यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले अस्पतालों में डाक्टर और संसाधनों की कमी

गढ़वाल। चार धाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी। यात्रा शुरू होने में मात्र 17 दिन शेष बचे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तैयारी कहीं नजर नहीं आ रही है। यात्रा मार्ग पर बने अस्पतालों में डाक्टर और संसाधनों का टोटा बना हुआ है।
उत्तरकाशी। गंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर जिला अस्पताल समेत 19 अस्पताल हैं लेकिन कहीं डाक्टर नहीं है तो कहीं अन्य संसाधनों की कमी बनी हुई हैं। ऐलोपैथिक अस्पताल गंगनानी और कल्याणी में एक भी डाक्टर नहीं है। गंगोत्री-यमुनोत्री धाम में भी अभी तक स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं जुटाई गई। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ सकता है। सीएमओ डा.मयंक उपाध्याय का कहना है कि विभाग यात्रा की तैयारी कर रहा है। यमुनोत्री, जानकीचट्टी में मेडिकल रिलीफ पोस्ट और गंगोत्री में एसएडी खोली जाएगी। इनमें पर्याप्त दवाईयों के साथ ही ऑक्सीजन सिलेंडर रखे जाएंगे। दिल के मरीजों की जांच के लिए रोटेशन पर विशेषज्ञ डाक्टर की मांग की गई है। उम्मीद है कि जल्द यह सुविधाएं और डाक्टर उपलब्‍ध हो जाएंगे। इससे सभी समस्या हल हो जाएंगी।

चाहिए डाक्टर और 108 एंबुलेंस
रुद्रप्रयाग। यहां स्वास्थ्य विभाग द्वारा सोनप्रयाग, मुंडकटिया, छौड़ी, जंगलचट्टी और भीमबली में एमआरपी (मेडिकल रिलीफ पोस्ट) खोले गए हैं। यहां एक-एक फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय तैनात हैं। विभाग रोेटेशन में कर्मियों की तैनाती कर रहा है। एमआरपी में कर्मियों की तैनाती से जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं क्योंकि अधिकतर सरकारी अस्पताल इन्हीं पैरामेडिकल कर्मियों के भरोसे संचालित हो रहे हैं।
छोटा लिनचोली में मंगलवार तक एक और एमआरपी खुल जाएगी। गौरीकुंड अस्पताल में फिलहाल एक फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय तैनात है। यात्राकाल के दौरान गौरीकुंड और केदारनाथ अस्पताल में एक-एक फिजिशियन और मेडिकल अफसर तैनात करने की योजना है। इसके अलावा लिनचोली और भीमबली में अस्थायी अस्पताल में एक-एक मेडिकल अफसर की डिमांड की गई है। यात्राकाल में गुप्तकाशी में तीर्थयात्रियों की भीड़ और मेडिकल चेकअप को देखते हुए एक फिजीशियन और एक लेडी डॉक्टर की मांग की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने गौरीकुंड, बसुकेदार और फाटा के लिए तीन अतिरिक्त 108 इमरजेंसी वाहन मांगे हैं। गत वर्ष बाढ़ में गौरीकुंड में खड़ी 108 एंबुलेंस बह गई थी।
अन्य जिलों से छह-छह अतिरिक्त फार्मेसिस्ट और वार्ड ब्वाय मांगे गए हैं। यात्रा व्यवस्थाओं की मॉनीटरिंग के लिए एक छोटे वाहन की भी मांग की गई है। डॉक्टर भी मांगे गए हैं। उम्मीद है कि यात्रा शुरू होने से पूर्व सभी की तैनाती हो जाएगी।- डा. केडी शर्मा, सीएमओ रुद्रप्रयाग
चिकित्सकों के बिना शोपीस बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जोशीमठ।
एफएसओ की जरूरत
रुद्रप्रयाग। यात्राकाल में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए नियमित तौर पर स्वास्थ्य विभाग को चेकिंग की जरूरत पड़ती है, लेकिन जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग एक ही अधिकारी के भरोसे है। दो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (एफएसओ)के पद रिक्त हैं। इसे देखते हुए विभाग ने कम से कम एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी की तैनाती की मांग की है जो यात्राकाल में चेकिंग कर सके। ब्यूरो
गोपेश्वर। बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब तीर्थयात्रा पड़ावों पर स्वास्थ्य सेवाएं अब भी चाक-चौबंद नहीं हो पाई हैं। यहां प्रमुख पड़ावों पर सरकारी अस्पताल तो हैं, लेकिन उनमें डाक्टर नहीं है। गौचर स्थित अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र में एक डाक्टर की तैनाती है जबकि यात्राकाल में यहां तीन चिकित्सकों की आवश्यकता होती है। आपदा के कारण यदि तीर्थयात्रा रोकी जाती है तो तीर्थयात्रियों को गौचर में ही रोक लिया जाता है। सीएचसी कर्णप्रयाग में सात चिकित्सक तैनात हैं, जबकि यहां चिकित्सकों के स्वीकृत पद 12 हैं। यही स्थिति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चमोली की है। यहां एक चिकित्सक तैनात है। पीपलकोटी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन चिकित्सक मौजूद हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जोशीमठ में सबसे अधिक दिक्कत बनी हुई है। यहां स्वास्थ्य केंद्र में मात्र चार डाक्टर तैनात हैं। जबकि बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब यात्रा का यह प्रवेश द्वार है। यहां 12 चिकित्सकों के पद सृजित हैं। फिजिशियन का पद पिछले पांच वर्षों से रिक्त चल रहा है। हेमकुंड साहिब के प्रवेश द्वार गोविंदघाट और पांडुकेश्वर में स्थित एलोपैथिक चिकित्सालय में चिकित्सकों के पद रिक्त पडे़ हुए हैं। यहां फार्मेसिस्ट ही यात्राकाल में अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं।
नीयति ट्रस्ट संभाले है तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य का जिम्मा
गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम में स्वास्थ्य सेवा का जिम्मा पिछले दो सालों से नीयति चैरिटेबल ट्रस्ट संभाले हुए हैं। यहां सरकार ने एक एलोपैथिक चिकित्सालय खोला है, लेकिन एिक ही डाक्टर की तैनाती होने से तीर्थयात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाती है। जबकि यात्राकाल में धाम में तीन चिकित्सकों की तैनाती की जानी चाहिए।
हमने स्वास्थ्य निदेशालय से बदरीनाथ, जोशीमठ, गोपेश्वर और कर्णप्रयाग में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों के लिए फिजिशियन, कार्डियोलोजिस्ट और महिला डाक्टर की तैनाती की मांग की हैं। यात्रा पड़ावों पर स्थित स्वास्थ्य केंद्रों में भी चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। यात्राकाल में हमें स्पेशलिस्ट चिकित्सक मिल जाएंगे।डा. बीएस पाल, डिप्टी सीएमओ, चमोली।

सौजन्य से : अमर उजाला

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