सीवर योजनाएं बन रही, ट्रीटमेंट के उपाय नहीं
ऋषिकेश। एनजीआरबीए के अंतर्गत तीर्थनगरी में सीवर प्रदूषण की रोकथाम के लिए सीवर लाइनों को बिछाने के लिए करोड़ों की योजनाएं बनाई जा रही हैं, मगर सीवरेज डिस्चार्ज के मुताबिक ट्रीटमेंट व्यवस्था में सुधार के कोई प्रयास नहीं हो रहे। इसके लिए करीब दो साल से योजना प्रस्तावित है, जिसे अभी तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। इसके चलते सीवरेज का पानी सीधे गंगा में प्रवाहित हो रहा है। मगर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में दशकों पहले छह एमएलडी क्षमता के ट्रीटमेंट प्लांट के भरोसे शहर से निकलने वाली 10 से 11 एमएलडी सीवर गंदगी का शोधन ठीक से नहीं हो पा रहा है। शहरभर के सीवर निस्तारण के लिए करीब साढ़े चार दशक पहले श्यामपुर, लक्कड़घाट में छह मिलियन लीटर डेली क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया गया था। उस वक्त क्षेत्र की स्थायी आबादी महज 20 से 30 हजार थी, साथ ही क्षेत्र में पर्यटकों की आमद भी काफी कम थी। जबकि वर्तमान में स्थायी आबादी करीब एक लाख और अस्थायी आबादी इससे कहीं अधिक है। क्षेत्र में दशकभर से पर्यटकों की आमद कई गुना बढ़ गई है, बावजूद इसके सीवरेज डिस्चार्ज के लिहाज से एसटीपी की क्षमता नहीं बढ़ाई गई।
माहभर से बंद पड़े हैं दो तालाब
ऋषिकेश। लक्कड़घाट में स्थापित एसटीपी में डिस्चार्ज सीवरेज के शोधन के लिए पांच तालाब बनाए गए हैं। इन तालाबों में एक के बाद दूसरे में सीवरेज प्रदूषित जल को छोड़कर चरणबद्ध ट्रीटमेंट किया जाता है। इनमें से दो तालाब माहभर से अधिक समय से बंद पड़े हैं। जिससे सीवर शोधन प्रणाली बाधित होने से प्रदूषित जल सहायक नदी के जरिए गंगा में गिर रहा है, मगर इस ओर गौर नहीं किया जा रहा।
सफाई के बहाने प्रदूषण की छूट
एसटीपी के संचालन के लिए जिम्मेदार एजेंसी ने सफाई के बहाने तालाब बंद तो कर दिए, मगर न तो इन्हें खोलने की समय सीमा तय की और न ही वैकल्पिक उपाय किए। जिससे दूषित जल नदी में गिर रहा है। जल संस्थान (सीवर विंग) के अवर अभियंता हरीश बंसल की मानें तो तालाबों की तलहटी पर अधिक गंदगी जमा होने से सीवर ट्रीटमेंट ठीक प्रकार से नहीं हो पा रहा था। तालाबों के सूखने पर सफाई कराकर इन्हें दोबारा ट्रीटमेंट के लिए खोल दिया जाएगा।
25 एमएलडी का एसटीपी है प्रस्तावित
निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) के प्रोजेक्ट मैनेजर पीके गुप्ता ने बताया कि नगर और आसपास के क्षेत्रों के लिए तैयार किए जा रहे सीवरेज मास्टर प्लान के तहत आधुनिक तकनीकी के 25 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्रस्तावित है। योजना प्रारंभिक मंजूरी के लिए एनजीआरबीए के जरिए भारत सरकार को भेजी गई है। सहमति के बाद इसकी डीपीआर तैयार की जाएगी। इसके बाद सीवरेज संबंधी सभी समस्याओं का स्थायी निराकरण हो जाएगा।

सौजन्य से : अमर उजाला ब्यूरो
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