नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बडी राहत प्रदान करते हुए कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में उन्हें पक्षकार बनाये जाने संबंधी अर्जी मंगलवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति आर एम लोढा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले में हलफनामा दायर करके पक्ष रखने का प्रधानमंत्री को निर्देश देने संबंधी अनुरोध भी ठुकरा दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने एक अर्जी की सुनवाई करते हुए मंगलवार को कहा कि कोयला घोटाला मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पार्टी नहीं बनाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि पीएम का नाम आरोपियों की सूची में नहीं लिखा जा सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की वह अपील भी ठुकरा दी जिसमें कहा गया था कि पीएम से इस मामले में हलफनामा देने के लिए कहा जाए।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सीबीआई की जांच फिलहाल जारी है। गौरतलब है कि 2012 में इस घोटाले के उजागर होने के बाद से विपक्ष लगातार पीएम को जांच के दायरे में लाने और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है।

गौर हो कि वकील मनोहरलाल शर्मा ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपील की है कि सीबीआई ने कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख के खिलाफ जो एफआईआर की उसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम क्यों नहीं है? वकील ने याचिका में सुप्रीम कोर्ट से कहा कि है कि वह सीबीआई को निर्देश जारी करे, जिसमें वो मंत्री, विधायकों और सांसदों ने तत्कालीन कोयला मंत्री को कोल ब्लॉक आवंटन के लिए लिखे गए पत्रों को एफआईआर में शामिल करके पीएम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे।

ज़ी मीडिया ब्यूरो

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