वन विभाग के धरमूचक गेट में अनियमितता का मामला
देहरादून। वन विकास निगम के धरमूचक गेट में अनियमितता में शामिल अफसरों, कर्मचारियों के राज एक रजिस्टर खोल सकता है। एंटी माइनिंग विजिलेंस टीम ने 14 मार्च को मौके पर छापा मारने के बाद यह रजिस्टर और कई अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए थे। सूत्रों के मुताबिक इस रजिस्टर में उन नौकरशाहों के नाम दर्ज हैं, जिन तक घपले की रकम पहुंचाई गई। ठीक से जांच हुई तो कई वरिष्ठ अफसरों पर गाज गिर सकती है। 12 फरवरी को एंटी माइनिंग विजिलेंस टीम के मुखिया संजय गुंज्याल के नेतृत्व में धरमूचक गेट पर छापेमारी की गई थी। अनियमितताएं सामने आने के बाद डोईवाला थाने में केस दर्ज कर जांच सीओ सदर अरुण कुमार पांडे को दी गई। दूसरी ओर, वन विकास निगम ने भी विशेष जांच समिति टिहरी के क्षेत्रीय प्रबंधक एमएस पाल की अध्यक्षता में गठित की, जिसमें नरेंद्र चौधरी और एसके चतुर्वेदी भी सदस्य हैं। विशेष टीम ने 14 मार्च को फिर धरमूचक सहित कई गेटों पर छापेमारी की। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस टीम को एक ऐसा संदिग्ध रजिस्टर एक गेट पर मिला, जिसमें कई नौकरशाहों के नाम और हर नाम के आगे उन्हें दी गई रकम का पूरा ब्योरा दर्ज है।
वन विकास निगम ने इस मामले पर धरमूचक गेट के दो स्केलर और एक सेक्शन आफिसर को फिलहाल जांच की वजह से कार्य से विरत कर दिया है। बताया जा रहा है कि निगम के खनन में बड़े खेल हो रहे हैं, जिसमें तमाम कर्मचारियों के अलावा कुछ सफेदपोश भी शामिल हो सकते हैं।
वन विकास निगम की विशेष जांच टीम ने छापा मारकर जब्त किया रजिस्टर और अन्य दस्तावेज
सूत्रों के मुताबिक दर्ज हैं कई अफसरों के नाम और उन्हें दी जाने वाली रकम का पूरा ब्योरा
अभी जांच चल रही है। काफी बड़ी संख्या में दस्तावेज जब्त किए गए हैं। रजिस्टर में लिखी गई जानकारी को क्रास चेक करने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है।
-एमएस पाल, क्षेत्रीय निदेशक, वन विकास निगम, टिहरी मामले में कुछ गवाहों के बयान हो चुके हैं। पुलिस की जांच तेजी से चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही जांच का नतीजा सामने आ जाएगा।
-अरुण कुमार पांडे, सीओ सदर

Courtesy: अमर उजाला ब्यूरो
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