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For Indian who confronted mining industry, the ‘Green Nobel’

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ramesh_agrawal_goldman For decades Ramesh Agarwal has been fighting against illegal mining and land grabbing by the powerful corporate.  Even      without any formal legal training he has been waging on one man campaign to educate illiterate villagers for their  rights. He  selflessly helped the people and says that he always knew that the fight will be tough. Because of his strong  will Agrawal  succeeded in shutting down a proposed coal mine by Jindal Steel and Power Ltd. one of the largest in  Chhattisgarh. And  finally after so much of struggle and being shot, he got his share of appreciation.

 Read more news details click here: Business Standard, Gulfnews.com, The Times of India, The Indian ExpressNDTV, Humanitarian news, Los Angeles Times, Wn.com, EcoWatch, Dharitri Odisha news, The Goldman Environmental Prize

 

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  1. Ramesh Agrawal, 2014 Goldman Environmental
  2. Ramesh Agrawal Live Goldman Prize Ceremony Speech at San Francisco Opera House (USA)

 

तीन दिन में 30 लीटर पानी, लोग गाँव छोड़ने को मजबूर

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पीने को पानी नहीं
असनोड़ी गांव में प्रति तीन दिन में 30 लीटर पानी ही नसीब, 30 परिवारों ने किया पलायन
श्रीनगर से 10 और पौड़ी रोड से मात्र एक किलोमीटर दूर बसे असनोड़ी गांव में पानी की कहानी काफी दुखभरी है। गांव में पेयजल संकट के चलते अभी तक करीब 30 परिवार पलायन कर चुके हैं। 40 परिवार मजबूरी में ही गांव में रह रहे हैं। यहां रहने वाले प्रत्येक परिवार को भी तीन दिन में 30 लीटर पानी ही नसीब हो पाता है। असनोड़ी गांव श्रीनगर से दस किलोमीटर दूर पौड़ी रोड स्थित खंडाह बस स्टापेज से करीब एक किलोमीटर दूर है। गांव को जोड़ने के लिए कच्ची सड़क भी है। गांव में प्रवेश करते ही खंडहर पड़े घर यहां पहुंचने वालों का स्वागत और गांव में जरूरी सुविधाओं की तस्वीर बयां करते हैं।
जानकारी के अनुसार आज से दस साल पहले तक गांव 70 परिवारोें से गुलजार था। लेकिन सड़क से नजदीक और विकास से दूर गांव से पलायन शुरू हो गया। अब गांव में मजबूरी में 40 परिवार ही बचे हैं। जिसमें से ज्यादातर दलित परिवार हैं। पलायन का मुख्य कारण बना पीने के पानी की कमी। गांव में पेयजल संकट का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक परिवार को तीन दिन में तीस लीटर पानी ही नसीब हो पाता है। ऐसे में ग्रामीणों को एक किलोमीटर दूर प्राकृतिक स्रोत से पानी ढोना पड़ता है। यहां भी पानी इतना कम है कि एक बर्तन पानी के लिए घंटों इंतजार।
कई गांवों में पेयजल संकट
पौड़ी। कल्जीखाल ब्लाक के कई गांव पीने की पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों को गाड़ गदेरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अगरोड़ा के सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत मोहन बिष्ट , मदन सेमवाल, रवींद्र असवाल, लक्ष्मण सिंह आदि ने बताया कि कफोलस्यूं पट्टी के कई गांवों पेयजल संकट गहराने लगा है। केवर्स, पाली, कठूड़, सिलेथ और नौली आदि गांवों ज्वाल्पा पंपिग योजना से पानी की आपूर्ति की जाती है। लेकिन एक सप्ताह से गांवों में नियमित सप्लाई नहीं की जा रही है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरके रोहेला ने बताया कि योजना ठीक है। गरमी शुरू होते ही पानी की मांग बढ़ जाती है। जिससे यह समस्या आ रही है।
लीकेज के चलते सड़कें तर, सूख रहे हलक
कर्णप्रयाग। जलसंस्थान नगर की लीकेज लाइनों की मरम्मत तक नहीं करा पा रहा है। हालत यह है कि कई जगह लाइनों पर लीकेज होने से पानी सड़कों और नालियों में बह रहा है जिससे कई मोहल्लों में पानी की किल्लत बनी हुई है। स्थिति यह है कि लोग पिंडर और अलकनंदा नदी में मोटर लगाकर पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। नगर के छह वार्ड और पोखरी ब्लाक के देवतोली कस्बे की पेयजल आपूर्ति जलसंस्थान के हवाले है। विभाग की घटगाड़ योजना से जहां नगर के छह वार्डों को पेयजल आपूर्ति होती है वहीं देवतोली के वाशिंदे बदरीनाथ हाईवे पर खड़ीखाड़ पेयजल योजना निर्भर हैं। 60 के दशक में बनी घटगाड़ योजना का पुनर्गठन न होने से यह जर्जर हालत में है। पूर्व वार्ड सभासद प्रह्लाद सती ने कहा कि नौटी रोड से अपर बाजार और सुभाषनगर सहित कई स्थानों पर पेयजल लाइन लीकेज कर रही है जिससे मुख्य बाजार, सुभाषनगर, सांकरी, प्रेमनगर, आईटीआई सहित कई मोहल्लों में अनियमित पेयजल आपूर्ति हो रही है।
चुनाव के बाद कोई हाल जानने नहीं आता
गांव के ही मुकेश पांडे, लक्ष्मी देवी और रमेश चंद्र का कहना है गांव सड़क के करीब ही है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सभी दलों के नेता वोट मांगने आते हैं। उनके सामने हर चुनाव में पानी की समस्या को रखा जाता है। चुनाव के समय नेता समस्या समाधान का आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई हमारे हाल जानने नहीं आता है। पिछले 14 दिन पानी इतना कम आ रहा है कि टंकी नहीं भर पाई है, जिससे पानी का वितरण नहीं हुआ। ऐसे में पानी की जरूरत को कैसे पूरा करें समझ नहीं आता। ताले में बंद रहता है नल। असनोड़ी गांव के लिए वर्ष 2006 में मासू पेयजल योजना बनी थी। शुरूआत में तो ग्रामीणों पूरा पानी मिलता रहा। इसके लिए गांव में पंद्रह स्टैंडपोस्ट भी लगाए गए थे। लेकिन इसी योजना से बाद में ओली, धरीगांव और गिरीगांव को जोड़ दिया गया। जिससे गांव में पानी बहुत कम पहुंचता है। पानी कम होने से टंकी पर ताला लगाकर पहले भंडारण किया जाता है। तीन दिन में टंकी भरती है। इसके बाद ग्रामीणों को पांच लीटर के डिब्बे से भरकर प्रत्येक परिवार को तीस लीटर पानी दिया जाता है।
लोग नदी में मोटर लगाकर कर रहे पानी की सप्लाई
पानी की समस्या नगर में गहराती जा रही है। अभी से शुरू हुई अनियमित आपूर्ति गरमियों और यात्रा सीजन में गहरा सकती है। जलसंस्थान को लीकेज और स्रोत पर पानी बर्बाद न हो इसके लिए काम करना चाहिए। – महेश खंडूड़ी/अनूप डिमरी/बीरेंद्र मिंगवाल कर्णप्रयाग।
पूरी पाइप लाइन के लीकेज ठीक कर दिए गए हैं। कहीं पर पंचायत की ओर से निर्माण कार्य करने के दौरान लाइन तोड़ी गई होगी जिसे जल्द ठीक कर दिया जाएगा। योजना के पुनर्गठन का काम जलनिगम का है। – पीके पांडे, सहायक अभियंता, जलसंस्थान कर्णप्रयाग।

सौजन्य से: अमर उजाला

एक करोड़ खर्च, फिर भी यमुनोत्री धाम के लिए पैदल बाईपास चलने लायक नहीं

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फिर मिला बजट, अब तो बनाएं रास्‍ता
बड़कोट (उत्तरकाशी)। यमुनोत्री धाम के लिए बनाए गए पैदल बाईपास मार्ग पर इस बार भी सुरक्षित आवाजाही संभव नहीं है। वन विभाग की ओर से 1.06 करोड़ खर्च कर बनाए गए मार्ग को दुरुस्त करने के लिए पर्यटन विभाग ने 20 लाख का बजट फिर वन विभाग को दिया है। यात्रा सिर पर है, लेकिन वन विभाग ने अभी तक यहां काम शुरू नहीं किया है।
यात्रा सीजन में यमुनोत्री पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चर एवं डंडी-कंडी के साथ तीर्थयात्रियों की आवाजाही से जाम की समस्या रहती है। जाम में फंसने से यात्रियों का शेड्यूल गड़बड़ाने के साथ ही यहां हादसे की आशंका भी बनी रहती है। इस समस्या से निजात के लिए पर्यटन मंत्रालय की ओर से वित्त पोषित योजना में भिंडियालीगाड से यमुनोत्री तक ढाई किमी बाईपास पैदल मार्ग का निर्माण कराया गया था। अपर यमुना वन प्रभाग ने वर्ष 2011 तक मार्ग पर 1.06 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं, लेकिन रास्ता आवाजाही लायक नहीं बन पाया है।
इस वैकल्पिक मार्ग को दुरुस्त करने की तीर्थ पुरोहितों एवं स्थानीय लोगों की मांग पर इस बार पर्यटन विभाग ने फिर वन विभाग को 20 लाख का बजट दिया है। हैरानी की बात यह है कि यात्रा सिर पर है, लेकिन अभी तक वन विभाग ने धरातल पर काम शुरू नहीं किया है।
मिला बजट
पर्यटन विभाग ने वन विभाग को मार्ग दुरुस्तीकरण को 20 लाख रुपये और दिए
भिंडियालीगाड-यमुनोत्री बाइपास पैदल मार्ग सुरक्षित आवाजाही लायक नहीं है। वन विभाग को इसी शर्त पर 20 लाख रुपये दिए गए हैं कि वह रास्ते को दुरुस्त कराएगा। जल्द ही मार्ग का निरीक्षण किया जाएगा। खुशहाल सिंह नेगी, पर्यटन अधिकारी उत्तरकाशी।
वन विभाग के लिए यह मार्ग सरकारी बजट का वारा न्यारा करने का जरिया बन गया है। एक करोड़ से अधिक खर्च करने के बाद भी रास्ता चलने लायक नहीं है। यहां मानकों के विपरीत निम्न गुणवत्ता के कार्य कराए गए हैं। मनमोहन उनियाल, तीर्थ पुरोहित यमुनोत्री।
पैदल मार्ग पर काम कराने के लिए पानी की जरूरत है। अब मार्ग पर पेयजल लाइन बिछने के साथ आज से ही काम शुरू कराया जा रहा है। किशोर लाल, वन क्षेत्राधिकारी यमुनोत्री।
सौजन्य से : अमर उजाला

Govt approved house for Bidi workers in 2007, They’re still waiting,Pls help…

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Shahida Bano is President of Bidi laborers union in Rewa Madhya Pradesh and says Govt had approved housing for 961 bidi laborers in 2007. The money for the same was also released in 2012 but the laborers are yet to get the houses because of lack of co-ordination between various Govt agencies. You are requested to call Collector at 09425147040 and S.D.M at 09425948788 to help.For more Shahida Ji can be reached at 07580975579 for details click here

APR 15, 2014, BY SHAHIDA BANO

चिकित्सा के नहीं बेहतर इंतजाम बदरीनाथ मार्ग पर भी होगी परेशानी

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यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले अस्पतालों में डाक्टर और संसाधनों की कमी

गढ़वाल। चार धाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी। यात्रा शुरू होने में मात्र 17 दिन शेष बचे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तैयारी कहीं नजर नहीं आ रही है। यात्रा मार्ग पर बने अस्पतालों में डाक्टर और संसाधनों का टोटा बना हुआ है।
उत्तरकाशी। गंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर जिला अस्पताल समेत 19 अस्पताल हैं लेकिन कहीं डाक्टर नहीं है तो कहीं अन्य संसाधनों की कमी बनी हुई हैं। ऐलोपैथिक अस्पताल गंगनानी और कल्याणी में एक भी डाक्टर नहीं है। गंगोत्री-यमुनोत्री धाम में भी अभी तक स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं जुटाई गई। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ सकता है। सीएमओ डा.मयंक उपाध्याय का कहना है कि विभाग यात्रा की तैयारी कर रहा है। यमुनोत्री, जानकीचट्टी में मेडिकल रिलीफ पोस्ट और गंगोत्री में एसएडी खोली जाएगी। इनमें पर्याप्त दवाईयों के साथ ही ऑक्सीजन सिलेंडर रखे जाएंगे। दिल के मरीजों की जांच के लिए रोटेशन पर विशेषज्ञ डाक्टर की मांग की गई है। उम्मीद है कि जल्द यह सुविधाएं और डाक्टर उपलब्‍ध हो जाएंगे। इससे सभी समस्या हल हो जाएंगी।

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केदारनाथ जलप्रलय के बाद रामबाड़ा में दस महीने में भी नहीं बना स्थायी पुल

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रामबाड़ा (केदारनाथ)। जून 2013 में केदारनाथ जलप्रलय के बाद रामबाड़ा में बिजली के पोलों पर बनाए गए अस्थायी पुल से लोगों की आवाजाही होती रही। 2014 के अप्रैल माह में भी ऐसे ही आवाजाही हो रही है। एनआईएम, जल संस्थान और ऊर्जा निगम के मजदूर आज भी कच्चे पुल से निर्माण सामग्री ले जा रहे हैं जिससे यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लोक निर्माण विभाग को यहां स्थायी पैदल पुल के निर्माण का जिम्मा सौंपा गया था, विभाग को 2013 में ही यह काम पूरा करना था लेकिन यहां स्थिति आज भी जस की तस है। जल प्रलय मेेें केदारनाथ पैदल मार्ग जगह-जगह ध्वस्त हो गया था। रामबाड़ा से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर दोबारा आवाजाही की संभावनाएं खत्म हो गई। ऐसे में रामबाड़ा में नदी पार कर दूसरी ओर जाने का विकल्प ही शेष बचा था। त्वरित राहत के लिए ठीक नदी तल से अस्थायी पुल का निर्माण किया गया, लेकिन यह बहुत खतरनाक था। तब इसी स्थान से करीब 20 मीटर नीचे लोनिवि बिजली के पोल, तार और अन्य सामग्री से अस्थायी पुल बनाया। आज भी इसी पुल से आवाजाही हो रही है। यह पुल सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक है।
लोनिवि ने पिछले वर्ष ही यहां नए स्थायी पुल के निर्माण का दावा किया था, लेकिन पुल का निर्माण नहीं किया गया। नवंबर माह में मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। इस साल भी यही स्थिति है। अभी तक पुल की पूरी सामग्री रामबाड़ा तक नहीं पहुंची है। पुल के एबेटमेंट बनाने की रफ्तार बहुत धीमी है जबकि लोनिवि की एक पूरी डिवीजन पैदल मार्ग का निर्माण कार्य देख रही है।
हार्ड रॉक पर नहीं हो रहा पुल निर्माण
रामबाड़ा। इन दिनों मंदाकिनी नदी का जल स्तर काफी कम है, इसके बावजूद पुल के बनाए जा रहे पुस्ते को पानी छू रहा है। बरसात में जब पानी बढे़गा, तब क्या होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। पुल का निर्माण कच्चे स्थान पर किया जा रहा है। जबकि इससे करीब 100 मीटर नीचे मंदाकिनी नदी के दोनोें ओर हार्ड रॉक मौजूद है और नदी भी बहुत नीचे है। यहां पुल निर्माण सुरक्षित हो सकता था।
लोनिवि का हफ्ते में पुल बनाने का दावा
लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता केके श्रीवास्तव ने दावा किया है कि हफ्ते भर में स्थायी पैदल पुल का निर्माण कर लिया जाएगा। स्थायी पुल की ऊंचाई साढे़ चार मीटर और लंबाई 18 मीटर होगी। पुल सुरक्षित होगा। पुराना अस्थायी पुल भी पक्का है। इससे प्रतिदिन 700 लोगों की आवाजाही हो रही है। पुल की निर्माण सामग्री साइट पर पहुंचा दी गई है। एक सप्ताह में पुल का निर्माण हो जाएगा।
(लोनिवि अधिकारियों के दावे के अनुसार अमर उजाला की टीम हफ्ते भर बाद मौके पर पहुंचकर दावे की पड़ताल करेगी और ताजा स्थिति पाठकों को बताएगी।)

अस्थायी पुल से आवाजाही खतरनाक

रामबाड़ा में मंदाकिनी नदी पार करने के लिए बनाए अस्थायी पुल। अभी इन्ही पुलों से आवाजाही हो रही है।

वन विभाग की उदासीनता से अवैध खनन कारोबारियों के हौसले हैं बुलंद

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नालों पर माफिया काबिज
किशनपुर (कोटद्वार)। पुलिस-प्रशासन और वन विभाग की उदासीनता से भाबर क्षेत्र में खनन कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं। भाबर में सनेह से लेकर सिगड्डी तक बड़ी नदियों के साथ ही छोटे बरसाती नालों में धड़ल्ले से खनन चल रहा है। सरकारी मशीनरी खनन रोकने के लिए दावे तो कर रही है, लेकिन धरातल की स्थिति इससे उलट है। खनन कारोबारियों में सरकारी तंत्र का खौफ नजर नहीं आ रहा है। यही वजह है कि भाबर की सड़कों पर दिनरात रेत, बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रालियां दौड़ रही हैं। तेलीसोत जैसे छोटे बरसाती गदेरे में भी खनन शुरू हो गया है। ऐसे में बरसात में भूमि कटाव का खतरा है। सिगड्डी सोत से खनन के लिए ट्रैक्टरवाले चिलरखाल के पास वन विभाग के मार्ग का इस्तेमाल कर रहा है।
सिगड्डी के भूदेवपुर ग्राम के किनारे वन विभाग हाथी सुरक्षा दीवार बना रहा है, जो सिगड्डी सोत से लगा है। विभाग ने नदी में जाने के लिए दीवार के पास ही एक रास्ता बनाया है, जहां से वह दीवार निर्माण के लिए रेत बजरी निकलवा रहा है। इस रास्ते का उपयोग खनन कारोबारी भी करने लगे हैं। सिगड्डी-किशनपुर, हल्दूखाता-सिगड्डी और झंडीचौड़ मार्ग, कण्वाश्रम-मवाकोट-कलालघाटी मार्ग पर दिन रात दौड़ती ट्रैक्टर-ट्रालियों की गड़गड़ाहट ने ग्रामीणों की नींद हराम कर दी है।
खनन कारोबारी अधिकारियों की मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं। यही वजह है कि मौके पर पहुंचने से पहले वे भाग खडे़ होते है। मालन में एक ट्रैक्टर सीज किया गया है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। -जेएस रावत, एसीएफ कोटद्वार।
तहसील प्रशासन अवैध खनन के खिलाफ कई अभियान चला चुका है। जनता की शिकायत पर छापेमारी की जा रही है। नंदपुर में मालन की ओर से हो रहे खनन की जांच कराई जाएगी। -पूरण सिंह राणा, एसडीएम कोटद्वार

सौजन्य से: अमर उजाला

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