देहरादून। आपदा से जख्मी हुए केदारनाथ धाम को अभी उद्धार के लिए सालों का इंतजार करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो यह मियाद तीन साल से भी अधिक हो सकती है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आईआईटी चेन्नई ने, जिसे इमारत के पुनरुद्धार का जिम्मा सौंपा गया है, महज रिपोर्ट तैयार करने के लिए डेढ़ साल का समय मांगा है।
आर्कियोलाजी सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) के नई दिल्ली स्थित महानिदेशक कार्यालय से हेरिटेज भवनों के संबंध में विशेषज्ञता को देखते हुए आईआईटी चेन्नई को स्ट्रक्चर एनालिसिस और रेट्रोफिटिंग के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। इस 67 लाख रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है और राशि भी जल्द ही अवमुक्त हो जाएगी। विशेषज्ञों के मुताबिक अभी तो काम शुरू भी नहीं हुआ है। केदारनाथ मंदिर के कपाट आने वाली पांच मई को खुलने हैं। इसके बाद ही काम शुरू होगा। अगर डेढ़ साल के नियत समय में रिपोर्ट आ जाती है तो फिर रिपोर्ट में सुझाए गए विकल्पों पर माथा-पच्ची के बाद ही इसके पुनरुद्धार पर कदम आगे बढ़ सकेगा। आईआईटी की तकनीकी पेंचों से भरी रिपोर्ट पर पूरी तरह अमल भी सामान्य मजदूरों, श्रमिकों के साथ एक बड़ी चुनौती होगा।
यह भी चुनौतियां
आने वाली 15 अप्रैल को कमेटी की पहली टीम परिसर के अवलोकन के लिए जाएगी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के रुख को देखते हुए आगामी 20 अप्रैल तक सड़कों को बनाए जाने का दावा जरूर किया है, लेकिन हालात देखते हुए यह कार्य तकरीबन नामुमकिन दिखाई देता है। ऐसे में मंदिर परिसर तक लाजिस्टिक सपोर्ट बेहद मुश्किल है। कार्विंग (पत्थरों को खास तरीके से तराशना) के लिए स्किल्ड लेबर राजस्थान से आती है। केदारनाथ के पूर्वी द्वार की स्थिति को देखते हुए एक वक्त में 12 से अधिक श्रमिकों की जरूरत होगी। इन्हें अपने काम में तकरीबन एक महीने से अधिक वक्त लगेगा। वह भी तब, जब राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त श्रमिकों की व्यवस्था की जाए। इस संबंध में अभी कोई योजना नहीं।
महज रिपोर्ट तैयार करने के लिए डेढ़ साल मांगा आईआईटी चेन्नई ने
केदारनाथ में कपाट खुलने के बाद पहले दौर में स्ट्रक्चर को नहीं छेड़ा जाएगा, वह काम आईआईटी चेन्नई को करना है। हम फ्लोरिंग के साथ ही भीतर के कार्य को पूरा करने की कोशिश करेंगे। सड़कों, तकनीकी सपोर्ट परिस्थितियों को देखते हुए स्ट्रक्चर के काम में सालों लगने स्वाभाविक हैं।
– अतुल भार्गव, अधीक्षण पुरातत्वविद्, एएसआई (दून सर्किल)
अमर उजाला ब्यूरो
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