जोधपुर मे के. एन. चेस्ट अस्पताल का एक मामला सामने आया है। जिसमे अस्पताल के डॉक्टर भी कन्फूज है कि मरीज को सिलिकोसिस की बीमारी है या फिर कुछ और बीमारी है। पहले तो डाक्टरों ने चेक किया तो पाया कि सिलिकोसिस नाम की बीमारी है। परंतु कुछ महीने बाद दोबारा बोर्ड की टीम ने चेक किया तो उसे सिलिकोसिस का मरीज मानने से इंकार कर दिया। अब मरीज को ये समझ नही आ रहा है कि वह करे तो क्या करे। ऎसे में सवाल यह उठता है कि जांच रिपोर्ट गलत है या फिर जांच करने वाले चिकित्सक। यह घटना अस्पताल व बोर्ड की जांच प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा रही है। अब जिम्मेदारों का कहना है कि मामले की पूरी जांच के बाद ही हकीकत पता चल सकती है।उधर मरीज ज़िंदगी और मौत से जूझ रहा है। दूसरे खान मजदूरों जो कि टीबी से ग्रस्त हैं वह भी बोल रहे है कि हमारी भी सिलिकोसिस की जांच होनी चाहिए। क्योकि सिलिकोसिस लाइलाज बीमारी है।  विस्तार से जानने के लिए क्लिक करें।

सौजन्य से: राजस्थान पत्रिका

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