अब पहाड़ पर भी जांची जाएगी नदियों की सेहत

देहरादून। अब पहाड़ पर भी नदियों की सेहत जांची जाएगी। नदियों के लिए पहाड़ों को महफूज मानते हुए अभी तक ऋषिकेश से पहले पानी की जांच नहीं होती थी। लेकिन, यह धारण गलत साबित होने के बाद केंद्रीय जल आयोग ने प्रदेश में पांच मानिटरिंग स्टेशन स्थापित करने का फैसला लिया है। केंद्रीय जल आयोग फिलहाल अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी का वॉटर लेवल ही चेक करता है। इन नदियों के पानी की शुद्धता पर कोई सवाल नहीं था। माना जाता था कि ऋषिकेश के बाद ही पानी में प्रदूषण बढ़ता है। लेकिन आपदा के बाद केंद्र सरकार की टीम के सर्वेक्षणों में इन नदियों के पानी की क्वालिटी पर खतरा पाया गया। पहाड़ों पर नदियों में प्रदूषण बढ़ा तो मैदानी इलाकों में स्थिति और खराब होगी। इसलिए आयोग ने देश के अलग-अलग हिस्सों में नदियों में बढ़ रहे प्रदूषण पर नजर रखने का का निर्णय लिया है। इसकी शुरुआत उत्तराखंड से होगी। श्रीनगर और हरिद्वार में नए मॉनीटरिंग स्टेशन मई में चालू कर दिए जाएंगे। साथ ही उत्तरकाशी, देव प्रयाग और टिहरी के मॉनीटरिंग स्टेशनों को अपडेट किया जाएगा। 

अभी ऋषिकेश से पहले नहीं होती है नदियों के पानी की जांच
बोर्ड 28 वाटर मॉनीटरिंग स्टेशन संचालित कर रहा है। पहाड़ पर नदियों के किनारे बन रहे होटलों, फार्म हाउस आदि के संबंध में एनओसी नहीं ली है। बोर्ड इन्हें नोटिस जारी करेगा। -विनोद सिंघल, सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

रियल इस्टेट कारोबार से बढ़ रहा खतरा

पहाड़ी नदियों में प्रदूषण बढ़ने का एक बड़ा कारण रियल इस्टेट कारोबार है। बाहर की कंपनियां बड़े पैमाने पर पहाड़ पर नदियों के किनारे होटल, मल्टीप्लैक्स, फार्म हाउस आदि बना रही हैं। इससे नदियों में प्रदूषण बढ़ रहा है। बैराज बनने से भी पानी की क्वालिटी पर फर्क पड़ने का अंदेशा है। जानकारी के अनुसार इस समय मुंबई, दिल्ली, पश्चिम बंगाल की 12 कंपनियां अलग-अलग माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों में रियल इस्टेट विकसित करने में बड़ा निवेश कर रही हैं। इन क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों से कमाई करने के चक्कर में ये नदियों के किनारे की जमीन हथियाने में लगी हैं। बाहरी कंपनियों के बजाए सरकार प्रदेश की कंपनियों को बढ़ाने में प्रोत्साहन दे। स्थानीय बिल्डर पर्यावरण को ध्यान में रखकर काम करेंगे।
-राज लुंबा, बिल्डर
इसी अंदेशा को भांप कर बीसी खंडूड़ी सरकार ने बाहरी लोगों के जमीन खरीदने पर सख्ती की थी। सरकार ने तय किया था कि बाहरी लोग 250 गज तक ही जमीन खरीद सकते हैं।
-हरबंस कपूर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष
नदियों के किनारे वाणिज्यिक संस्थान और आवासीय क्षेत्र अधिक होने से प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
-अमरजीत ओेबेराय, पर्यावरण अधिकारी
Courtesy: अमर उजाला ब्यूरो
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