(नई दिल्ली) नयी सरकार के आने के साथ बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। पर्यावरण व वन मंत्रालय कार्य करने के लिए तत्पर हो रहा है। पर्यावरण को बचना सरकार की प्रथम प्राथमिकता होगी। जिसके आधार पर औद्योगिक मंजूरियों के लिए फाइलें पिछले कई वर्षो से मंत्रालय में अटकी हुई थी। उन पर विचार-विमर्श का सिलसिला शुरू हो गया है। पर्यावरण व वन मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने निर्देश दिया है कि पहले सरकारी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कंपनियों के प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई जाए। उसके बाद निजी कंपनी के अंतर्गत आने वाली पोस्को सहित अन्य कंपनियों के प्रस्तावों पर सरकार दो-तीन महीने बाद विचार विमर्श करेगी। क्योकि सरकारी क्षेत्र की तमाम कंपनियों का प्रोजेक्ट पर्यावरण मंजूरी नहीं मिलने की वजह से काम लटके हुए है। जिसमे अधिकांश कोयला खनन और बिजली क्षेत्र से संबंधित हैं।

इन चीजों को ध्यान मे रखते हुये प्रकाश जावडेकर ने बिजली व कोयला मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर तुरंत कार्यवाही करने का विचार विमर्श किया। अगर पर्यावरण व वन मंत्रालय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को मंजूरी देना शुरू करता है तो इससे बिजली क्षेत्र को काफी फायदा होगा। साथ ही सेल, एनटीपीसी, कोल इंडिया सहित तमाम सरकारी कंपनियों की परियोजनाओं पर काम शुरू हो सकेगा। इससे निवेश की रफ्तार भी बढ़ेगी। जिसका असर अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा। इससे पहले सरकारी कंपीनियों को दरकिनार कर निजी कंपीनियों को फायदा पहुचाया गया था।

सार्वजनिक क्षेत्र के प्रस्तावों को पास करने में सरकार को ज्यादा परेशानी नहीं होगी। क्योंकि इनमें से कई परियोजनाओं को अधिकांश मंजूरियां मिल चुकी हैं। पिछली सरकार की नीतिगत फैसलो की वजह से मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। जावड़ेकर और गोयल के बीच हुई बैठक के आधार पर माना जा रहा है की सार्वजनिक कंपीनियो को जल्द लाभ मिल सकेगा। यूपीए के कार्यकाल में इन दोनों मंत्रालयों के बीच 36 का आंकड़ा था। जिसके वजह से सारे प्रोजेक्ट रुके पड़े थे। ‘गो’ और ‘नो-गो’ की परिभाषा की वजह से कोयला मंत्रालय की तमाम परियोजनाओं पर रोक लगा दी गई। पीएमओ के हस्तक्षेप के बावजूद इन परियोनजाओं की रफ्तार नहीं बढ़ सकी। अर्थविदो की माने तो अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारने में इस फैसले का बड़ा हाथ था। परंतु सरकार के सकारात्मक फैसले से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां फिर से पटरी पर आ जाएंगी।

सौजन्य से: प्रमुख चैनलो और समाचार पत्रो के अंश
(बी. पी. यादव- इन्विरोनिक्स ट्रस्ट)

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