रुद्रप्रयाग। पिछले वर्ष की आपदा से क्षतिग्रस्त केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग दोबारा से 21 बीआरटीएफ (बार्डर रोड टास्क फोर्स) जोशीमठ के हवाले होने जा रहा है। नए वित्तीय वर्ष अप्रैल माह से रुद्रप्रयाग-केदारनाथ एनएच-109 की देखरेख 36 बीआरटीएफ उत्तरकाशी नहीं करेगी। यह निर्णय राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय बनाने और उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के बीच अधिक दूरी को देखते हुए लिया गया है।
करीब 12 साल पूर्व केदारनाथ मोटर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा देते हुए इसे लोनिवि से बीआरओ/ग्रिफ (जनरल रोड इंजीनियरिंग फोर्स) को सौंप दिया गया था। दो साल पूर्व तक इस मार्ग को 21 बीआरटीएफ जोशीमठ की 66 आरसीसी (सड़क निर्माण इकाई) गौचर देख रही थी। लेकिन अचानक इसे 200 किलोमीटर दूर 36 बीआरटीएफ को सौंप दिया गया। तब से 1442 बीसीसी (पुल निर्माण इकाई) उत्तरकाशी एनएच की देखरेख करती आ रही है। बीआरओ के इस निर्णय पर उस समय सवाल भी उठे थे। क्योंकि गौचर रुद्रप्रयाग से सिर्फ 22 किमी दूर है। 21 बीआरटीएफ के ओसी गौचर में और कमांडर जोशीमठ में बैठते हैं। जबकि 36 बीआरटीएफ के कमांडर और ओसी दोनों ही उत्तरकाशी बैठते हैं। जो रुद्रप्रयाग से ठीक विपरीत दिशा में हैं। जून माह में आई आपदा में भी यह दूरी काफी खली थी। उत्तरकाशी से मशीनरी, मजदूर और अधिकारियों को आने में वक्त लग गया। साथ ही प्रशासन और शासन से समन्वय में भी काफी दिक्कतें हुई। कई बार उत्तरकाशी के अधिकारी प्रदेश शासन के अधिकारियोें के साथ मीटिंग में नहीं पहुंच पाए। यही वजह रही कि बीआरओ ने दोबारा से इसको जोशीमठ के हवाले करने का फैसला लिया।
रामबाड़ा तक मार्ग 30 अप्रैल तक होगा तैयार
रुद्रप्रयाग। जिला प्रशासन ने 30 अप्रैल तक केदारनाथ पैदल मार्ग को रामबाड़ा तक सुगम और सुरक्षित करने का दावा किया है। काम में और तेजी आए, इसके लिए जिलाधिकारी डा. राघव लंगर ने स्वयं रामबाड़ा तक पैदल मार्ग का निरीक्षण किया।
आपदा से क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग का सोनप्रयाग से रामबाड़ा तक लोनिवि और रामबाड़ा से ऊपर केदारनाथ तक एनआईएम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी के मजदूर मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य कर रहे हैं। लोनिवि ने 10 किमी के पैच में 550 मजदूर काम पर लगाए गए हैं। जबकि रामबाड़ा में मंदाकिनी नदी की दूसरी ओर एनआईएम के 109 मजदूर काम कर रहे हैं। रामबाड़ा से करीब साढे़ तीन किमी ऊपर छोटा लिनचोली में 70 मजदूर मार्ग खोलने में जुटे हुए हैं। रामबाड़ा और छोटा लिनचोली के बीच तीन स्थानों पर ग्लेशियर हैं। मजदूरों ने यहां बर्फ हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन ऊपर से बर्फ दोबारा रास्ते में आ रही है। बर्फ को स्थायी रुप से हटाने के लिए अब बर्फ काटने की मशीन मंगवाई जा रही है। डीएम डा. राघव लंगर ने बताया कि लोनिवि ने रामबाड़ा तक मार्ग लगभग खोल दिया है। गौरीकुंड से आगे दो स्थानों में स्लाइड है। यहां स्थायी मार्ग बनाया जा रहा है। लोनिवि अन्य सुधारीकरण कार्य कर रही है।
अभी तक उत्तरकाशी से होता था देखरेख का काम
वित्तीय वर्ष 2013-14 की समाप्ति के बाद देखेगी आरसीसी
कंट्रोलिंग और प्रशासन के साथ समन्वय की समस्या हो रही थी। उत्तरकाशी से अधिकारियों को आने-जाने में दिक्कत हो रही थी। लंबे समय से यह फेरबदल चल रहा था। काम तो वही है, सिर्फ डिवीजन चेंज हो रही है। – बिग्रेडियर केके राजदान, चीफ इंजीनियर बीआरओ
डीएम ने किया पैदल मार्ग का स्थलीय निरीक्षण
गौरीकुंड-केदारनाथ यात्रा पैदल मार्ग की मरम्मत करते लोनिवि के मजदूर।
Courtesy: अमर उजाला ब्यूरो
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