उत्तरकाशी। बार-बार की प्राकृतिक आपदाओं में जानमाल का नुकसान झेलने के बावजूद आपदा प्रबंधन की ठोस नीति नजर नहीं आने पर अब आपदा प्रभावितों ने सरकारी तंत्र को न्यायालय में घेरने की तैयारी कर ली है। पांच मई को इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। न्यायालय मे याचिका स्वीकार हो गई है और 19 मई को इस पर सुनवाई होनी है।

मुआवजा हो या फिर सुरक्षा कार्य, आपदा प्रभावित पटवारी से लेकर डीएम, सीएम और पीएम तक गुहार लगा चुके हैं। इसके बावजूद न तो राज्य सरकार आपदा से निपटने की कोई ठोस नीति तैयार कर पाई है और न ही मुआवजा वितरण एवं बाढ़ सुरक्षा कार्यों में हो रही गड़बड़ी और लापरवाही पर अंकुश लगा पाई है। ऐसे में हर साल आपदा में क्षति का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। सरकारी तंत्र से नाराज आपदा प्रभावितों ने अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। पांच मई को उत्तरकाशी के केशर सिंह पंवार, गौतम भट्ट, सुमन विश्वकर्मा, जयवीर पंवार, दीपक रमोला, केदार घाटी के शंभू प्रसाद भट्ट, सुशीला भंडारी आदि ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।

इसमें न सिर्फ तमाम गड़बड़ी एवं लापरवाहियों की जिम्मेदारी तय कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है, बल्कि आपदा प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में मानीटरिंग एवं कार्य की जिम्मेदारी सेना के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स को सौंपने की मांग की गई है। याचिका में आपदा से जुड़े तमाम कार्यों की मॉनीटरिंग के लिए हाईपावर कमेटी की सिफारिश भी की गई है।

न्याय की गुहार
•प्रभावितों ने पांच मई को सुप्रीम कोर्ट में की जनहित याचिका दायर 19 मई को होनी है याचिका पर सुनवाई

याचिका में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
•लगातार आपदाओं के बावजूद राज्य सरकार ने इससे निपटने के लिए ठोस नीति तैयार क्यों नहीं की गई।
•बाढ़ सुरक्षा कार्यों में विलंब क्यों किया गया।
•निम्न गुणवत्ता के निर्माण कार्यों पर किसी की जवाबदेही तय क्यों नहीं।
•आपदा में बदहाल सड़कों को दुरुस्त कराए बगैर चार धाम यात्रा शुरू की गई। यदि कोई हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
•संवेदनशील क्षेत्रों में मॉनीटरिंग की कोई व्यवस्था क्यों नहीं है?
•बाढ़ में पुल बहने के बाद अलग-थलग पड़े क्षेत्रों को जोड़ने के लिए अभी तक ठोस प्रयास क्यों नहीं किए गए?

याचिका में लगाई गुहार
•आपदा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में मॉनीटरिंग एवं ट्रीटमेंट की जिम्मेदारी सेना के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स को दी जाए।
•आपदा पीड़ितों को मुआवजा वितरण में हुई धांधली की जांच कैग से कराई जाए।
•आपदा प्रभावित जनपदों के संवेदनशील स्थानों के बारे में जीएसआई की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
•आपदा से निपटने में लापरवाही एवं गड़बड़ी करने वालों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
•आपदा से जुड़े तमाम कार्यों की मॉनीटरिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाईपावर कमेटी बनाई जाए।

सौजन्य से: अमर उजाला ब्यूरो

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