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आगे बढ़ी कवायद, विस्‍थापन जल्द

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21 गांवों का हुआ भू-सर्वेक्षण,
40 गांवों के विस्थापन के लिए प्रशासन ने शासन को भेजा पत्र
नई टिहरी। जिले के आपदा प्रभावितों को अब नई जमीन पर घर बनाने के लिए रिपोर्ट का इंतजार है। भिलंगना ब्लाक के आपदा ग्रस्त 61 में से 21 गांवों का भू-सर्वेक्षण हो चुका है। शेष 40 के लिए प्रशासन की ओर से शासन को पत्र भेजा गया है। जिले के भिलंगना और देवप्रयाग ब्लॉक में आपदा से प्रभावित गांवों के लिए पूर्व में ही गांव के आसपास विस्थापन को सुरक्षित भूमि का चयन किया गया था, लेकिन वर्षों से चयनित भूमि का सर्वेक्षण नहीं हो पाया था। इनमें सबसे ज्यादा भिलंगना प्रखंड के आठ गांव शामिल हैं। बीते अक्तूबर माह से आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन के लिए चयनित भूमि का सर्वेक्षण कार्य अब पूरा हो चुका है। 21 गांवों की भूगर्भीय रिपोर्ट और विस्थापन वाले नए स्थानाें की रिपोर्ट जिला प्रशासन को मिल चुकी है। भिलंगना ब्लाक के सबसे संवेदनशील इंद्रौला गांव के विस्थापन को प्रशासन ने गांव से पांच किमी दूर भूमि तलाश की है, लेकिन ग्रामीण उस स्थान पर जाने को तैयार नहीं है। इसका कारण सड़क का अभाव और पानी की किल्लत बताई जा रही है। प्रशासन ने गांव के लोगों को मामले में आपसी सहमति बनाने को कहा है। सहमति नहीं बनने की स्थिति में गांव के विस्थापन को दूसरे स्थान का विकल्प तलाशना होगा।
इनकी आ चुकी है सर्वेक्षण रिपोर्ट
मेड़, मरवाड़ी. कैंडीद, अगुंडा. बरील पोखरी तोक, पिंसवाड, नरसिंगधार, ओडुपोखरी, कोटी, बागा, बडियारकुड़ा, इंद्रौला, गौनियालखंड, घंडियालधार
जून 2013 से पूर्व के भूस्खलन वाले गांवों के विस्थापन करने के लिए गांव के ही आसपास ही भूमि का चयन किया गया है। चयनित भूमि का भू-गर्भीय सर्वेक्षण की प्रक्रिया जारी है। लगभग 21 गांवों की सूची मिल चुकी है। विस्थापन की कार्रवाई जल्द शुरू की जाएगी।
– प्रवेश डंडरियाल, एडीएम टिहरी

Courtesy: अमर उजाला ब्यूरो
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सुरक्षा कार्य के लिए खनन, नतीजा खतरनाक

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बड़कोट। आपदा से प्रभावित खरादी कस्बे में इन दिनों सुरक्षा कार्य चल रहे हैं। इन कामों के लिए नदी से जिस तरह खनन हो रहा है, उससे सुरक्षा के बजाय कस्बे पर खतरा बढ़ गया है। यही नहीं राजमार्ग पर बने पुल के भी खतरे की जद में आने से यमुनोत्री का संपर्क भी प्रभावित हो सकता है।
बीते दो वर्षों की बाढ़ में तबाह हुए खरादी कस्बे तथा स्यानाचट्टी के पास बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए केंद्र सरकार से 11 करोड़ स्वीकृत हुए हैं। राजमार्ग निर्माण खंड की ओर से कस्बे की सुरक्षा के लिए काम किया जा रहा है, लेकिन सुरक्षा कार्यों के लिए पत्थर, बजरी और रोड़ी का खनन यमुना नदी से ही किया जा रहा है। ऐसे में सुरक्षा के बजाय कस्बे पर खतरा ही मंडरा रहा है। उपली खरादी में तो खनेड़ा स्लिप जोन पर राजमार्ग की दीवार तोड़कर जेसीबी मशीन यमुना में पहुंचाकर खनन किया जा रहा है। खनन से यमुनोत्री राजमार्ग पर बने मोटर पुल को खतरा पैदा हो गया है। आपदा प्रभावित खनेड़ा गांव निवासी मुलकराज राणा का कहना है कि बीते वर्षों में हुए खनन से खनेड़ा तथा खरादी कस्बे में तबाही मची और अब भी विभाग बाज नहीं आ रहा है। बाढ़ सुरक्षा के नाम पर ऐसे ही खनन हुआ, तो यमुनोत्री हाईवे पर बने पुल के साथ ही खरादी कस्बे का शेष भाग भी तबाह हो जाएगा। उन्होंने बेतरतीब ढंग से हो रहे खनन को रोकने की मांग की है। बाढ़ सुरक्षा कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बरसात से पहले कार्य पूरे करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यमुना नदी में हो रहे खनन को रोका जाएगा। – देवमूर्ति यादव, एसडीएम बड़कोट।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मानकों के अनुरूप बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं। अवैध खनन की कोई बात नहीं है। – दिनेश कुमार बिजल्वाण, ईई एनएच निर्माण खंड बड़कोट।
Courtesy: amarujala.com

Coalgate: CBI to submit reports to CVC after “in-house difference of opinion”

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The CBI will on Monday submit reports on investigations against 20 companies, as part of the preliminary enquiries instituted into the coal block allocations scam to the Central Vigilance Commission (CVC), for a review following a Supreme Court directive.

“These reports are being sent to the CVC in sealed cover for perusal, as there was a difference of opinion between the investigating officers and the headquarters over sufficiency of evidence in going ahead with the prosecution proceedings in these cases,” said an official.

A couple of days ago, the court had directed the CVC to review the 20 cases, asking the CBI to submit the reports to the Commission within five days.

The apex court has also asked the CVC to review the cases against two companies — Vikas Metals Private Limited and Kamal Sponge and Power Private Limited — in which the CBI has filed closure reports.

This after the CBI Deputy Inspector-General Ravi Kant Sharma, who is supervising investigations into the coal block allocation cases, submitted before the Supreme Court that he wanted to file charge sheets against the two companies. The probe against 20 other firms under scrutiny for alleged irregularities in allotment of coal blocks was closed despite some officials’ opinion that it should have been carried further.

Accordingly, the Supreme Court directed the CVC to look into these cases and submit its recommendations within four weeks. The CBI has so far registered five preliminary enquiries, including the two in connection with the missing coal block allocations-related files. While 18 cases have been registered, the agency has filed charge sheets in two cases.

The agency has registered two latest cases against Prakash Industries and Central Collieries.

Courtesy: The Hindu

सरकारी ‘जुगाड़’ जान पर भ्‍ाारी

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कामचलाऊ पुलों से नौ माह में चार लोग गंवा चुके हैं जान
उत्तरकाशी। सरकारी मशीनरी की लापरवाही का खामियाजा जिले के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। बाढ़ में बहे पुलों की जगह जुगाड़ के पुलों से आवाजाही के दौरान नौ महीने में चार लोग जान गवां चुके हैं। कुछ स्थानों पर आवाजाही के लिए लगी ट्राली से भी दर्जनों ग्रामीणों की उंगलियां कट चुकी है। पिछले दो वर्षों की बाढ़ में जिले के अधिकतर गांवों को जोड़ने वाले अस्थायी पुल बह गए थे। गंगा घाटी में नलूणा, डिडसारी, अठाली, संगमचट्टी, जोशियाड़ा तथा यमुनाघाटी में भी कई पुल बाढ़ की भेंट चढ़े। अभी तक इनमें एक भी पुल का निर्माण नहीं हो पाया। ऐसे में ग्रामीणों ने इन स्थानों पर आवाजाही के लिए स्वयं लकड़ी की वैकल्पिक पुलिया बना रखी है, लेकिन इन पर आवागमन करना जान जोखिम में डालने से कम नहीं है। पिछले नौ माह में इन पुलों से नदी में बहने से चार लोगाें की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने हालांकि नलूणा, अठाली, खरादी सहित कई स्थानों पर आवाजाही के लिए ट्राली तो लगा रखी है, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण इनमें दर्जनों लोगों की हाथ की उंगलियां कट चुकी हैं।
केस-1
बीते साल 9 जुलाई भंकोली गांव की 17 वर्षीय अंजना पिता के साथ राशन लेकर घर जा रही थी। इस दौरान संगमचट्टी में लकड़ी की पुलिया से पांव फिसलने से अंजना नदी के तेज बहाव में बह गई। इस स्थान पर स्थायी पुल 2012 की बाढ़ में बह गया था, लेकिन अभी तक पुल नहीं बन पाया।
केस-2
बीते साल छह अगस्त को भेटियारा गांव का सात वर्षीय अमन स्कूल जा रहा था। पनियार गदेरे पर बनी वैकल्पिक पुलिया से पांव फिसलने पर वह पानी के तेज बहाव में बह गया। इस स्थान पर भी अभी तक पुल का निर्माण नहीं हो पाया।
केस-3
यमुनाघाटी के बडियार गाड पर बना पुल भी वर्ष 2010 की बाढ़ में बह गया था। यहां आवाजाही के लिए बनी वैकल्पिक पुलिया से अब तक तीन लोगाें की मौत हो चुकी है। इसी साल फरवरी माह में पंचाणगांव के प्रेमदास तथा गत मंगलवार को गंगटाडी के रणवीर दास की इसी पुल से पांव फिसलने से मौत हुई। जिले में सभी पुलों के निर्माण की कार्रवाई चल रही है। जिन विभागों के पास बजट नहीं है। उनके लिए बजट की व्यवस्था की गई। गंगाघाटी के 14 पुलों का निर्माण एनबीसीसी कर रही है।
-श्रीधर बाबू अद्दांकी, डीएम उत्तरकाशी।
अस्सी गंगा घाटी में पुलों का निर्माण कछुआ गति से चल रहा है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर लकड़ी के पुलों से आवाजाही कर रहे हैं। यदि समय पर पुल नहीें बनते हैं तो इस बार घाटी के आधा दर्जन गांव अगल-थलग पड़ जाएंगे।
-कमल सिंह रावत, निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य।
नाल्ड क्षेत्र के ग्रामीण इस तरह करते हैं आवागमन। (फाइल फोटो)
Courtesy: amarujala.com

हाकिम उड़ रहे हवा में जमीन पर काम नहीं

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रुद्रप्रयाग। आपदा प्रभावित केदारघाटी में अधिकारियों के हवाई दौरों के बाद भी यात्रा तैयारियों के काम की रफ्तार में कोई ज्यादा सुधार नजर नहीं आ रहा है। देहरादून से चॉपर से गुप्ताकाशी और अगस्त्यमुनि पहुंचने वाले अधिकारियों के चलते जिले का प्रशासनिक अमला भी यहां से वहां भाग रहा है। बड़े अधिकारियों के दौरे से स्थिति यह हो गई कि न तो वह खुद काम कर रहे और न जिला प्रशासन के अधिकारियों को करने दे रहे।
केदारनाथ जल प्रलय स्थानीय लोगों और यात्रियों के लिए भले ही मुसीबत बनकर आई हो लेकिन अधिकारियों के लिए सैर सपाटे का माध्यम बन गई। आपदा के दौरान भी राहत एवं बचाव कार्यों के नाम पर अधिकारी इस तरह के सैर सपाटे करते रहे। अब यात्रा तैयारियों को लेकर चॉपर से सैर सपाटा कर रहे हैं। उत्तराखंड में मंत्री हेलीकाप्टर प्रेम के लिए जाने जाते हैं। लेकिन चॉपर की यात्रा करने में अधिकारी भी पीछे नहीं हैं। हो यह रहा है कि अधिकारी अगस्त्यमुनि या गुप्तकाशी चॉपर से पहुंच रहे हैं। जहां वह अधिकारियों की मीटिंग या फिर दिखावे के लिए तैयारियों का निरीक्षण कर रहे हैं। लोनिवि सचिव अमित नेगी अब तक सबसे अधिक तीन बार चॉपर से केदारघाटी की यात्रा कर चुके हैं। आला अधिकारियों के सीधे गुप्तकाशी पहुंचने से जिलास्तरीय अधिकारी भी परेशान हैं। केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के खराब होने के कारण अधिकारी अलसुबह गुप्तकाशी के लिए रवाना होते हैं और देर शाम को वापसी होती है। फिर पता चलता कि अगले दिन गुप्तकाशी पहुंचना है। इसका असर कामकाम पर पड़ रहा है।
हेलीकाप्टर से यात्रा करने में मंत्रियों को पीछे छोड़ देंगे अधिकारी
बड़े अधिकारियों के दौरे से प्रशासनिक अमला भी हुआ व्यस्त
तैयारियों की स्थिति
सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के सबसे कमजोर प्वाइंट का समाधान नहीं निकल पाया है। सोनप्रयाग से मुंडकटिया तक लगभग 700 मीटर सड़क नदी के समांतर चल रही है। भूस्खलन के कारण यहां पूर्व के एलाइमेंट से सड़क निर्माण की संभावना बहुत कम है। जो भी अधिकारी सोनप्रयाग पहुंचता है, बीआरओ को स्थायी सड़क बनाने के निर्देश देता है। सड़क तो दूर अभी तक स्थायी सड़क का प्रपोजल भी नहीं बन पाया है। गौरीकुंड बस अड्डे तक राजमार्ग नहीं खुल पाया है।
दूसरी बार भी नहीं आए मुख्य सचिव
मुख्य सचिव सुभाष कुमार और गढ़वाल कमिश्नर सीएस नपच्याल ने दोबारा निरीक्षण की बात कही थी। लेकिन वह दूसरी बार नहीं पहुंचे। हालांकि सचिव और कमिश्नर ने सड़क मार्ग से निरीक्षण किया। जबकि अन्य अधिकारी हेलीकाप्टर से आ रहे हैं और उसी से लौट रहे हैं। विगत 12 मार्च को जहां मुख्य सचिव सोनप्रयाग में निरीक्षण कर रहे थे, वहीं उनके साथ गुप्तकाशी पहुंचे अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा हेलीकाप्टर से देहरादून के लिए फुर्र हो गए।
अधिकारियों के दौरे
05 मार्च ः डीआईजी जीएस मर्तोलिया चॉपर से लिनचोली में उतरे
08 मार्च ः लोनिवि सचिव अमित नेगी चॉपर से गुप्तकाशी पहुंचे
12 मार्च ः मुख्य सचिव सुभाष कुमार व अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा चॉपर से गुप्तकाशी पहुंचे
24 मार्च ः आपदा प्रबंधन सचिव भास्करानंद और सचिव अमित नेगी चॉपर से अगस्त्यमुनि पहुंचे
26 मार्चः लोनिवि प्रमुख सचिव एसएस संधू और सचिव अमित नेगी चॅापर से अगस्त्यमुनि पहुंचे।

Courtesy: amarujala.com

गौचर से होगी केदारनाथ हाईवे की निगरानी

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रुद्रप्रयाग। पिछले वर्ष की आपदा से क्षतिग्रस्त केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग दोबारा से 21 बीआरटीएफ (बार्डर रोड टास्क फोर्स) जोशीमठ के हवाले होने जा रहा है। नए वित्तीय वर्ष अप्रैल माह से रुद्रप्रयाग-केदारनाथ एनएच-109 की देखरेख 36 बीआरटीएफ उत्तरकाशी नहीं करेगी। यह निर्णय राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय बनाने और उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के बीच अधिक दूरी को देखते हुए लिया गया है।
करीब 12 साल पूर्व केदारनाथ मोटर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा देते हुए इसे लोनिवि से बीआरओ/ग्रिफ (जनरल रोड इंजीनियरिंग फोर्स) को सौंप दिया गया था। दो साल पूर्व तक इस मार्ग को 21 बीआरटीएफ जोशीमठ की 66 आरसीसी (सड़क निर्माण इकाई) गौचर देख रही थी। लेकिन अचानक इसे 200 किलोमीटर दूर 36 बीआरटीएफ को सौंप दिया गया। तब से 1442 बीसीसी (पुल निर्माण इकाई) उत्तरकाशी एनएच की देखरेख करती आ रही है। बीआरओ के इस निर्णय पर उस समय सवाल भी उठे थे। क्योंकि गौचर रुद्रप्रयाग से सिर्फ 22 किमी दूर है। 21 बीआरटीएफ के ओसी गौचर में और कमांडर जोशीमठ में बैठते हैं। जबकि 36 बीआरटीएफ के कमांडर और ओसी दोनों ही उत्तरकाशी बैठते हैं। जो रुद्रप्रयाग से ठीक विपरीत दिशा में हैं। जून माह में आई आपदा में भी यह दूरी काफी खली थी। उत्तरकाशी से मशीनरी, मजदूर और अधिकारियों को आने में वक्त लग गया। साथ ही प्रशासन और शासन से समन्वय में भी काफी दिक्कतें हुई। कई बार उत्तरकाशी के अधिकारी प्रदेश शासन के अधिकारियोें के साथ मीटिंग में नहीं पहुंच पाए। यही वजह रही कि बीआरओ ने दोबारा से इसको जोशीमठ के हवाले करने का फैसला लिया।
रामबाड़ा तक मार्ग 30 अप्रैल तक होगा तैयार
रुद्रप्रयाग। जिला प्रशासन ने 30 अप्रैल तक केदारनाथ पैदल मार्ग को रामबाड़ा तक सुगम और सुरक्षित करने का दावा किया है। काम में और तेजी आए, इसके लिए जिलाधिकारी डा. राघव लंगर ने स्वयं रामबाड़ा तक पैदल मार्ग का निरीक्षण किया।
आपदा से क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग का सोनप्रयाग से रामबाड़ा तक लोनिवि और रामबाड़ा से ऊपर केदारनाथ तक एनआईएम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी के मजदूर मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य कर रहे हैं। लोनिवि ने 10 किमी के पैच में 550 मजदूर काम पर लगाए गए हैं। जबकि रामबाड़ा में मंदाकिनी नदी की दूसरी ओर एनआईएम के 109 मजदूर काम कर रहे हैं। रामबाड़ा से करीब साढे़ तीन किमी ऊपर छोटा लिनचोली में 70 मजदूर मार्ग खोलने में जुटे हुए हैं। रामबाड़ा और छोटा लिनचोली के बीच तीन स्थानों पर ग्लेशियर हैं। मजदूरों ने यहां बर्फ हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन ऊपर से बर्फ दोबारा रास्ते में आ रही है। बर्फ को स्थायी रुप से हटाने के लिए अब बर्फ काटने की मशीन मंगवाई जा रही है। डीएम डा. राघव लंगर ने बताया कि लोनिवि ने रामबाड़ा तक मार्ग लगभग खोल दिया है। गौरीकुंड से आगे दो स्थानों में स्लाइड है। यहां स्थायी मार्ग बनाया जा रहा है। लोनिवि अन्य सुधारीकरण कार्य कर रही है।
अभी तक उत्तरकाशी से होता था देखरेख का काम
वित्तीय वर्ष 2013-14 की समाप्ति के बाद देखेगी आरसीसी
कंट्रोलिंग और प्रशासन के साथ समन्वय की समस्या हो रही थी। उत्तरकाशी से अधिकारियों को आने-जाने में दिक्कत हो रही थी। लंबे समय से यह फेरबदल चल रहा था। काम तो वही है, सिर्फ डिवीजन चेंज हो रही है। – बिग्रेडियर केके राजदान, चीफ इंजीनियर बीआरओ
डीएम ने किया पैदल मार्ग का स्थलीय निरीक्षण
गौरीकुंड-केदारनाथ यात्रा पैदल मार्ग की मरम्मत करते लोनिवि के मजदूर।
Courtesy: अमर उजाला ब्यूरो

कैसे बुझेगी यात्रियों की प्यास

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आपदा से क्षतिग्रस्त योजनाओं की नहीं हुई मरम्मत
उत्तरकाशी। देश-विदेश से गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए आने वाले तीर्थ यात्रियों को इस बार पीने के पानी के लिए तरसना पड़ेगा। कारण आपदा के दौरान यात्रा मार्ग की 72 योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिनमें से 23 योजनाएं जुगाड़ से चल रही है।
गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट दो मई को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ के लिए खुल जाएंगे, लेकिन इन धामों में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ेगा। दोनों धामों की पेयजल योजनाएं बीते साल बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गई थी, जो अभी तक दुरुस्त नहीं हो पाई। इसके अलावा यात्रा मार्ग पर पड़ने वाली 72 में से 23 योजनाएं वैकल्पिक व्यवस्था से चल रही है। यदि इनके मुख्य स्रोत तथा पाइप लाइन पर काम नहीं होता है, तो गर्मियों के दौरान इन पर पानी चलना संभव नहीं है। यमुनोत्री पैदल मार्ग पर जानकीचट्टी से लेकर यमुनोत्री तक सात टीटीएफसी (टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट) बंद पड़े हुए हैं। हालांकि जल संस्थान ने यात्रा मार्ग पर पेयजल योजनाओं की मरम्मत तथा बंद पड़ी टीटीएफसी की मरम्मत के लिए शासन से 47 लाख रुपये की मांग की है, लेकिन अभी तक बजट नहीं मिल पाया।
जुगाड़ से आपूर्ति
72 में से 23 योजनाएं चल रही है जुगाड़ से
गंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर पेयजल योजनाओं की मरम्मत के लिए बजट की मांग की गई, लेकिन अभी तक बजट नहीं मिल पाया। यात्रियों की सुविधा को देखते हुए 30 अप्रैल तक योजनाओं को हर हाल में दुरुस्त कर दिया जाएगा। -आरएस नेगी, अधिशासी अभियंता जल संस्थान। गंगोत्री धाम में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार की यात्रा शुरू होने के लिए अब कम समय ही बचा है। इसलिए जल संस्थान को समय पर पेयजल योजना को दुरुस्त करने का काम करना चाहिए।
-रजनीकांत सेमवाल, कोषाध्यक्ष गंगोत्री मंदिर समिति।

Courtesy: अमर उजाला ब्यूरो

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