खनन में नहीं दर्ज हो सकता आपराधिक मुकदमा, केवल अर्थदंड लगाने का ही प्रावधान

अवैध खनन को लेकर शासन और प्रशासन मे रोज चर्चा हो रही है कि किस कदर अवैध खनन का कारोबार फलता फूलता जा रहा है। और सरकार इसे रोकने मे नाकाम रही है। मसलन, इस पर रोक क्यों नहीं लग पा रही है? दोषी जेल में क्यों नहीं हैं? तमाम दावों-वादों के बावजूद प्रशासन लाचार क्यों नजर आता है? सरकार इस पर प्रभावी रोक लगाने के लिए हर दिन दावे करती है लेकिन कुछ नहीं हो पा रहा। हर रोज रेत-बजरी से लदे वाहन पकड़े जाते हैं और अर्थदंड देकर छूट जाते हैं। खनन माफिया शासन-प्रशासन की प्रणाली को ठेंगे पर रखते नजर आ रहे हैं। अब इसका मामला संसद मे भी सुनाई देने लगा है। हरिद्वार से सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने यह मामला उठाया। उन्होंने दून घाटी, हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर व टिहरी और गंगा, यमुना में बड़े पैमाने पर अवैध खनन की बात कही। उन्होने सरकार को अवगत कराया कि अवैध खनन से पर्यावरण एवं जलवायु पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। जो आज हमारे सेम दिखाई दे रहा है। अवैध खनन मे लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। निशंक के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने उत्तराखंड में विशेष दल भेजकर स्थिति का जायजा लेने का आश्वासन दिया। विस्तार से देखें।

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