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जांच रिपोर्ट गलत या जांचकर्ता!

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जोधपुर मे के. एन. चेस्ट अस्पताल का एक मामला सामने आया है। जिसमे अस्पताल के डॉक्टर भी कन्फूज है कि मरीज को सिलिकोसिस की बीमारी है या फिर कुछ और बीमारी है। पहले तो डाक्टरों ने चेक किया तो पाया कि सिलिकोसिस नाम की बीमारी है। परंतु कुछ महीने बाद दोबारा बोर्ड की टीम ने चेक किया तो उसे सिलिकोसिस का मरीज मानने से इंकार कर दिया। अब मरीज को ये समझ नही आ रहा है कि वह करे तो क्या करे। ऎसे में सवाल यह उठता है कि जांच रिपोर्ट गलत है या फिर जांच करने वाले चिकित्सक। यह घटना अस्पताल व बोर्ड की जांच प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा रही है। अब जिम्मेदारों का कहना है कि मामले की पूरी जांच के बाद ही हकीकत पता चल सकती है।उधर मरीज ज़िंदगी और मौत से जूझ रहा है। दूसरे खान मजदूरों जो कि टीबी से ग्रस्त हैं वह भी बोल रहे है कि हमारी भी सिलिकोसिस की जांच होनी चाहिए। क्योकि सिलिकोसिस लाइलाज बीमारी है।  विस्तार से जानने के लिए क्लिक करें।

सौजन्य से: राजस्थान पत्रिका

कानून में खोट, कैसे हो माफिया पर चोट

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खनन में नहीं दर्ज हो सकता आपराधिक मुकदमा, केवल अर्थदंड लगाने का ही प्रावधान

अवैध खनन को लेकर शासन और प्रशासन मे रोज चर्चा हो रही है कि किस कदर अवैध खनन का कारोबार फलता फूलता जा रहा है। और सरकार इसे रोकने मे नाकाम रही है। मसलन, इस पर रोक क्यों नहीं लग पा रही है? दोषी जेल में क्यों नहीं हैं? तमाम दावों-वादों के बावजूद प्रशासन लाचार क्यों नजर आता है? सरकार इस पर प्रभावी रोक लगाने के लिए हर दिन दावे करती है लेकिन कुछ नहीं हो पा रहा। हर रोज रेत-बजरी से लदे वाहन पकड़े जाते हैं और अर्थदंड देकर छूट जाते हैं। खनन माफिया शासन-प्रशासन की प्रणाली को ठेंगे पर रखते नजर आ रहे हैं। अब इसका मामला संसद मे भी सुनाई देने लगा है। हरिद्वार से सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने यह मामला उठाया। उन्होंने दून घाटी, हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर व टिहरी और गंगा, यमुना में बड़े पैमाने पर अवैध खनन की बात कही। उन्होने सरकार को अवगत कराया कि अवैध खनन से पर्यावरण एवं जलवायु पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। जो आज हमारे सेम दिखाई दे रहा है। अवैध खनन मे लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। निशंक के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने उत्तराखंड में विशेष दल भेजकर स्थिति का जायजा लेने का आश्वासन दिया। विस्तार से देखें।

खनन माफिया ने बरसाए पत्थर, दो घायल, अवैध खनन रोकने गए थे ग्रामीण भागकर मुश्किल से बचाई जान

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रुड़की/भगवानपुर। खनन माफिया का खौफ मे कोई बदलाव नही आया है। चाहे प्रशासन कुछ भी कर ले। या कितना चुस्ती दिखाये। प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद क्षेत्र की नदियों से अवैध खनन नहीं रुक पा रहा है। खहन माफियाओ का हौसला इतना बुलंद है, कि वह किसी पर भी हमला करने से गुरेज नही करते है। आए दिन यह घटना नज़र आ ही जाती है। यह बात खनन को लेकर स्पस्ट दिखाई पड़ती है। जिले की तमाम नदियों में दिन-रात बेखौफ और धड़ल्ले से खनन किया जा रहा है। लेकिन शासन-प्रशासन के संबंधित अधिकारियों को कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। अवैध खनन के लिए बनी टास्क फोर्स कहीं दिखाई नहीं दे रही है। अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि वह लोगों पर हमले कर रहे हैं। यदि कोई उनके काम में रुकावट डालता है तो वह उसे रास्ते से हटाने की कोशिश करते हैं।

देर रात घाड़ क्षेत्र खनन रोकने पहुंचे ग्रामीणों पर खनन माफिया ने दबंगई दिखाते हुए पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। पत्थर लगने से दो ग्रामीण घायल हो गए, जबकि बाकी ग्रामीणों ने बामुश्किल भागकर जान बचाई। ग्रामीणों ने बुग्गावाला थाना पहुंचकर पुलिस को तहरीर दी। लेकिन, पुलिस इससे इंकार कर रही है। विस्तार से देखें

प्रशासन और माफिया की मिलीभगत के चलते डर के साये में हैं ग्रामीण

नदियों में दिन-रात बेखौफ खनन

सौजन्य से: अमर उजाला ब्यूरो

बारिश से थमी पहाड़ की जिंदगी, जगह-जगह मलबा आने से बंद हो गए कई रास्ते, लोग फंसे

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उत्तराखंड मे हो रही बारिश से लोगों की ज़िंदगी थम सी गयी है। वही कुछ राज्यो मे समय से बारिश न होने से लोग आसमान की तरफ टकटकी लगाए हुये है। इतना जोरदार बारिश होने के कारण नदिया लबालब बह रही है। और जगह जगह हाइवे रोड पर भूस्खलन हो गया है। जिससे यातायात भी प्रभावित हो गया है। अभी पिछले साल का घाव हरा ही था, कि इस बार फिर लोग बारिश से परेशान हो गए है। बारिश से अलग अलग जिले के बहुत से यातायात मार्ग को बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने मलबा साफ करने के लिए लोनिवि ने जेसीबी लगा दी है। बारिश के कारण मलबा हटाने में कामयाबी नहीं मिल पा रही। बृहस्पतिवार से जारी बारिश के कारण बदरीनाथ हाईवे मूल्यागांव में करीब आठ घंटे बंद रहा। हाईवे बंद होने से शहर में दूध और अन्य जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हुई। लामबगड़ में हाईवे पर भारी मात्रा में भूस्खलन हो गया है। जबकि कंचनगंगा में जलस्तर बढ़ गया है और यहां बडे़-बडे़ बोल्डर हाईवे पर आ गए हैं। सीमा सड़क संगठन के कमांडर कर्नल निलेश चंदाराना का कहना है कि लामबगड़ में लगातार भूस्खलन हो रहा है। बारिश थमने के बाद ही हाईवे को खोला जा सकता है। जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने बताया कि हाईवे सुचारु होने के बाद धाम और पड़ावों पर रोके गए तीर्थयात्रियों को आवाजाही की अनुमति दी जाएगी। विस्तार से देखें

सौजन्य से: अमर उजाला ब्यूरो

खनन पर खलबली, लगातार ढिलाई के आरोपों से घिरी सरकार ने अब मोर्चा संभाला है

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(देहरादून) खनन का खेल इस कदर बढ रहा है कि प्रशासन के लिए नासूर बन गया है। अपनी किरकिरी से बचने के लिए सरकार ने अब खुद मोर्चा संभाला है। सरकार की बरिस्ठ मंत्री इंदिरा हृदयेश ने इस खनन के खेल को संज्ञान मे लिया है। इस पर सरकार ने अंकुश लगाने के लिए प्रशासन की ज़िम्मेदारी तय कर दी है। क्योकि नदियों की सफाई के बहाने अवैध तरीके से खनन हो रहा है। सरकार ने कहा कि अवैध कारोबार को रोकना है तो खनन का हिसाब-किताब रखना होगा। इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। उन्होंने अवैध खनन पर अंकुश के लिए मानीटरिंग का जिम्मा सिंचाई विभाग को दिए जाने का सुझाव भी रखा है। मुख्यमंत्री ने भी खनन के खेल पर कड़ा रुख अपनाते हुए सख्ती के निर्देश दिए हैं। और इस पर कड़े कदम उठाए जाने की सिफारिश की है। विस्तार से जानने के क्लिक करें

ऐसे चल रहा है पूरा नेटवर्क

यहां हो रहा अवैध खनन

अवैध खनन की एक रात की कीमत पांच लाख रुपये

सौजन्य से: अमर उजाला ब्यूरो

24 पट्टाधारकों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का नोटिस, पूछा-क्‍यों न लगाया जाए जुर्माना

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(हरिद्वार) नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की टीम ने जिले मे हुये अवैध खनन तथा पर्यावरण को हुये नुकसान की भरपाई करने के लिए 24 खनन पट्टाधारकों को नोटिस भेजा है। आठ जुलाई को पट्टाधारको को नोटिस जारी किए गए हैं। जिससे पट्टाधारकों मे खलबली मच गयी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का कहना है कि क्यों न अवैध खनन से पर्यावरण को हुए नुकसान की भरवाई के लिए उन पर जुर्माना लगा दिया जाए। जिलाधिकारी के तरफ से 2 महिना पहले ही इसपर रोक लगा दी गयी थी। उसके बावजूद अवैध तरीके से उसपर खनन किया गया है। जांच करने पर सारी बातें सामने आ गयी। लोकल कमिश्वनर ने शर्तों का उल्लंघन पाया और अवैध खनन किए जाने की बात सामने आई है। यह ठोस कदम नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के तरफ से उठाया गया है।

निर्माण बंद नहीं किया तो बह जाएंगे हम

सौजन्य से: अमर उजाला ब्यूरो

जान-माल के दुश्मन खनन माफिया

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श्यामपुर, (हरिद्वार) – खनन माफिया बिना प्रशासन की परवाह किए खनन किए जा रहे है। प्रशासन उसी गंगा नदी के किनारे तटबंद बनाने मे जुटा हुआ है। और माफिया उसी तटबंध के पास खुदाई कर रहे है। ये अजब कहानी है। क्योकि जब भी पानी का वेग बढ़ेगा, तटबंध टूट जाएगा। ऐसा पिछली बार भी हुआ था जब खनन के चलते तटबंध टूट गया था। इसे सुरक्षा मे चूक माना जाए या फिर प्रशासन की लापरवाही, जो तटबंध के पीछे करोड़ो पैसा पानी की तरह लगाया जा रहा है।

ग्रामीण लोग दावा कर रहे है कि खनन इस कदर चल रहा है कि ऐसा खनन पहले कभी नही देखा है। अगर क्षेत्र में बाढ़ आती है तो स्थानीय लोगों को अवैध खनन की भारी कीमत चुकानी पडे़गी। इसमे कोई दो राय नही है। क्योकि खुदाई करने से नदिया जब गहरी हो जाती है तो पानी का वेग अपने आप तेज गति से बढ़ जाता है। फिर उस वेज मे जो भी आता है सब समा जाता है। विस्तार से देखें

पुलिस सुस्त माफिया चुस्त

बुग्यालों पर माफिया का कब्जा

सौजन्य से: अमर उजाला ब्यूरो

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