300 मीटर सड़क, साढ़े चार सौ करोड़ खर्च, नतीजा शून्य
बड़कोट (उत्तरकाशी)। आपदा की मार और सरकार की गलत नीतियों के कारण बाडिया स्लिप जोन यमुनोत्री राजमार्ग के लिए नासूर बना हुआ है। महज 300 मीटर के इस हिस्से में चार साल के भीतर करीब साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और 70 लाख रुपये का काम चल रहा है। बावजूद इसके सड़क सुरक्षित यातायात लायक नहीं बन पाई है।
वर्ष 2010 में बाडिया गांव के नीचे सक्रिय हुआ भू-धंसाव यमुनोत्री धाम की यात्रा पर भारी पड़ रहा है। यहां करीब तीन सौ मीटर हिस्से में नीचे से यमुना नदी का कटाव और ऊपर बाडिया गांव के नीचे से धंसाव हो रहा है। हल्की बारिश में ही यहां यमुनोत्री हाईवे पर यातायात अवरुद्ध हो जाता है। सड़क दुरुस्त करने के नाम पर निर्माण खंड चार साल में 4.65 करोड़ खर्च कर चुका है और 70 लाख रुपये का कार्य चल रहा है। इसके बावजूद सड़क तो सुरक्षित यातायात लायक तैयार नहीं हुई, लेकिन बाडिया गांव पर संकट मंडराने लगा है।
भू-वैज्ञानिकों ने बाडिया गांव का सर्वे कर इसके विस्थापन की जरूरत बताई। प्रशासन ने गांव के 133 परिवारों के विस्थापन के लिए चार करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा, लेकिन अभी तक इस कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। गांव पर भू-धंसाव से खतरा मंडरा रहा है, बावजूद इसके विभाग की ओर से सरकारी बजट ठिकाने लगाने के लिए 5.15 करोड़ रुपये की लागत से झूला पुल का निर्माण किया जा रहा है। बाडिया गांव का विस्थापन कर राना से दागुड़गांव-पिंडकी-मदेश-निषणी लिंक सड़क का निर्माण किया जाए, तो समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।
हल्की बारिश में ही अवरुद्ध हो जाता है यातायात
भू-वैज्ञानिकों ने बताई गांव के विस्‍थापन की जरूरत
कमिश्नर ने भी जताई चिंता
बीते दिनों क्षेत्र भ्रमण पर आए गढ़वाल आयुक्त सीएस नपल्च्याल ने भी बाडिया स्लिप जोन पर चिंता जताई। उन्होंने यहां वैकल्पिक मोटर मार्ग की आवश्यकता जताते हुए इस पर गंभीरता से कार्रवाई की बात कही। एसडीएम देवमूर्ति यादव ने बताया कि लिंक रोड तथा बाडिया गांव के विस्थापन की प्रक्रिया चल रही है। बाडिया स्लिप जोन वाले हिस्से में वर्ष 2010 से अब तक 4.65 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। अभी यहां 70 लाख रुपये के बजट से सड़क को दुरुस्त कराया जा रहा है। फिलहाल यमुनोत्री हाईवे पर यातायात चालू रखने में हमारे पास यही एक विकल्प है। -दिनेश कुमार बिजल्वाण, अधिशासी अभियंता, राजमार्ग निर्माण खंड बड़कोट।
सौजन्य से : अमर उजाला
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