाए। जिलाधिकारी के तरफ से 2 महिना पहले ही इसपर रोक लगा दी गयी थी। उसके बावजूद अवैध तरीके से उसपर खनन किया गया है। जांच करने पर सारी बातें सामने आ गयी। लोकल कमिश्वनर ने शर्तों का उल्लंघन पाया और अवैध खनन किए जाने की बात सामने आई है। यह ठोस कदम नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के तरफ से उठाया गया है।

निर्माण बंद नहीं किया तो बह जाएंगे हम

सौजन्य से: अमर उजाला ब्यूरो

NGT orders Singrauli polluters to provide clean drinking water to residents, or face closure

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The National Green Tribunal (NGT) has started taking strict measures to address the problems arising from pollution in the Singrauli industrial region in central India, spread across Madhya Pradesh and Uttar Pradesh.

The region is known for its coal reserves and is the energy capital of the country, generating about 10 per cent of India’s coal-based power. But its people are extremely poor and suffer from severe pollution, including mercury poisoning.

Taking note of a report submitted by a high-power committee chaired by A B Akolkar, member secretary of the Central Pollution Control Board (CPCB), that had identified several air and water pollution concerns of the region, the tribunal on Tuesday asked the Uttar Pradesh and Madhya Pradesh authorities to take immediate action and address issues of water pollution in the area.

Read more on severe pollution in Singrauli

Singrauli pollution a matter of serious concern, admits high power panel
Mercury in air, water
The bench chaired by Justice Swatanter Kumar has specifically asked the state authorities to ensure good quality drinking water supply to local residents. As an immediate measure, the Uttar Pradesh and Madhya Pradesh governments have been asked to provide potable water to the residents through tankers.

‘Install RO plants’

Based on “the polluter pays” principle, NGT has asked chief secretaries of the two states to ask big industries, particularly thermal power plants, to install and commission reverse osmosis (RO) units of capacity commensurate with the local demand for water purification and supply drinking water to residents. Its cost is to be borne by the industries. If the industries fail to comply with the order, the respective pollution control boards may give closure notices to them.

The order of the bench follows two separate petitions filed before the central bench of NGT by Singrauli residents Jagat Narayan Viswakarma and Ashwani Kumar Dubey, complaining against pollution in the Singrauli-Sonbhadra area. The thermal power plants in Singrauli together have an installed capacity of about 12,700 MW. The mines produce nearly 83 million tonnes of coal per annum (MTPA). The Union Ministry of Environment and Forests (MoEF) has identified the region as a critically polluted area (CPA).

“The NGT order certainly raises hope that pollution problems in the region will now be addressed,” says Dubey, who is also an advocate in the matter. Read more

Courtesy: Down To Earth

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