फिर मिला बजट, अब तो बनाएं रास्‍ता
बड़कोट (उत्तरकाशी)। यमुनोत्री धाम के लिए बनाए गए पैदल बाईपास मार्ग पर इस बार भी सुरक्षित आवाजाही संभव नहीं है। वन विभाग की ओर से 1.06 करोड़ खर्च कर बनाए गए मार्ग को दुरुस्त करने के लिए पर्यटन विभाग ने 20 लाख का बजट फिर वन विभाग को दिया है। यात्रा सिर पर है, लेकिन वन विभाग ने अभी तक यहां काम शुरू नहीं किया है।
यात्रा सीजन में यमुनोत्री पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चर एवं डंडी-कंडी के साथ तीर्थयात्रियों की आवाजाही से जाम की समस्या रहती है। जाम में फंसने से यात्रियों का शेड्यूल गड़बड़ाने के साथ ही यहां हादसे की आशंका भी बनी रहती है। इस समस्या से निजात के लिए पर्यटन मंत्रालय की ओर से वित्त पोषित योजना में भिंडियालीगाड से यमुनोत्री तक ढाई किमी बाईपास पैदल मार्ग का निर्माण कराया गया था। अपर यमुना वन प्रभाग ने वर्ष 2011 तक मार्ग पर 1.06 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं, लेकिन रास्ता आवाजाही लायक नहीं बन पाया है।
इस वैकल्पिक मार्ग को दुरुस्त करने की तीर्थ पुरोहितों एवं स्थानीय लोगों की मांग पर इस बार पर्यटन विभाग ने फिर वन विभाग को 20 लाख का बजट दिया है। हैरानी की बात यह है कि यात्रा सिर पर है, लेकिन अभी तक वन विभाग ने धरातल पर काम शुरू नहीं किया है।
मिला बजट
पर्यटन विभाग ने वन विभाग को मार्ग दुरुस्तीकरण को 20 लाख रुपये और दिए
भिंडियालीगाड-यमुनोत्री बाइपास पैदल मार्ग सुरक्षित आवाजाही लायक नहीं है। वन विभाग को इसी शर्त पर 20 लाख रुपये दिए गए हैं कि वह रास्ते को दुरुस्त कराएगा। जल्द ही मार्ग का निरीक्षण किया जाएगा। खुशहाल सिंह नेगी, पर्यटन अधिकारी उत्तरकाशी।
वन विभाग के लिए यह मार्ग सरकारी बजट का वारा न्यारा करने का जरिया बन गया है। एक करोड़ से अधिक खर्च करने के बाद भी रास्ता चलने लायक नहीं है। यहां मानकों के विपरीत निम्न गुणवत्ता के कार्य कराए गए हैं। मनमोहन उनियाल, तीर्थ पुरोहित यमुनोत्री।
पैदल मार्ग पर काम कराने के लिए पानी की जरूरत है। अब मार्ग पर पेयजल लाइन बिछने के साथ आज से ही काम शुरू कराया जा रहा है। किशोर लाल, वन क्षेत्राधिकारी यमुनोत्री।
सौजन्य से : अमर उजाला
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