देश में आज भी 80 प्रतिशत बिजली बन रही है कोयले से

देहरादून। घर में जिस बिजली के जरिये हम एसी का आनंद लेते हैं, वह पर्यावरण के लिए बेहद घातक है। मिशन ट्रू बायोलॉजिस्ट संस्था के अध्ययन में यह बात सामने आई है। संस्था ने मांग उठाई है कि बिजली नीति में परिवर्तन होना चाहिए, ताकि हर व्यक्ति के लिए बिजली खर्च की सीमा तय हो सके।

संस्था के मुताबिक देशभर में कुल बिजली उपलब्धता प्रतिव्यक्ति दो यूनिट प्रतिदिन है। उत्तराखंड में यह करीब साढ़े तीन यूनिट प्रतिदिन, यूपी में यह करीब 1.2 यूनिट प्रतिदिन और गोवा जैसे राज्य में यह करीब सात यूनिट प्रतिदिन है। संस्था के संस्थापक पर्यावरणविद् डा. एमएस मेहता ‘इकोमैन’ का कहना है कि कारपोरेट घराने आज एक पूरे शहर के हिस्से की बिजली एक दिन में खर्च कर रहे हैं जबकि देश में 30 करोड़ से ज्यादा लोग आज भी ऐसे हैं, जिन्हें बिजली मयस्सर नहीं है। उन्होंने बताया कि कोयले से ग्रीन हाउस गैस निकलती है, जिससे सीधे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने मांग की है कि बिजली नीति में परिवर्तन होना जरूरी है। इसके तहत एक तो ऊर्जा उत्पादन के विकल्प देखने होंगे और दूसरे हर व्यक्ति के लिए यह तय होना चाहिए कि किसे कितनी बिजली का उत्पादन करना है।

एमटीबी संस्था के मुताबिक एक यूनिट उत्पादन से होता है एक लाख का नुकसान
एक यूनिट यानी एक लाख
वैसे तो एक यूनिट बिजली की कीमत करीब तीन रुपये होती है लेकिन पर्यावरणीय नुकसान के लिहाज से देखें तो यह करीब एक लाख के खर्च पर मिलती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोयला आज भी पर्यावरण के लिए कितना खतरनाक है।

विकल्पों पर काम करने की जरूरत
डा. मेहता का कहना है कि कोयले से बिजली का उत्पादन तत्काल बंद करने के साथ ही इसके विकल्पों पर गौर करना चाहिए। हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट, न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट, सौर ऊर्जा के अलावा कई और विकल्पों पर काम करने की सख्त जरूरत है।

पट्टों के पर्यावरण प्रभाव का आकलन को टीम गठित

हरिद्वार। पहले करीब तीन महीने जमकर खनन हुआ, अब उनके पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन को कमेठी का गठन किया है। जनपद के 24 खनन पट्टों का पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन करने के डीएम ने निर्देश जारी कर दिए है। इसके लिए टीम का गठन भी कर दिया है, जो शीघ्र रिपोर्ट पेश करेगी। इसके बाद आगे खनन हो सकेगा।

बुधवार को डामकोठी में डीएम डीएस पांडियन ने पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण के सदस्य सचिव के साथ बैठक कर खनन नीति के संबंध में विचार विमर्श किया। डीएम ने प्राधिकरण सदस्य सचिव अमूल्य रतन सिन्हा से कहा है वह स्थलीय निरीक्षण कर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। खनन मानक के अनुरुप किया जा रहा है या नहीं। जो शर्तें पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर खनन पट्टे धारकों से पालन करने को कहा गया है। उसका पालन हो रहा है अथवा नहीं। हालांकि डीएम ने बाढ़ क्षेत्र के निरीक्षण में शर्तों के पालन न करने पर 24 खनन पट्टे बंद करने के लिए पहले ही आदेश जारी कर खनन बंद करा दिया था। डीएम ने बताया टीम सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ग्रीन ट्रिब्यूनल में शपथ पत्र दाखिल करेगी। जिसमें सामने आएगा कि अभी तक खनन मानक के अनुरुप हो रहा था या नहीं।

सौजन्य से: अमर उजाला ब्युरो

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