मनेरी बैराज गेटों से हो रहे रिसाव से चल रही केवल दो टरबाइन
उत्तरकाशी। सर्दियों में भागीरथी में कम पानी वाले सीजन में मनेरी बैराज गेटों की मरम्मत नहीं कराने की जल विद्युत निगम की चूक अब भारी पड़ने लगी है। भागीरथी में पर्याप्त पानी के बावजूद तिलोथ विद्युत गृह में सिर्फ दो टरबाइनें ही चल पा रही हैं। जबकि एक टरबाइन लायक पानी मनेरी बैराज गेटों बेकार बह रहा है। गर्मियां बढ़ने के साथ ही जलागम क्षेत्र में बर्फ पिघलने के कारण भागीरथी में वाटर डिस्चार्ज बढ़ता जा रहा है। ऐसे में 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना में विद्युत उत्पादन भी बढ़ना चाहिए था, लेकिन निगम प्रबंधन की चूक उत्पादन हानि का सबब बन गई है। मनेरी बैराज गेटों से भारी रिसाव के कारण तिलोथ विद्युत गृह में दो टरबाइनें चलाने लायक पानी भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसी तरह खींचतान कर रोजाना 0.8 मिलियन यूनिट उत्पादन हो रहा है।
विद्युत गृह में सुरंग से महज 30.46 क्यूमेक्स पानी पहुंचने से पीक आवर्स में ही 30-30 मेगावाट की दो टरबाइनें चल पा रही हैं, जबकि मनेरी बैराज गेट और फ्लशिंग कंड्यूट गेट से करीब 20 क्यूमेक्स पानी रिस कर बेकार बह रहा है। जानकारों के मुताबिक यदि सर्दियों में भागीरथी में कम पानी वाले सीजन में गेटों की मरम्मत करा ली जाती, तो इस समय तिलोथ विद्युत गृह से क्षमता के अनुरूप उत्पादन लिया जा सकता था।
लापरवाही
सर्दियों में भागीरथी में पानी कम होने पर भी नहीं कराया गया काम
बीते साल निगम को हुआ 75 मिलियन यूनिट का नुकसान
हर साल कम हो रहा विद्युत उत्पादन
आपदा की मार कहें या फिर कुप्रबंधन, 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण जल विद्युत परियोजना से विद्युत उत्पादन में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। वर्ष 2011-12 में परियोजना से 516.112 मिलियन यूनिट उत्पादन हुआ था। वर्ष 2012-13 में यह घट कर 454.964 मिलियन यूनिट और बीते वित्तीय वर्ष में लक्ष्य से 75 मिलियन यूनिट कम महज 382.174 मिलियन यूनिट ही रह गया है, जिससे निगम को करीब 5.25 करोड़ की हानि उठानी पड़ी। फिलहाल मनेरी बैराज से विद्युत गृह को 30.46 क्यूमेक्स पानी मिल रहा है, जिससे पीकिंग आवर्स में दो मशीनों को चलाकर रोजाना 0.8 मिलियन यूनिट उत्पादन हो रहा है। बीते वित्तीय वर्ष में परियोजना से लक्ष्य 457 मिलियन यूनिट के सापेक्ष 382.174 मिलियन यूनिट उत्पादन हुआ। -अंबरीश यादव, अधिशासी अभियंता, तिलोथ विद्युत गृह।
करीब छह करोड़ लागत से मनेरी बैराज गेटों की मरम्मत करानी है। फरवरी से इसके लिए तीन बार निविदा कराने पर भी कोई ठेकेदार नहीं आया। डाउन स्ट्रीम में बाढ़ सुरक्षा कार्यों के कारण क्लोजर भी नहीं मिल पा रहा है। अब विद्युत गृह में मशीनों की मरम्मत के दौरान क्लोजर लेकर गेटों से हो रहा रिसाव रोका जाएगा।
जेबी सिंह, डीजीएम जल विद्युत निगम।
सौजन्य से : अमर उजाला
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