वन्य जीव विहार के गांव घोषणा में ही बाहर
पुरोला (उत्तरकाशी)। मोरी ब्लाक के 42 गांवों को गोविंद वन्य जीव विहार की सीमा से बाहर करने का सरकारी फरमान हवाई साबित हुआ। पूर्व सीएम विजय बहुगुणा की घोषणा के बाद जारी हुए नए नोटिफिकेशन में ऐसा कुछ भी नया नहीं है, जिससे क्षेत्र के अवरुद्ध विकास के रास्ते खुल सके। बस सरकार ने उपनिदेशक कार्यालय को देहरादून शिफ्ट करने की तैयारी जरूर कर ली है।
वन्य जीव संरक्षण के लिए वर्ष 1955 में मोरी ब्लाक के 957.96 वर्ग किमी क्षेत्र को गोविंद वन्य जीव विहार के रूप में चिह्नित किया गया था। यूं तो पार्क क्षेत्र में आने वाले 42 गांव राजस्व क्षेत्र में थे, लेकिन गांव की जमीन को छोड़ शेष इलाका पार्क क्षेत्र में होने से यहां तमाम सरकारी औपचारिकताओं के चलते विकास अवरुद्ध रहा। पूर्व सीएम विजय बहुगुणा ने चुनावी फायदे के लिए इन गांवों को पार्क क्षेत्र से बाहर करने का खूब ढिंढोरा पीटा, लेकिन नए नोटिफिकेशन में कोई भी नया प्राविधान नहीं होने से अब इस पर सवाल उठ रहे हैं।
वन्य जीव विहार में पैदल रास्ते, सड़क, पुल आदि तमाम निर्माण के लिए अभी भी लंबी सरकारी औपचारिकताएं जरूरी हैं। ग्रामीणों के फ्री ग्रांट की लकड़ी आदि हक हकूक अब भी बंद हैं। ऐसे में ग्रामीण सरकारी घोषणा को सिर्फ हवाई बता रहे हैं। अब सरकार की ओर से उपनिदेशक कार्यालय को पुरोला से देहरादून शिफ्ट करने की तैयारी है। ऐसे में सड़क, संपर्क मार्ग आदि किसी भी निर्माण की अनुमति के लिए लोगों को देहरादून के चक्कर काटने पड़ेंगे।
पुराने और नए नोटिफिकेशन में नहीं है कोई अंतर
पूर्व सीएम विजय बहुगुणा ने की थी घोषणा
क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के अनुसार गोविंद वन्य जीव विहार के उपनिदेशक एवं वार्डन का कार्यालय पार्क क्षेत्र के भीतर ही होना चाहिए था। अभी तक दोनों कार्यालय पुरोला में चल रहे थे। अब इन्हें देहरादून शिफ्ट करने से दिक्कतें और बढ़ेंगी। सरकार की ओर से 42 गांवों को पार्क क्षेत्र से बाहर करने की घोषणा का कोई फायदा नहीं मिला।
-हरबन सिंह चौहान, पूर्व सैन्य अधिकारी निवासी मसरी।
शासन ने यहां उपनिदेशक का पद मृत कर दिया है। गोविंद वन्य जीव विहार के 42 गांवों की भूमि पहले भी पार्क क्षेत्र से बाहर ही थी। शासन की ओर से हाल ही में जारी नए नोटिफिकेशन और पुराने में कोई अंतर नहीं है। –
सुरेंद्र कुमार, उपनिदेशक गोविंद वन्य जीव विहार।
सौजन्य से : अमरउजाला
दीवार ढही, आबादी पर मंडराया खतरा
सुरक्षा दीवार निर्माण के लिए किया था अलकनंदा को डायवर्ट,
ज्यादा पानी छोड़ने से हुआ नुकसान
श्रीनगर। अलकनंदा के डायवर्जन के बाद अचानक पानी बढ़ने से नगर पालिका की दीवार ढह गई और एक घाट पूरी तरह से पानी में समा गया है। पानी बढ़ने से नैथाणा तिवाड़ी मोहल्ला, कमलेश्वर, केदार मोहल्ला समेत नदी तट पर बसे आबादी वाले लोगों की सांसें थमी रही। पानी कम होने के बाद ही लोगों ने राहत की सांस ली। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की टेस्टिंग के दौरान ज्यादा पानी छोड़ने से यह स्थिति बनी है। मालूम हो कि अलकनंदा के किनारे सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जा रहा है। दीवार निर्माण से पहले सिंचाई विभाग ने नदी को डायवर्ट कर दिया था। बृहस्पतिवार को अचानक से अलकनंदा में पानी बढ़ गया। पानी बढ़ने से कूड़ा डंपिंग जोन बहने के साथ नगर पालिका की आरसीसी दीवार ढह गई। फिर इसी तरह से पानी बढ़ा तो आबादी वाले इलाकों को भी खतरा पैदा हो सकता है। डायवर्जन के कार्य से हुए इस नुकसान के लिए पालिका प्रशासन सकते में है। नदी तट पर रह रहे लोग भी अनहोनी की आशंका से सहमे हुए हैं। सभासद विजयलक्ष्मी रतूड़ी, मनीष नौटियाल, सुधांशु नौडियाल, अनूप बहुगुणा, जीतेंद्र रावत का कहना है कि नदी का बहाव कम किया जाना चाहिए। सिंचाई विभाग द्वारा किए गए कार्य में तकनीकी पहलुओं की जांच होनी चाहिए।
सौजन्य से : अमरउजाला
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