यमुना स्वच्छता समिति के लोगों ने रोका पालिका का कूड़ा वाहन
विकासनगर। यमुना स्वच्छता समिति ने नदी किनारे सफाई अभियान चलाकर नगर पालिका प्रशासन के नदी किनारे कूड़ा डंप करने का विरोध किया है। समिति से जुडे़ जीआईसी कटापत्थर के ईको क्लब के छात्रों ने नदी किनारे कूड़ा डालने जा रही ट्रैक्टर ट्रालियों को भी रोककर विरोध जताया। नगर पालिकाध्यक्ष नीरज अग्रवाल से फोन पर वार्ता के बाद छात्र शांत हुए। समिति के अध्यक्ष सरदार सिंह तोमर ने बताया कि नगर पालिका प्रशासन शहर का कूड़ा नदी किनारे डाल रहा है। कूड़ा निस्तारण की समुचित व्यवस्था न होने से नदी प्रदूषित हो रही है। नगर पालिकाध्यक्ष नीरज अग्रवाल ने कहा कि कूड़ा निस्तारण की समुचित व्यवस्था कराई जाएगी, ताकि नदी तक कूड़ा न पहुंचे। सफाई अभियान चलाने वालों में रघुवीर सिंह तोमर, अतर सिंह चौहान, ठाकुर यशपाल सिंह, कुलदीप सिंह आदि मौजूद रहे।
भैरोंघाटी से गंगोत्री तक हो रहा सड़क को चौड़ा करने का काम, नियम ताक पर
भागीरथी में डाला जा रहा मलबा
उत्तरकाशी। भैरोंघाटी से गंगोत्री तक आठ किमी हिस्से में सड़क चौड़ीकरण का मलबा नियमों को ताक पर भागीरथी में उड़ेला जा रहा है। कुछ यही हाल भैरोंघाटी से चीन सीमा की ओर करीब 75 किमी सड़कों का भी है। इनका मलबा भी जाड़ गंगा में पहुंच रहा है। ईको सेंसिटिव जोन वाले इस हिस्से में नदी एवं गदेरों में मलबा उड़ेले जाने से न सिर्फ सैकड़ों हरे पेड़ धराशाई हो रहे हैं, बल्कि अगली बरसात में मलबे से संकरे स्थानों पर नदियों का प्रवाह अवरुद्ध होने तथा तटवर्ती इलाकों में कटाव बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है।
गंगोत्री धाम में पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने की वजह से हर साल यात्रा सीजन में जाम की समस्या आती है। समाधान के लिए भैरोंघाटी से गंगोत्री तक आठ किमी हिस्से में पहाड़ काटकर हाईवे को चौड़ा किया जा रहा है। आजकल बीआरओ की भारी मशीनें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। दूसरी ओर, भैरोंघाटी से चीन सीमा की ओर अग्रिम चौकियों तक करीब 75 किमी सड़कें काटी जा चुकी हैं और कई हिस्सों में चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है।
ईको सेंसिटिव जोन एवं गंगोत्री नेशनल पार्क जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पहाड़ियों के कटान से निकल रहा मलबा सीधे गंगा भागीरथी एवं जाड़ गंगा में उड़ेला जाना हैरान करने वाला है। वन विभाग निर्माण एजेंसी को डंपिंग यार्ड मुहैया कराने और निर्माण एजेंसियां निर्धारित स्थान पर ही मलबा डंप करने की बात कह कर पल्ला झाड़ रही हैं। यदि डंपिंग यार्ड में जमा मलबे और पहाड़ी के काटे गए हिस्सों की पैमाइश कराई जाए, तो नदियों में उड़ेले जा रहे मलबे की हकीकत सामने आ सकती है।
ईको सेंसिटिव जोन में आता है यह पूरा क्षेत्र
बरसात में मलबे से संकरे स्थानों पर बढ़ सकता है कटाव का खतरा
भैरोंघाटी से चीन सीमा से लगी सेना की चौकियों तक 75.86 किमी सड़कें काटी जा चुकी हैं। यहां काम कर रहे बीआरओ एवं सीपीडब्ल्यूडी को 14 डंपिंग यार्ड मुहैया कराए गए हैं। सीमावर्ती क्षेत्र में तो समस्या नहीं है, निचले हिस्से में जरूर मलबा जाड़ गंगा में जा रहा है। प्रताप पंवार, वन क्षेत्राधिकारी गंगोत्री नेशनल पार्क।
सड़क चौड़ीकरण का मलबा डालने के लिए बीआरओ को आठ डंपिंग यार्ड दिए गए हैं। इसके बावजूद भारी मात्रा में मलबा सीधे भागीरथी की ओर उड़ेला जा रहा है। कई बार नोटिस एवं जुर्माना काटने के बावजूद हालत में सुधार नहीं होने पर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। बलवीर सिंह, वन क्षेत्राधिकारी गंगोत्री रेंज।
न्यायालय के आदेशों का भी पालन नहीं हो रहा है। मलबे से अवरोध उत्पन्न होने के कारण नदियों का प्रवाह पथ बदल रहा है। पिछली आपदाओं में यह सामने आ चुका है। इसके बाद भी नहीं चेते तो भविष्य में इसके परिणाम भयावह होंगे। सुरेश भाई, सदस्य उत्तराखंड नदी बचाओ आंदोलन।
विकास के लिए सड़कों का निर्माण जरूरी है, लेकिन इसका निर्माण आधा कटान एवं आधा भरान की पद्धति पर होना चाहिए। कटान का मलबा पुश्ता बनाकर वहीं भरा जाना चाहिए। ज्यादा मलबा सुरक्षित जगह डंप किया जाना चाहिए। जिस तरह से गंगोत्री क्षेत्र में गंगा भागीरथी एवं जाड़ गंगा में मलबा उड़ेला जा रहा है, वह कभी न कभी तटवर्ती इलाकों में तबाही का सबब बनेगा। चंडी प्रसाद भट्ट, पर्यावरणविद।
Courtesy: अमर उजाला ब्यूरो
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