रुड़की/भगवानपुर। प्रशासन की चुनावी व्यस्तता का खनन माफिया पूरा फायदा उठा रहे हैं। कार्रवाई का डर न होने कारण कहीं पट्टे की आड़ में खनन किया जा रहा है तो कहीं बेखौफ होकर नदियों का सीना छलनी किया जा रहा है। इन दिनों प्रशासन लोकसभा चुनाव कराने की कवायद में जुटा है। तहसील के अधिकारियों को भी चुनाव संबंधी बैठकों के लिए आए दिन हरिद्वार जाना पड़ रहा है। प्रशासन की व्यस्तता का माफिया फायदा उठा रहे हैं। छापेमारी न होने के कारण माफिया बेखौफ होकर खनन कर रहे हैं। बुग्गावाला के घाड़ क्षेत्र की बात करें तो यहां पट्टे की आड़ में जमकर खनन हो रहा है। पट्टे के सहारे माफिया नदियों के सीना छलनी कर रहे हैं। इसके अलावा रात के समय माफिया जेसीबी से मोहंड-रो एवं सूक नदी में खनन कर रहे हैं। अवैध खनिज सामग्री स्टोन क्रशरों पर ठिकाने लगाई जा रही है। वहीं, लक्सर क्षेत्र में गंगा और बाण गंगा में कई जगह पर अवैध खनन हो रहा है। टांडा महतौली, रायसी, निहंदपुर सुठारी, बड़ीटीप, भोगपुर, टांडा भागमल आदि के घाटों पर बड़े पैमाने खनन किया जा रहा है। भगवानुपर, शाहपुर, रामपुर, किशनपुर, सालियर, पुहाना आदि क्षेत्रों से गुजर रही सोलानी नदी से भी माफिया खनिज सामग्री उठा रहे हैं। उधर, एडीएम वित्त हरक सिंह रावत का कहना है कि अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा। इस बाबत सभी एसडीएम को निर्देश दिए जाएंगे। छापेमारी न होने से बड़े पैमाने पर किया जा रहा नदियों का सीना छलनी.
भागीरथी से खतरा टला नहीं
शर्तों के विपरीत हो रहा नदी को चैनलाइज करने का काम -सूरत सिंह रावत
उत्तरकाशी।
बाढ़ में आए रोड़ी, बजरी और पत्थर को लुटाने में सहयोगी रुख अपनाने के कारण प्रशासन का भागीरथी को चैनलाइज करने का काम अभी एक चौथाई भी पूरा नहीं हो पाया है। जलागम क्षेत्र में जमा मलबे के ढेर तथा सैकड़ों सक्रिय भूस्खलन के कारण बालू के टीले खड़े कर बेगवती भागीरथी को चैनलाइज कर उसके बहाव को आबादी क्षेत्र से दूर रखने के सरकारी अमले की कोशिश पर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने असीगंगा तथा भागीरथी में जमा 10.04068 लाख घन मीटर मलबा 9.3066120 रुपये में बेचने के लिए निविदाएं जारी की। नगर क्षेत्र में 399006 घन मीटर जमा रेत, बजरी, रोड़ी एवं पत्थर उठाने में ही कुछ लोगों ने दिलचस्पी दिखाई। इन्हें न्यूनतम 90 रुपये घनमीटर की दर से नीलाम कर उपखनिज को देने के साथ ही नदी को कुल स्पान के बीचों-बीच 50 प्रतिशत हिस्सों में नदी को चैनलाइज करने की शर्त रखी गई है। स्थिति यह है कि बाढ़ से भागीरथी का स्पान 160 मीटर हो गया है। 40-40 मीटर दाएं और बाएं हिस्से को छोड़कर बीच में 80 मीटर हिस्से में नदी को चैनलाइज करने के बजाय कुल 15 मीटर ही रेत के टीलों के बीच में निकाला जा रहा है। कार्यदायी ऐजेंसियों का सारा ध्यान सुरक्षा दीवार तथा अवैध बिक्री के लिए रेत, बजरी तथा पत्थर को रात-दिन काम कर सुरक्षित डंप किया जा रहा है। गंगोरी से भागीरथी के डाउन स्ट्रीम में बाढ़ सुरक्षा कार्य सुस्त रफ्तार चल रहा है। बाढ़ नियंत्रण के जानकारों का कहना है कि यदि बरसात से पहले सुरक्षा दीवार का कार्य अधूरा छूटा तो भागीरथी में आने वाली गाद कुछ ही घंटों में चैनलाइज किए गए भागीरथी के रिवर बेड को पाट कर पानी तटवर्ती हिस्सों में फैलकर तबाही मच सकता है। तेज ढाल वाली भागीरथी जहां बाहर की ओर मुड़ेगी वहां से कटाव कर मलबा अंदर की ओर मुड़कर समतल हिस्से में जमा करती है। ऐसी स्थिति में बाजार तथा जोशियाड़ा, तिलोथ, मांडों के कई हिस्से खतरे की जद में आ सकते हैं। नदी में मलबा हटाने के लिए छह ठेकेदारों का 31 मई तक अनुबंध हो रखा है। कई जगहों पर अभी मलबा नहीं हट पा रहा है। नदी को चैनलाइज करने का काम भी अधूरा है। -देवेंद्र पटवाल, आपदा प्रबंधन अधिकारी।
अनुबंध में नदी के स्पान के बीचों-बीच आधे हिस्से को चैनलाइज करने की व्यवस्था है। इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी तथा समय पर मलबा हटाकर नदी को चैनलाइज करने का काम किया जा रहा है।
डा.एसके बरनवाल, डिप्टी कलक्टर (आपदा)।
अमर उजाला ब्यूरो
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