सुल्तानपुर, लक्सर क्षेत्र की एक हजार बीघा भूमि जलमग्न
लक्सर/सुल्तानपुर। गंगा के पानी से लक्सर और सुल्तानपुर क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। बृहस्पतिवार शाम तक क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों की करीब एक हजार बीघा फसल गंगा के पानी से जलमग्न हो गई। हालांकि अभी तक गांवों की ओर पानी नहीं आया है, लेकिन ग्रामीण इसकी आशंका से भयभीत नजर आ रहे हैं। लोगों ने रातभर जागकर पहरा देने की योजना बनाई थी। प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गंगा में टिहरी डैम और अलकनंदा का अतिरिक्त पानी छोड़ने से यह स्थिति पैदा हुई है। वहीं, टीएचडीसी के अधिकारियों का कहना है कि टिहरी बांध से रूटीन की तरह ही पानी छोड़ा जा रहा है।
पिछले साल जून माह में गंगा के पानी ने खादर क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी। अब एक बार फिर क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं। बताया जा रहा है कि टिहरी बांध से अचानक 22 हजार से अधिक क्यूसेक पानी और अलकनंदा से भी अतिरिक्त पानी छोड़ा गया, जिसका असर क्षेत्र में बृहस्पतिवार को दिखाई दिया। जलस्तर बढ़ने के कारण सुल्तानपुर और खानपुर क्षेत्र में गंगा के किनारे बने चार तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए। इनमें से एक तटबंध की हाल ही में पीडब्ल्यूडी ने मरम्मत कराई थी। बताया गया कि सुल्तानपुर क्षेत्र में गंगा के किनारे रणजीतपुर और सोपरी के पास बना तटबंध, शेरपुर बेला के पास बना तटबंध और खानपुर क्षेत्र में मोहम्मदपुर मथाना के पास बना तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया। खानपुर क्षेत्र में भी मोहम्मदपुर मथाना में तटबंध टूटने से कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। जिससे सुल्तानपुर और खादर क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों की एक हजार बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो गई। इसमें से करीब 500 बीघा भूमि पर गेहूं की फसल खड़ी है, जबकि इतनी ही भूमि गन्ने की फसल बोने के लिए तैयार की गई थी।
ग्रामीण ओमपाल, लटूरसिंह, बीरसिंह, विजयपाल, जितेंद्र, महावीर सिंह आदि का कहना है कि गंगा में पानी आने से सोपरी, रामपुर रायघटी, नंदपुर, गंगादासपुर, महाराजपुर आदि करीब एक दर्जन से अधिक गांवों के जंगल में टूटे गंगा के तटबंध से निकलकर पानी भर गया है।
इसलिए पैदा हुए हालात
अधिकारियों की मानें तो इस समय गंगा में कुल 35 हजार क्यूसेक पानी चल रहा है। इसमें से 13 हजार क्यूसेक पानी अलकनंदा और 22 हजार क्यूसेक पानी टिहरी डैम से छोड़ा जा रहा है। बुधवार तक यूपी सिंचाई विभाग के अधिकारी गंगनहर में 10 हजार क्यूसेक पानी छोड़ रहे थे। जिन्होंने बिना बताए यह पानी घटाकर चार हजार क्यूसेक कर दिया। जिससे छह हजार क्यूसेक पानी का दबाव भी गंगा में बढ़ गया।
चार तटबंधों को क्षतिग्रस्त कर खेतों में घुसा पानी
ग्रामीणों को आशंका, गांवों में घुस सकता है पानी
प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। बिना पूर्व सूचना के गंगनहर में पानी घटाने और उसे गंगा में छोड़े जाने को लेकर यूपी सिंचाई विभाग के अधिकारियों से भी स्पष्टीकरण तलब किया गया है। -डी सैंथिल पांडियन, डीएम।
टिहरी बांध से अचानक 22 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से यह समस्या पैदा हुई। – पुरुषोत्तम कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
टिहरी बांध से लगभग 220 क्यूमेक्स पानी रूटीन में ही छोड़ा जा रहा है। इससे अधिक पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। बांध का जलस्तर बृहस्पतिवार को आरएल 771 है। – यूके ठाकुर, अपर महाप्रबंधक नियोजन, टीएचडीसी
सौजन्य से : अमर उजाला
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