नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तराखंड सरकार को प्राकृतिक आपदा की शिकार केदार घाटी और उसके आसपास के क्षेत्रों मेें बिजली, सड़क और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था जल्द सुचारु करने का आदेश दिया। गत वर्ष जलप्रलय के बाद केदारनाथ धाम और उसके आसपास के क्षेत्र तबाह हो गए थे। सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि जिस गति मेें कार्य चल रहा है, वह काफी नहीं है। प्रदेश सरकार लोगों को राहत देने के लिए तेज गति से कार्य संपन्न कराए।
जस्टिस एके पटनायक की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता जयप्रकाश की ओर से पेश हुए अधिवक्ता बीके पाल से पूछा कि केदार घाटी मेें बिजली, सड़क समेत अन्य व्यवस्थाएं किस स्तर तक पहुंची। जवाब मेें उन्होंने कहा कि अभी तक तमाम गांवों तक सड़क नहीं पहुंची है और बिजली की स्थित भी ऐसी ही है। पीठ ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि राज्य सरकार अब तक कार्य पूरा क्यों नहीं करा सकी। अधिवक्ता ने कहा कि इस साल के मई तक सड़क और अक्तूबर तक बिजली केदार घाटी और उससे सटे इलाकों तक पहुंचाने का कार्य पूरा हो जाएगा। जवाब से असंतुष्ट पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को कम से कम बिजली, सड़क और मूल सुविधाओं को मुहैया कराने मेें तेजी दिखानी चाहिए। सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि केदार घाटी और उसके आसपास के क्षेत्रों तक तभी सुविधाएं पहुंचेगी, जब सड़क बनी हो। बिना इसके तो परिवहन भी सुचारु नहीं हो सकेगा। इसलिए राज्य सरकार इन दोनों के लिए तेज गति से काम कराए और 27 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई मेें अदालत को सूचित करे। याद रहे कि इस जलप्रलय की वजह से गत वर्ष पूरे राज्य को बड़ी आपदा का सामना करना पड़ा। केदार घाटी मेें भी सड़क, बिजली समेत अन्य सुविधाएं ध्वस्त हो गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, बिजली, सड़क की व्यवस्था जल्द करे राज्य सरकार
शीर्ष अदालत में 27 अप्रैल को मसले की अगली सुनवाई
वाकई सुस्त चाल
देहरादून। केदारघाटी में पुनर्निर्माण की चाल वाकई सुस्त है। केदारघाटी की सड़कें खोलने के लिए पहले 30 अक्तूबर 2013 तक की डेटलाइन तय थी लेकिन आज भी रुद्रप्रयाग-गुप्तकाशी मार्ग पर सोनप्रयाग से आगे की सड़क कटी हुई है। सड़क खोलने में असफल रही सरकार ने अब डेटलाइन 15 अप्रैल तय कर दी है। इसमें भी एक माह का ही समय बचा है, लेकिन अभी तक पुनर्निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका।
Courtesy: Amar Ujala
Advertisements