झारखंड में पूर्वी सिंहभूम जिले  में मूसबानी के केन्दाडीह गाँव  में मातम छाया हुआ है. मार्च  महीने में इस इलाके के तीन  और लोगों ने सिलिकोसिस  बीमारी से दम तोड़ दिया. 

 सिर्फ मार्च महीने में ही इस  जिले के छह लोगों की मौत इस  बीमारी से हो गई. पिछले कुछ  सालों में इस इलाके में  सिलिकोसिस से मरने वालों की  संख्या ३५ हो गई है. 100 से  अधिक लोग इस बीमारी की  चपेट में हैं.

 सिलिकोसिस लाइलाज बीमारी  है और यह अमूमन उन मजदूरों को हो जाती है जो या तो पत्थर तोड़ने का काम करते हैं या क्रशर मशीनों में या फिर पत्थर का पाउडर बनाने वाली फैक्टरियों में काम करते हैं.

सिलिकोसिस पूर्वी भारत के इस खनन वाले इलाके में बड़ी जानलेवा बीमारी के रूप में उभरी है. ग़ैर सरकारी संगठनों का आंकलन है कि इस बीमारी की चपेट में हज़ारों मजदूर हैं. कई मजदूरों की मौत हो चुकी है जबकि कई मौत के मुंह में हैं.

‘जिंदगी मुश्किल में’

केन्दाडीह के पास ही तेरेंगा गाँव है जहाँ मेरी मुलाक़ात 36 वर्षीय परन मुर्मू से हुई जो पिछले कई महीनो से बिस्तर पर हैं.

परन अपने गाँव के पास पत्थर का चूरा बनाने वाली एक फैक्ट्री में काम करते थे. पहले तो उनकी तबीयत ख़राब हुई और बाद में उनकी हालत बिगडती चली गई.

आज वह चल फिर भी नहीं पाते हैं. परन को सिलिकोसिस हो गया है और जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं उनका वज़न भी घट रहा है और शरीर में कमज़ोरी भी बढती जा रही है. अब उनकी पीठ चारपाई को लग गई है. Read more

Courtesy: BBC Hindi

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