टिहरी झील के आरएल 865 पर बसे गांवों पर भू-धंसाव का खतरा
नई टिहरी। टिहरी बांध प्रभावित रौलाकोट के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर आवासीय भवनों का भुगतान करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि टिहरी झील के आरएल 865 पर बसे गांव में झील के जलभराव होने से गांव में हर समय भू-धंसाव का खतरा बना रहता है। उन्होंने बताया कि पुनर्वास विभाग ने ढाई साल पहले सर्वे सूची तैयार की थी, लेकिन आज तक भुगतान नहीं हो पाया है।
प्रतापनगर ब्लाक के रैका पट्टी में रौलाकोट गांव टिहरी बांध की झील के आरएल 865 मीटर पर है। जहां झील का जलस्तर बढ़ने पर भू-धंसाव होने से खतरा बना रहता है। खतरे को देखते हुए गांव को विस्थापित करने की सिफारिश की गई थी, जिस पर पुनर्वास विभाग ने ढाई साल पहले गांव की सर्वे सूची तैयार कर जुलाई 2012 में भवनों का मुआवजा भी बनाया था। लेकिन अभी तक 150 परिवारों में से किसी को भी भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने पुनर्वास विभाग की उस शर्त का विरोध किया है, जिसमें ग्रामीणों को भुगतान से पहले आवासीय भवन ध्वस्त करने को कहा जा रहा है। ग्रामीणों ने डीएम को बताया कि भुगतान से पहले मकान तोड़ने हैं, तो वह रहेंगे कहां। डीएम युगल किशोर पंत ने जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है। प्रतिनिधिमंडल में गजपाल धनाईं, श्रीराम, उत्तम सिंह उम्मेद सिंह पंवार, प्रेम सिंह, गोकुल सिंह, इंद्र लाल आदि शामिल थे।
चार साल बाद भी नहीं मिली मदद
रुद्रप्रयाग। कारगिल शहीद सुनील कांडपाल ग्राम बेंजी कांडई के काश्तकारों की उपजाऊ कृषि भूमि लोनिवि ने मोटर मार्ग निर्माण में काट दी। लेकिन प्रभावित काश्तकारों को चार साल बाद भी मुआवजा नहीं मिल पाया है। विकास खंड अगस्त्यमुनि के अंतर्गत बैंजी कांडई गांव में दो दिशाओं से सड़क का निर्माण हुआ। लेकिन दोनों ही सड़क गांव से दूर रह गई। कारगिल शहीद सुनील कांडपाल के नाम से निर्मित रुद्रप्रयाग-चोपड़ा-गढ़ीधार मोटर मार्ग गांव से करीब डेढ़ किमी दूर अटक गई। इसके बाद वर्ष 2006 में रुद्रप्रयाग-पोखरी मोटर मार्ग के कोटखाल से जागतोली मोटर मार्ग की स्वीकृति मिली। बेंजी गांव के लोगों ने इस आस में अपने खेत कटवाने दिए कि गांव तक सड़क पहुंच जाएगी। लेकिन सड़क गांव के ऊपर लगभग आधा किमी दूर से दूसरे गांव को काट दी गई। काश्तकार ललित कांडपाल और विवेक कांडपाल बताते हैं कि खेत कट गए और गांव में रोड भी नहीं पहुंची। कटिंग में दबी नाप भूमि का मुआवजा भी नहीं मिला। लोनिवि के अधिशासी अभियंता इंद्रजीत बोस का कहना है कि काश्तकारों को आठ लाख में से लगभग चार लाख का मुआवजा वितरित कर दिया है। अब उन्हीं का मुआवजा रुका है, जिनके कागजातोें में में कोई कमी है। अप्रैल माह में शेष मुआवजा वितरित किया जाएगा। वहीं ग्राम पंचायत स्यूंड ढामक निवासी गजेंद्र प्रसाद डिमरी पिछले नौ माह से आपदा से क्षतिग्रस्त संपत्ति के मुआवजा के लिए भटक रहे हैं। उन्होंनेे बताया कि अतिवृष्टि के कारण उनके आवासीय भवन पर दरारें पड़ गई थी। जबकि आंगन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके अलावा नौ नाली भूमि को भी नुकसान पहुंचा। लेकिन अभी तक प्रशासन स्तर से उन्हें कोई मदद नहीं नहीं मिल पाई है।
परेशानी
सर्वे सूची बनाने के ढाई साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा
भुगतान से पहले मकान तोड़ने की शर्त का विरोध
दिक्कत
कोटखाल-जागतोली मोटर मार्ग के निर्माण में कटे थे खेत
Courtesy: अमर उजाला
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