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‘Concerned people’ vow to protect Western Ghats

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The meet convened by the People for Western Ghats at Peaceful Society, Madkai, unanimously resolved to work for the protection and conservation of the eco-sensitive, biodiversity-rich wildlife corridor in the Western Ghats.

Pandurang Hegde and Kalandand Mani initiated and guided the discussions wherein various issues pertaining to the present status of protection and conservation of the Western Ghats, the concept of responsible tourism, politics behind non-implementation of Western Ghats Environment Expert Panel and efforts which are going on to dilute existing environmental laws were discussed.

Members of the organizing group expressed grave concern over unplanned tourism activities hampering the eco-sensitivity of the biodiversity rich Dudhsagar valley of the Mollem National Park. Read more

Courtesy: The Times of India

In Climate Talks, Spotlight Turns to India

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U.S.-China deal on carbon emissions ramps up pressure on New Delhi to get more aggressive in moving away from coal. 

India’s new prime minister, a Hindu nationalist and former tea seller, recently urged his country’s schoolchildren to help save the planet by relishing the delight of a full moon.

“On a full moon night, if street lights are put off for two, three hours, will it not be service to the environment? Won’t you enjoy the full moon night?” Narendra Modi said in September, adding: “We have forgotten to live with nature.” He urged kids to switch off fans, lights, or appliances when not in use and turn off tap water when brushing teeth.

Modi, 64, has sounded at times like a climate activist. “Al Gore was right when he commented a few years ago that it was inconvenient to many leaders to hear, face and accept the naked truth of global warming,” Modi wrote in a 2011 e-book, Convenient Action,which heralded his climate efforts while chief minister of the western state of Gujarat.

So as a new round of international climate talks launches Monday in Lima, Peru, what role will Modi’s government play? The United Nations meeting will focus on a new global accord, slated to be finalized next year in Paris, to reduce the carbon dioxide emissions linked to global warming. (See related map: “Four Ways to Look at Global Carbon Footprints.”) Read more

Courtesy: news.nationalgeographic.com

आसान होंगे पर्यावरण क़ानून?

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अगर सरकार की बनाई सुब्रह्मण्यम कमेटी की सिफ़ारिशों पर अमल हुआ, तो जंगलों की कटाई और पहाड़ों की खुदाई आसान हो जाएगी। उद्योग जगत खुद ही तय करेगा कि उसने कायदे तोड़े हैं या नहीं। अब जानकार ये भी कह रहे हैं कि कमेटी ही गैरकानूनी है।

विडियो लिंक पर क्लिक करें आसान होंगे पर्यावरण क़ानून?

ग्रीन नोबेल विजेता रमेश अग्रवाल, माइंस मिनरल एंड पिपुल के डॉ. आर. श्रीधर,  जनचेतना के राजेश त्रिपाठी, सविता रथ सहित लोगों ने किया कंपनी के कारपोरेट कार्यालय का उदघाटन

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raigarhरायगढ़। घुटने तक सफेद धोती और झक्क सफेद कुर्ते में ग्रामीण सज-धज कर हरिहर पटेल के घर के पास अपनी कंपनी के कार्यालय के उद्घाटन में पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में शामिल एक एक ग्रामीण का सीना फूला हुआ था। एक ने तो यहां तक कहा कि अब लगता है कि वह भी पावर कंपनी का मालिक है।

जैसे ही कंपनी के नाम का बोर्ड टंगा लोगों ने जोरदार तालियों के साथ अपनी खुशी का इजहार किया। इस अवसर पर महिला, पुरूष और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल थे। इसके बाद ग्रामीणों की बैठक हुई और इस कंपनी के चेयरमैन के रूप में हरिहर पटेल को चुना गया और इसके अलावा दस डायरेक्टर भुवन लाल पटेल, बरन सिहं सिदार, बालक राम चौधरी, मनोज कुमार सिदार, राम सिंह राठिया, उद्भ लाल पटेल, रधिका सिदार, रूकमिणी सिदार नियुक्त किया गया। गारे सहित आधे दर्जन से ज्यादा गांव के ग्रामीणों ने लगभग डेढ़ साल पहले अपना पावर प्लांट खोलने का निर्णय लिया था।
ऎसे में उनकी ओर से इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। बकायदा ग्रामीणों की कंपनी को अब इसके लिए अनुमति मिल गई है। ऎसे में गारे गांव में ग्रामीणों ने अपने कंपनी का कारपोरेट आफिस की श्ुारूआत कर दी है।

दरअसल ग्रमीणों की ओर से कंपनी खोलने का निर्णय हमारी जमीन हमारा कोयला के नारे को बुलंद किया है। इसके तहत ग्रामीणों की ओर से गारे 4/6 कोल ब्लाक पर दावा भी ठोंका जा रहा है। कंपनी के कारपोरेट कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर ग्रीन नोबेल विजेता रमेश अग्रवाल, माइंस मिनरल एंड पिपुल के श्रीधर सहित जनचेतना के राजेश त्रिपाठी, सविता रथ सहित बड़ी संख्या में आधे दर्जन गांव से ज्यादा के ग्रामीण उपस्थित थे।

अब बोली की तैयारी
जीटीपीसीएल के (गारे ताप उपक्रम प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड)के चेयर मैन हरिहर पटेल ने बताया कि कंपनी का कारपोरेट आफिस खुल गया है। अब ग्रामीणों से लगातार बैठक की जा रही है और बोर्ड के सदस्यों की सहमति से सरकार जो कोयला खनन के लिए बोली लगवाने वाली है उसमें भाग लेने की तैयारी की जा रही है।

करते हैं कोल सत्याग्रह 

गारे गांव के ग्रामीणों ने हमारी जमीन हमारा कोयला के नारे को बुलंद करते हुए पिछले दो साल से कोयला सत्याग्रह भी कर रहे हैं। जिसके तहत ग्रामीण दो अक्टूबर को खुद से कोयले का खनन करते हैं और देश के वर्तमान कोयला खनन कानून को तोड़ते हैं। ग्रामीणों के इस सत्याग्रह को उड़ीसा और झारखंड में भी अपनाया गया है और वहां भी दो अक्टूबर को पिछले साल कोयला सत्याग्रह किया गया था।

ग्रामीणों की ओर से बेहतर पहल की गई है। सरकार को भी इनका सहयोग करना चाहिए। क्षेत्र की खनिज संपदा पर पहला हक वहां के समुदाय का होता है। पूरे देश में इस कार्य का अनुसरण किया जाना चाहिए।
रमेश अग्रवाल, ग्रीन नोबेल विजेता

सौजन्य से – पत्रिका.कॉम

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने हिमाचल में ब्यास नदी के किनारे निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को कहा गया है। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल को बताया गया कि मंडी के बिंद्राबणी, सोली खड्ड, पुरानी मंडी और खलियार में नदी के 35 मीटर के दायरे में निर्माण हो रहा है।

बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद ब्यास के किनारे निर्माण कार्य नहीं रुक रहा है। इससे ब्यास को नुकसान हो रहा है। ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के बाद राज्य सरकार को आदेश दिए कि इस मामले की जांच कर शपथपत्र के माध्यम से उसे अवगत कराए। मामले की अगली सुनवाई नौ जनवरी को होगी।

एक अन्य मामले में ट्रिब्यूनल ने रोहतांग पर प्रदूषण रोकने के लिए कदम न उठाने पर आरटीओ मनाली को हटाने की सिफारिश की है। ट्रिब्यूनल ने रोहतांग वैली की वस्तुस्थिति जानने के लिए गठित चार सदस्यीय आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरटीओ के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने और इस पद पर किसी पर्यावरणप्रिय व्यक्ति को नियुक्त करने के लिए मुख्य सचिव को कहा है। मढ़ी के अलावा रोहतांग सड़क पर बने स्टालों को बंद करने के आदेश दिए हैं।

Courtesy: Amar Ujala, Shimla

Asbestos mining: NGT raps MoEF for vague response

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New Delhi: Perturbed by illegal and unscientific asbestos mining across the country, the National Green Tribunal Friday pulled up the Environment Ministry (MoEF) for providing a “vague and uncertain” response.

A bench, headed by NGT Chairperson Justice Swatanter Kumar, made the observation after going through an affidavit filed by the Ministry of Environment and Forests(MoEF) and fixed the matter for further consideration on December 23.

“None of the affidavits is specific as to what steps have been taken by the Ministry of Environment and Forests or any other authority of the State to answer a question as to whether any asbestos mining was being carried on in any part of the State or not. Affidavit filed by the MoEF is vague and uncertain.

“It is undisputable that asbestos mining activity is considered hazardous and causes serious environmental and health hazard including dangerous diseases like cancer etc. We are constrained to observe that concerned Ministry and appropriate authorities of the state are expected to exercise their power to prevent and control degradation of environment and harm to public health,” the bench said. Read more

Courtesy: Zee News

174 क्रेशरों पर ग्रीन ट्रिब्यूनल की रोक, 52 लाइसेंसी और बाकी गैर लाइसेंसी

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बैंच ने सीकर जिले में स्थित 174 स्टोन क्रेशरों को तुरंत प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है। नीमकाथाना के भराला गांव निवासी कैलाश मीणा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दिलीप सिंह ने 174 क्रेशरों पर रोक लगाने का आदेश दिए। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सभी स्टोन क्रेशरों की मशीनरी जब्त करने और इनकी बिजली व पानी की आपूर्ति तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए हैं। और साथ ही राज्य सरकार से ये भी कहा कि समूचे प्रदेश में सर्वे कराया जाए और अवैध रूप से चल रहे स्टोन क्रेशरों को जब्त किया जाए।

ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 52 ऐसे स्टोन क्रेशरों को राहत देने से इनकार कर दिया, जिनके पास लाइसेंस थे। विस्तार से देखें।

सौजन्य से- दैनिक भास्कर

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