हरिद्वार/रुड़की। चार माह में आवंटित खनन के 25 पट्टे खादर क्षेत्र में आपदा की जमीन तैयार कर रहे हैं। जिले में जहां-जहां खनन के पट्टे स्वीकृत हैं, वहीं जमकर अवैध खनन हो रहा है। खनन पर पाबंदी होने के बाद लक्सर क्षेत्र में सबसे पहले खनन का पट्टा आठ नवंबर, 2011 को दिया गया। इसके बाद तो पट्टों की झड़ी लग गई। एक के बाद एक कर 17 फरवरी 2014 तक शासन स्तर से 25 पट्टों की अनुमति दी गई। इनमें 10 पट्टे लक्सर क्षेत्र के, हरिद्वार क्षेत्र के 11 और रुड़की तहसील अंतर्गत बुग्गावाला क्षेत्र में चार खनन के पट्टे शामिल हैं। लक्सर क्षेत्र में सबसे अधिक नौ पट्टे रामपुर रायघटी और हरिद्वार क्षेत्र में सबसे अधिक छह पट्टे रसूलपुर मीठीबेरी में आवंटित किए गए हैं। इसके बाद बिशनपुर कुंडी क्षेत्र का नंबर आता है। लालढांग, मीठीबेरी और बिशनपुर कुंडी अवैध खनन का गढ़ बन चुका है। यहां पट्टों की आड़ में दिन-रात अवैध खनन जोरशोर से चल रहा है। रसूलपुर मीठीबेरी में कुछ दिन पहले ही एंटी माइनिंग फोर्स ने छापामारी भी की। लेकिन बिशनपुर कुंडी में खनन माफिया पर अभी तक भी लगाम नहीं लग पाई है।

‘ईमानदारी’ के पांच रुपये में लुट रहा खजाना
रुड़की। सरकार आवंटित पट्टों से रायल्टी के रूप में महज पांच रुपये प्रति कुंतल की दर से वसूलता है। उदाहरण के तौर पर रामपुर रायघटी में 1.414 हेक्टेयर का पट्टा जारी किया गया है। जिसमें प्रतिवर्ष 40 हजार 299 टन उपखनिज की अनुमति दी गई है। जबकि इसके एवज में प्रतिवर्ष 20 लाख 14 हजार 950 रुपये मासिक किस्तों में वसूले जाने हैं। इस हिसाब से सरकार उपखनिज के प्रति कुंतल के बदले महज पांच रुपये ले रही हैं। जबकि इस उपखनिज की बाजार में कीमत 80 रुपये प्रति कुंतल तक है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है माफिया कितनी मोटी कमाई कर रहे हैं।

…तो पांच साल के लिए मिला नदियां खोदने का अधिकार, पट्टे की सीमा से बाहर खनन की पुष्टि

रुड़की।
आवंटित पट्टे की सीमा से बाहर खनन की शिकायत पर नायब तहसीलदार सुरेंद्र कांबोज बंजारेवाला में पट्टे की जांच करने पहुंचे। जांच में पाया गया है कि सीमा से बाहर 158 घन मीटर खनन किया गया है। हालांकि ग्रामीण इस जांच पर भी सवाल उठा रहे हैं। सोमवार की शाम को नायब तहसीलदार सुरेंद्र कांबोज बंजारेवाला में राजकुमारी के नाम के 19.5 बीघा खनन के पट्टे की जांच करने पहुंचे। बताया गया है कि कुछ ग्रामीणों ने आलाधिकारियों को इस पट्टे की सीमा से बाहर खनन किए जाने की शिकायत की थी। नायब तहसीलदार कांबोज ने बताया कि पट्टे की सीमा के बाहर खनन किया गया है। 158 घनमीटर सीमा के बाहर खनन किए जाने की पुष्टि की गई है। उन्होंने बताया कि इस बाबत पट्टा स्वामी का कहना है कि रात के समय यूपी के माफिया सीमा के बाहर खनन कर रहे हैं। इस पर नायब तहसीलदार ने पट्टा स्वामी से सवाल किया है कि यदि यूपी के माफिया उसके पट्टे के नजदीक खनन कर रहे हैं तो उन्हें इसकी रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए। नायब तहसीलदार ने बताया कि पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मंगलवार को एसडीएम को सौंप दी जाएगी। उधर, बंजारावाला क्षेत्र के कई ग्रामीण जांच के तथ्यों क ो गलत ठहरा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसकी रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी जाएगी।

रुड़की। एंटी माइनिंग टीम की कार्रवाई हो या फिर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की जांच। इनसे साबित होता है कि खनन के स्वीकृत पट्टों की आड़ में किस तरह से अवैध खनन हो रहा है। साथ ही नदियों में खनन से साफ दिख रहा मंजर भी इस हकीकत को बयां कर रहा है। चंद महीनों में घाड़ और खादर क्षेत्र में माफिया ने नदियाें में जो कहर बरपाया है, यदि यह पांच साल तक जारी रहा तो क्या हालत होगी। इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। शासन की ओर से जारी किए गए 25 पट्टों पर आगामी पांच सालों तक खनन के अधिकार दिए गए हैं।

चार महीने में सरकार ने आवंटित किए 25 पट्टे, जहां-जहां स्वीकृत पट्टे, वहीं अवैध खनन

सौजन्य से:  अमर उजाला ब्यूरो

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