चंबा (नई टिहरी)। जहां एक ओर माफिया ने अवैध खनन के जरिये उत्तराखंड के कई पहाड़ और नदियां खोद डाले हैं। ऐसे में गढ़वाल की हेंवलघाटी के लोगों के साहस को सलाम करना होगा जिन्होंने 1962 से लगातार खनन के खिलाफ आंदोलन चलाकर माफिया के मंसूबों को नेस्तनाबूद कर दिया है। मार्ग में बड़ी-बड़ी बाधाएं आईं, धनबल, बाहुबल का इस्तेमाल हुआ लेकिन आंदोलनकारी न टूटे, न झुके। खनन तो दूर क्या मजाल कभी कोई एक पत्थर भी उठा पाया हो। इस आंदोलन के कई अगुवा तो स्वर्ग भी सिधार गए हैं, लेकिन यह आंदोलन 2014 में भी पूरे जोश के साथ जारी है। कटाल्डी गांव में खनन का पट्टा सरकार ने दिया है। ग्रामीणों के विरोध के बाद बीते साल टिहरी के डीएम ने खनन को क्षेत्र के लिए नुकसानदेह बताकर अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। शासन स्तर से मामला अभी लंबित है। इस बाबत ग्रामीण एक बड़ी बैठक बुलाने की तैयारी कर रहे हैं। विस्तार से देखें..

सौजन्य से: अमरउजाला

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