नदी के कटाव से 700 की आबादी प्रभावित

रुद्रप्रयाग। मद्महेश्वर घाटी में लगातार हो रही बारिश से बेडुला व सरुणा के ग्रामीण खौफजदा हैं। कारण इन गांवाें के नीचे मधुगंगा नदी पर बनी झील। दो माह पूर्व बेडुला गांव के नीचे भूस्खलन होने से मधुगंगा नदी का प्रवाह रुकने के कारण झील बन गई थी, जो अभी तक बनी हुई है। यदि सरुणा गांव के नीचे से भी भूस्खलन शुरु होता है तो इससे स्थिति खतरनाक हो सकती है। दो माह पूर्व तहसील ऊखीमठ के अंतर्गत बेडूला गांव के नीचे भूस्खलन से मधुगंगा ने छोटी झील का आकार ले लिया था। जिस कारण नदी की चौड़ाई के 10 फीसदी हिस्से पानी निकल रहा था। जिससे यहां पर करीब 150 मीटर लंबी, 30 मीटर चौड़ी और सात मीटर गहरी झील बन गई थी। मामला संज्ञान में आने पर जिला प्रशासन ने राजस्व, सिंचाई और भू-वैज्ञानियों की टीम से झील का सर्वेक्षण कराया। तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद डीएम डा. राघव लंगर ने सिंचाई विभाग को झील के जल अवरोध हटाने, टो इरोजन रोकने के लिए टो सपोर्ट लगाने के लिए इस्टीमेट बनाने के निर्देश थे। लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। ग्रामीण दौलत सिंह पंवार ने बताया कि घाटी में आए दिन रुक-रुककर हो रही बारिश से ग्रामीण खौफजदा हैं। बारिश तेज आने पर अनहोनी की आशंका बनी हुई है। एसडीएम ऊखीमठ उत्तम सिंह चौहान ने बताया कि ट्रीटमेंट के लिए सिंचाई विभाग को निर्देश दिए गए थे। वहीं उनके स्तर से स्थानीय ग्रामीणाें के साथ अधिकारियाें की टीम बनाई गई है जो नियमित निरीक्षण कर रही है। सिंचाई विभाग के ईई बीएस यादव ने बताया कि झील से पानी का प्रवाह निरंतर जारी है। फिलहाल इससे कोई खतरा नहीं है।
कर्णप्रयाग। जून 2013 की आपदा में पिंडर और अलकनंदा ने सुभाषनगर के मुख्य बाजार और शक्तिनगर पर इतना कहर बरपाया कि इन बस्तियों की बुनियाद ही खोखली हो गई। लेकिन यहां पुनर्निर्माण के हाल यह हैं कि कहीं सुरक्षा कार्यों के लिए धनराशि ही नहीं मिल पाई हैं। अब आने वाली बरसात में वार्ड के 700 लोगों को सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। अलकनंदा नदी से लगातार कटाव से शक्तिनगर वार्ड को खतरा बना है। प्रमोद, विजय खंडूड़ी, मथुरा कोठियाल और आशाराम पुरोहित आदि ने कहा कि बाढ़ में नदी ने मोहल्ले की तलहटी में भारी कटाव किया। साथ ही पुराने चेक डैम तो क्षतिग्रस्त हो गए और मलबे से भरे हैं। यही बरसात में कहर बरपाएगा। किशोरी रतूड़ी ने कहा वार्ड की जनसंख्या को सुरक्षा की चिंता सता रही है। दिनेश थपलियाल ने कहा प्रशासन और सिंचाई विभाग से सुरक्षा दीवार बनाने की मांग की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इस्टीमेट बढ़ा पर नहीं मिला पैसा. मुख्य बाजार और सुभाषनगर के सुरक्षा कार्यों के लिए सिंचाई विभाग ने पहले दो योजनाओं के लिए तकरीबन 84 लाख का इस्टीमेट शासन को भेजा, लेकिन धन न मिलने से काम लटका रहा। अब सीएम बदलने के बाद फिर विभाग ने दो योजनाओं को एक करते हुए तीन करोड़ का इस्टीमेट बनाया, लेकिन सुरक्षा कार्यों के लिए अब भी इंतजार ही है। जेई राजेश कुमार के अनुसार योजना स्वीकृत है जल्द काम शुरू होगा।
हमारी कुछ योजनाएं तकनीकी सलाहकार समिति में नहीं आ पाई हैं। जल्द योजनाओं को समिति की बैठक में रखकर आगणन तैयार किया जाएगा। – जगदीश थपलियाल सहायक अभियंता उपखंड कार्यालय सिंचाई कर्णप्रयाग।
Courtesy: अमर उजाला ब्यूरो
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