देहरादून। सेव हिमालयन अभियान के तहत एक माह से उत्तराखंड की पैदल यात्रा कर रहे है देवाशीष डे यहां के हालात देखकर काफी आहत और निराश हैं। बताया कि यहां के नेताओं ने प्रदेश के लिए कुछ नहीं किया। हिमालय को और यहां के निवासियों को अपने हाल पर छोड़ दिया है। करीब एक माह पहले हल्द्वानी से यात्रा शुरू करने वाले देवाशीष टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और गंगोत्री घूमते हुए मंगलवार को देहरादून पहुंचे। उन्होंने बताया कि यहां के लोग काफी अच्छे और मददगार हैं लेकिन जल, जंगल और जमीन के बारे में उनमें जागरूकता की कमी दिखती है।
अमर उजाला में दफ्तर में अपनी पदयात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि यहां की सड़कें काफी खराब हैं। कहा कि उत्तराखंड के नेताओं और लोगों को हिमाचल प्रदेश से सीखना चाहिए। वहां की सड़कें इतनी अच्छी हैं कि लगता ही नहीं पहाड़ की सड़कें हैं। बताया कि बीआरओ वाले सड़कें बना रहे हैं। उनसे बातचीत में पता चला कि स्थानीय लोग सड़कों को बनाने में सहयोग नहीं करते। यहां पर काम करने के लिए दूसरे राज्यों से कामगार लाने पड़ते हैं। स्थानीय लोग सड़क बनाने आदि का काम करने के लिए तैयार ही नहीं होते। देवाशीष ने बताया कि यात्रा के दौरान उन्होंने ऐसे तमाम बच्चों को देखा जिन्हें कायदे से स्कूल जाकर पढ़ाई करनी चाहिए लेकिन वे जंगलों में इधर उधर भटक रहे हैं। लोग जंगल से लकड़ियां भी काटते हैं। पूछने पर कहते हैं कि सरकार ने गैस के दाम बढ़ा दिए हैं ऐसे में चूल्हा कैसे जलाएं। देवाशीष मानते हैं कि यह नजरिया सही नहीं है।
पिछले बीस सालोें करीब 151 देशों की पैदल यात्रा कर चुके देवाशीष बताते हैं कि जरूरी सुविधाएं मिलने की वजह से बाहर से आने वाले अधिकतर पर्यटक जम्मू-कश्मीर के लद्दाख और हिमाचल चले जाते हैं, जबकि उत्तराखंड में बहुत सी सुंदर जगहें होते हुए भी नहीं आते। बताया कि उत्तराखंड हमारी देवभूमि है। पूजनीय है लेकिन यहां हालत को दयनीय बना दिया गया है। यहां चारधाम हैं लेकिन धामों तक लोग सुविधापूर्वक और सकुशल पहुंच सकें इसकी कोई व्यवस्था नहीं है। न सड़कें बनाई गई हैं न ही यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं हैं।
कहीं भी सो लेते हैं, कहीं भी खा लेते हैं
देवाशीष बताते हैं कि अपनी पैदल यात्रा के दौरान वह कहीं भी खा लेते हैं। जो भी मदद करता है वे स्वीकार कर लेते हैं। गांव में जाते हैं तो किसी ग्रामीण के यहां रुक जाते हैं। शहर में होते हैं तो थाने या रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन पर रात गुजार लेते हैं। बताते हैं कि यहां के पुलिस वाले काफी मददगार स्वभाव केे हैं। यात्रा के दौरान उन्होेंने काफी मदद की। बताया कि वे गंगोत्री धाम गए थे लेकिन वहां आगे जाने पर रोक थी, लेकिन वे चुपके से चले गए। पुलिस वालों को पता चला तो उन्होंने अपनी गाड़ी से नीचे तक छुड़वाया। बताया कि गंगोत्री धाम जाने वाला रास्ता काफी खराब है। वहां पर गाड़ी तो क्या पैदल चलना भी मुश्किल है।
कहा, नेताओं ने पहाड़ के लिए कुछ नहीं किया
पहाड़ की खराब सड़कें हैं सबसे बड़ी परेशानी
जल, जंगल और जमीन पर जागरूकता की कमी
स्कूल-कालेजों में बताते हैं अनुभव
देवाशीष बताते हैं कि वह भ्रमण के दौरान हुए अपने अनुभवों को स्कूल और कालेजों में जाकर शिक्षकों और बच्चों को बताते हैं। गांवों में जाकर ग्राम प्रधान के माध्यम से गांव वालों से भी बातचीत करते हैं।

देवाशीष डे
Courtesy: अमर उजाला ब्यूरो
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