भगवानपुर में फैक्ट्रियों के प्रदूषण से एक लाख लोग प्रभावित, पर्यावरण दिवस पर भी नहीं उठा मुद्दा

रुड़की/भगवानपुर। पर्यावरण दिवस पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक बार फिर बड़ी-बड़ी बातें हुईं। जगह-जगह रैलियों, गोष्ठियों और कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अधिकारियों और संगठनों ने भी कई दावे किए। लेकिन हर रोज प्रदूषण की मार झेल रहे भगवानपुर क्षेत्र के लोगों की किसी ने सुध नहीं ली। इसके लिए जिम्मेदार फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई की बात किसी की जुबां पर नहीं आई।

दरअसल, भगवानपुर क्षेत्र में कई फैक्ट्रियों से निकलने वाला अवशिष्ट केमिकल (गंदा पानी) क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। फैक्ट्रियां में इसका समुचित निस्तारण नहीं होने के कारण खुले में छोड़ दिया जाता है, जिससे ग्राउंड लेवल वाटर प्रदूषित हो रहा है। इस कारण घरों में लगे नलों में गंदा पानी आने लगा है। क्षेत्र की करीब एक लाख की आबादी पर बीमारियों का संकट बढ़ रहा है। खेतों में फसल भी प्रभावित हो रही है और पशुओं में भी बीमारियां बढ़ रही हैं। लोगों में इस बात को लेकर रोष है कि कई बार उन्होंने फैक्ट्रियों का अवशिष्ट निस्तारण कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

केमिकल युक्त पानी का निस्तारण नहीं होने से बढ़ा खतरा
फैक्ट्रियां लगने के बाद हमारे नलों में गंदा पानी आ रहा है। अधिकारियों से पानी की शुद्धता के लिए कई बार अपील की, लेकिन समस्या बनी हुई है। — मेमो देवी, निवादा

फैक्ट्रियां हैं क्षेत्र में
क्षेत्र में वर्ष 2005 के बाद से अस्तित्व में आए औद्योगिक क्षेत्र में सिसौना, मक्खनपुर, रायपुर, चौल्ली, सिकंदरपुर और शाहपुर तथा नन्हेड़ा आदि गांवों में करीब 480 फैक्ट्रियां हैं। इनमें से कई फैक्ट्रियों का अवशिष्ट केमिकल फैक्ट्री में लगे ट्रीटमेंट प्लांट से शोधन करने के बजाय खुले में ही बहाया जा रहा है। कई फैक्ट्रियों का अवशिष्ट कई लोगों के खेतों में बहाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से पानी की निकासी के लिए नाले का निर्माण कराना भी प्रस्तावित है लेकिन इसका प्रस्ताव भी फाइलों में ही बंद पड़ा है।

फसल भी हो रही प्रभावित
फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी बाग में घुस जाने से मक्खनपुर निवासी अमीर आलम और जान आलम के बाग में आम की फसल प्रभावित हुई। दोनों किसानों का कहना है कि पिछले दो साले में उनके बाग के कई पेड़ सूख गए। एसडीएम से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

बीमारियों की चपेट में आ रहे लोग
सरकारी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विकांत सिरोही का कहना है कि प्रदूषित पानी के कारण टायफायड, उल्टी-दस्त, पीलिया, मलेरिया, हैजा, चर्मरोग जैसे रोग क्षेत्र में बढ़ रहे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन हैजा और टायफायड के करीब 50 मरीज आ रहे हैं। वहीं भगवानपुर कस्बे के निजी चिकित्सक प्रवीण कुमार ने बताया कि पीलिया और पेट दर्द जैसे रोगों के मरीजों की संख्या दूषित पानी के कारण बढ़ रही है।

फैक्ट्रियों के अवशिष्ट के समुचित निस्तारण नहीं कराने का मामला पहले भी सामने आया था। इस बारे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ सभी फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया जाएगा। जिन फैक्ट्रियों में ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा है वहां इसे लगवाने और लगा है तो उसका उपयोग करने के लिए कहा जाएगा। खुले में अवशिष्ट छोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -प्रत्यूष सिंह, एसडीएम

ऐसे प्रदूषित हो रहा पानी
जानकारों के अनुसार, फैक्ट्रियों की ओर से केमिकलयुक्त पानी खुले में ही छोड़ देने के कारण यह धीरे-धीरे भूतल के नीचे पहुंचकर पानी में मिल जाता है। इसके बाद जब नलों से पानी खींचा जाता है तो उसके हानिकारक तत्व पानी के साथ मिलकर बाहर आ जाते हैं। कई फैक्ट्रियों में ऐसा अवशिष्ट पानी बोरवेल करके भूतल में पहुंचाने के भी आरोप लग रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कराई गई जांच में भी दूषित पानी की पुष्टि हो चुकी है।

जांच में भी फेल
कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने इस क्षेत्र में नलों में आ रहे पानी के सैंपल लिए। जांच करने पर पानी प्रदूषित पाया गया। इसका कारण यह है कि सभी फैक्ट्रियां अपने यहां लगे ट्रीटमेंट प्लांट को नियमित रूप से नहीं चलाती हैं। ऐसे में केमिकल युक्त पानी बाहर छोड़ दिया जाता है। उद्योग बंधु की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया जा चुका है। गंदे पानी का निस्तारण नहीं होने के कारण पिछले साल 78 फैक्ट्रियों को कारण बताओ नोटिस और दस को बंदी के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। इनमें से कई ने तो नोटिस के बाद अपने यहां मिली कमियों को दूर कर लिया, जबकि तीन फैक्ट्रियां फिलहाल बंद चल रही हैं। – डॉ. अंकुर कंसल, क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

सौजन्य से: अमर उजाला ब्यूरो

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