आपदा से क्षतिग्रस्त योजनाओं की नहीं हुई मरम्मत
उत्तरकाशी। देश-विदेश से गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए आने वाले तीर्थ यात्रियों को इस बार पीने के पानी के लिए तरसना पड़ेगा। कारण आपदा के दौरान यात्रा मार्ग की 72 योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिनमें से 23 योजनाएं जुगाड़ से चल रही है।
गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट दो मई को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ के लिए खुल जाएंगे, लेकिन इन धामों में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ेगा। दोनों धामों की पेयजल योजनाएं बीते साल बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गई थी, जो अभी तक दुरुस्त नहीं हो पाई। इसके अलावा यात्रा मार्ग पर पड़ने वाली 72 में से 23 योजनाएं वैकल्पिक व्यवस्था से चल रही है। यदि इनके मुख्य स्रोत तथा पाइप लाइन पर काम नहीं होता है, तो गर्मियों के दौरान इन पर पानी चलना संभव नहीं है। यमुनोत्री पैदल मार्ग पर जानकीचट्टी से लेकर यमुनोत्री तक सात टीटीएफसी (टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट) बंद पड़े हुए हैं। हालांकि जल संस्थान ने यात्रा मार्ग पर पेयजल योजनाओं की मरम्मत तथा बंद पड़ी टीटीएफसी की मरम्मत के लिए शासन से 47 लाख रुपये की मांग की है, लेकिन अभी तक बजट नहीं मिल पाया।
जुगाड़ से आपूर्ति
72 में से 23 योजनाएं चल रही है जुगाड़ से
गंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर पेयजल योजनाओं की मरम्मत के लिए बजट की मांग की गई, लेकिन अभी तक बजट नहीं मिल पाया। यात्रियों की सुविधा को देखते हुए 30 अप्रैल तक योजनाओं को हर हाल में दुरुस्त कर दिया जाएगा। -आरएस नेगी, अधिशासी अभियंता जल संस्थान। गंगोत्री धाम में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार की यात्रा शुरू होने के लिए अब कम समय ही बचा है। इसलिए जल संस्थान को समय पर पेयजल योजना को दुरुस्त करने का काम करना चाहिए।
-रजनीकांत सेमवाल, कोषाध्यक्ष गंगोत्री मंदिर समिति।

Courtesy: अमर उजाला ब्यूरो
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