देहरादून। मुख्यमंत्री हरीश रावत के आदेश पर शुरू हुई नदियों की सफाई की आड़ में ठेकेदार जमकर अवैध खनन कर रहे हैं। नदियों का कचरा साफ करने के बजाए जहां रेत-बजरी अधिक होती है वहां सात-आठ फुट गहराई तक खोदकर उपखनिज निकाल रहे हैं। रिस्पना नदी में पुश्ते के करीब तक खनन करने के चक्कर में शनिवार को नई बस्ती के लोगों ने ठेकेदार का विरोध किया तो मामले का खुलासा हुआ। खुदाई से रोकने पर ठेकेदार के कर्मचारियों ने लोगों पर जेसीबी चढ़ाने की धमकी भी दी।

क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार कचरा तो नदी में ही छोड़ दे रहा है और रेत-बजरी का खनन कर रहा है। पुश्ते के नजदीक रेत-बजरी अधिक है तो उसे खोदा जा रहा है। खनन रात में किया जाता है ताकि लोगों को पता न चले। आरोप है कि पुश्ता के किनारे गड्ढा खोदने से बरसाती पानी पुश्ते को बहा ले जाएगा। क्षेत्रीय विधायक राजकुमार ने भी ठेकेदार को नदी में खनन नहीं करने के लिए मना किया था लेकिन वह नहीं माना। जब लोगों पर जेसीबी चढ़ाने की धमकी दी गई तो विधायक ने पुलिस को फोन किया। इसके बाद पुलिस ने ठेकेदार की जेसीबी और वाहन पकड़ लिए।

विधायक राजकुमार और क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि ठेकेदार के कर्मचारी रात में लोगों के सोने के बाद खनन करते हैं। रात में जेसीबी और सात-आठ बड़े वाहन लेकर आते हैं और नदी से रेत-बजरी भरकर ले जाते हैं। बजरी को क्रेशरों पर भेजा जाता है। कुछ रेत-बजरी कहीं खाली पड़े प्लाटों पर डाल दी जाती है।

खुदाई की वजह से नदी में लगे बिजली के खंभे तिरछे हो गए हैं। इसके अलावा जेएनएनयूआरएम योजना के तहत डेढ़ करोड़ की लागत से पानी की टंकी बनी है। अगर किनारे पर रेत-बजरी की खुदाई हुई तो टंकी के नीचे पानी भर जाएगा, जिससे उसके गिरने का खतरा है। शनिवार सुबह क्षेत्रीय लोगों ने फिर हंगामा किया तो मौके पर विधायक राजकुमार, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एसके पाठक समेत कई अधिकारी पहुंचे। ठेकेदार के खनन नहीं करने के आश्वासन देने पर ही उसके वाहन को पुलिस ने छोड़ा।

सीएम रावत ने शुरू करवाई थी सफाई
देहरादून। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद अधोईवाला में रिस्पना की स्थिति देखकर नदियों की सफाई के लिए कहा था। यहां नदी की गहराई कचरा पट जाने से खत्म हो गई थी। मुख्यमंत्री के कहने पर जिलाधिकारी ने सफाई का ठेका दिया था। नदियों की सफाई की मॉनीटरिंग करने के लिए सिंचाई विभाग, एमडीडीए और जिला प्रशासन के अधिकारियों की टीम गठित की थी।

उपखनिजों का अवैध भंडारण
नदियों से निकाले जा रहे उपखनिजों को कुछ मात्रा में ठेकेदार क्रेशरों पर भेज रहे हैं लेकिन अधिक मात्रा में उपखनिजों का आवासीय क्षेत्रों में भंडारण किया जा रहा है। बारिश के बाद जब नदियों में पानी भर जाएगा उपखनिजों की कालाबाजारी की जाएगी। उपखनिजों का भंडारण खाली पड़े प्लाटों और आवासीय परिसर में किया जा रहा है।

लॉस नहीं सिर्फ प्रॉफिट
नदी की सफाई का काम ठेकेदारों को नो लॉस-नो प्रॉफिट पर दिया गया था। कहा गया था कि नदियों में पड़े कचरे को साफ किया जाएगा और नदी के बीचो-बीच जमी सिल्ट को हटाया जाएगा। लेकिन ठेकेदारों ने इसकी आड़ में रेत-बजरी की खुदाई शुरू कर दी। जहां बजरी अधिक होती है वहां सात-आठ फुट गहरे तक जेसीबी से खुदाई कर दी जाती है। नदी में कचरा पड़ा रह जाता और खनन सामग्री बाहर चली जाती है। शुरुआत में ठेकेदारों ने काम ठीक किया लेकिन जैसे ही अफसर सुस्त हुए मनमानी शुरू हो गई।

रिस्पना में सफाई के नाम पर की जा रही अंधाधुंध उपखनिजों की खुदाई की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई है। उन्हें बताया गया है कि ठेकेदार इस तरह की हरकत कर रहे हैं। – राजकुमार, क्षेत्रीय विधायक

सौजन्य से: अमर उजाला ब्यूरो

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