raigarhरायगढ़। घुटने तक सफेद धोती और झक्क सफेद कुर्ते में ग्रामीण सज-धज कर हरिहर पटेल के घर के पास अपनी कंपनी के कार्यालय के उद्घाटन में पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में शामिल एक एक ग्रामीण का सीना फूला हुआ था। एक ने तो यहां तक कहा कि अब लगता है कि वह भी पावर कंपनी का मालिक है।

जैसे ही कंपनी के नाम का बोर्ड टंगा लोगों ने जोरदार तालियों के साथ अपनी खुशी का इजहार किया। इस अवसर पर महिला, पुरूष और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल थे। इसके बाद ग्रामीणों की बैठक हुई और इस कंपनी के चेयरमैन के रूप में हरिहर पटेल को चुना गया और इसके अलावा दस डायरेक्टर भुवन लाल पटेल, बरन सिहं सिदार, बालक राम चौधरी, मनोज कुमार सिदार, राम सिंह राठिया, उद्भ लाल पटेल, रधिका सिदार, रूकमिणी सिदार नियुक्त किया गया। गारे सहित आधे दर्जन से ज्यादा गांव के ग्रामीणों ने लगभग डेढ़ साल पहले अपना पावर प्लांट खोलने का निर्णय लिया था।
ऎसे में उनकी ओर से इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। बकायदा ग्रामीणों की कंपनी को अब इसके लिए अनुमति मिल गई है। ऎसे में गारे गांव में ग्रामीणों ने अपने कंपनी का कारपोरेट आफिस की श्ुारूआत कर दी है।

दरअसल ग्रमीणों की ओर से कंपनी खोलने का निर्णय हमारी जमीन हमारा कोयला के नारे को बुलंद किया है। इसके तहत ग्रामीणों की ओर से गारे 4/6 कोल ब्लाक पर दावा भी ठोंका जा रहा है। कंपनी के कारपोरेट कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर ग्रीन नोबेल विजेता रमेश अग्रवाल, माइंस मिनरल एंड पिपुल के श्रीधर सहित जनचेतना के राजेश त्रिपाठी, सविता रथ सहित बड़ी संख्या में आधे दर्जन गांव से ज्यादा के ग्रामीण उपस्थित थे।

अब बोली की तैयारी
जीटीपीसीएल के (गारे ताप उपक्रम प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड)के चेयर मैन हरिहर पटेल ने बताया कि कंपनी का कारपोरेट आफिस खुल गया है। अब ग्रामीणों से लगातार बैठक की जा रही है और बोर्ड के सदस्यों की सहमति से सरकार जो कोयला खनन के लिए बोली लगवाने वाली है उसमें भाग लेने की तैयारी की जा रही है।

करते हैं कोल सत्याग्रह 

गारे गांव के ग्रामीणों ने हमारी जमीन हमारा कोयला के नारे को बुलंद करते हुए पिछले दो साल से कोयला सत्याग्रह भी कर रहे हैं। जिसके तहत ग्रामीण दो अक्टूबर को खुद से कोयले का खनन करते हैं और देश के वर्तमान कोयला खनन कानून को तोड़ते हैं। ग्रामीणों के इस सत्याग्रह को उड़ीसा और झारखंड में भी अपनाया गया है और वहां भी दो अक्टूबर को पिछले साल कोयला सत्याग्रह किया गया था।

ग्रामीणों की ओर से बेहतर पहल की गई है। सरकार को भी इनका सहयोग करना चाहिए। क्षेत्र की खनिज संपदा पर पहला हक वहां के समुदाय का होता है। पूरे देश में इस कार्य का अनुसरण किया जाना चाहिए।
रमेश अग्रवाल, ग्रीन नोबेल विजेता

सौजन्य से – पत्रिका.कॉम

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