कामचलाऊ पुलों से नौ माह में चार लोग गंवा चुके हैं जान
उत्तरकाशी। सरकारी मशीनरी की लापरवाही का खामियाजा जिले के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। बाढ़ में बहे पुलों की जगह जुगाड़ के पुलों से आवाजाही के दौरान नौ महीने में चार लोग जान गवां चुके हैं। कुछ स्थानों पर आवाजाही के लिए लगी ट्राली से भी दर्जनों ग्रामीणों की उंगलियां कट चुकी है। पिछले दो वर्षों की बाढ़ में जिले के अधिकतर गांवों को जोड़ने वाले अस्थायी पुल बह गए थे। गंगा घाटी में नलूणा, डिडसारी, अठाली, संगमचट्टी, जोशियाड़ा तथा यमुनाघाटी में भी कई पुल बाढ़ की भेंट चढ़े। अभी तक इनमें एक भी पुल का निर्माण नहीं हो पाया। ऐसे में ग्रामीणों ने इन स्थानों पर आवाजाही के लिए स्वयं लकड़ी की वैकल्पिक पुलिया बना रखी है, लेकिन इन पर आवागमन करना जान जोखिम में डालने से कम नहीं है। पिछले नौ माह में इन पुलों से नदी में बहने से चार लोगाें की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने हालांकि नलूणा, अठाली, खरादी सहित कई स्थानों पर आवाजाही के लिए ट्राली तो लगा रखी है, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण इनमें दर्जनों लोगों की हाथ की उंगलियां कट चुकी हैं।
केस-1
बीते साल 9 जुलाई भंकोली गांव की 17 वर्षीय अंजना पिता के साथ राशन लेकर घर जा रही थी। इस दौरान संगमचट्टी में लकड़ी की पुलिया से पांव फिसलने से अंजना नदी के तेज बहाव में बह गई। इस स्थान पर स्थायी पुल 2012 की बाढ़ में बह गया था, लेकिन अभी तक पुल नहीं बन पाया।
केस-2
बीते साल छह अगस्त को भेटियारा गांव का सात वर्षीय अमन स्कूल जा रहा था। पनियार गदेरे पर बनी वैकल्पिक पुलिया से पांव फिसलने पर वह पानी के तेज बहाव में बह गया। इस स्थान पर भी अभी तक पुल का निर्माण नहीं हो पाया।
केस-3
यमुनाघाटी के बडियार गाड पर बना पुल भी वर्ष 2010 की बाढ़ में बह गया था। यहां आवाजाही के लिए बनी वैकल्पिक पुलिया से अब तक तीन लोगाें की मौत हो चुकी है। इसी साल फरवरी माह में पंचाणगांव के प्रेमदास तथा गत मंगलवार को गंगटाडी के रणवीर दास की इसी पुल से पांव फिसलने से मौत हुई। जिले में सभी पुलों के निर्माण की कार्रवाई चल रही है। जिन विभागों के पास बजट नहीं है। उनके लिए बजट की व्यवस्था की गई। गंगाघाटी के 14 पुलों का निर्माण एनबीसीसी कर रही है।
-श्रीधर बाबू अद्दांकी, डीएम उत्तरकाशी।
अस्सी गंगा घाटी में पुलों का निर्माण कछुआ गति से चल रहा है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर लकड़ी के पुलों से आवाजाही कर रहे हैं। यदि समय पर पुल नहीें बनते हैं तो इस बार घाटी के आधा दर्जन गांव अगल-थलग पड़ जाएंगे।
-कमल सिंह रावत, निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य।
नाल्ड क्षेत्र के ग्रामीण इस तरह करते हैं आवागमन। (फाइल फोटो)
Courtesy: amarujala.com
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