नई दिल्ली – कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की जांच की आंच प्रधानमंत्री कार्यालय [पीएमओ] तक पहुंच गई है। घोटाले की तह तक पहुंचने के लिए सीबीआइ पीएमओ के दो वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है, अब प्रधानमंत्री के सलाहकार टीके नायर से सवाल-जवाब की तैयारी है। उनसे अगले हफ्ते कभी भी पूछताछ हो सकती है। नायर लंबे समय तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निजी सचिव रहे हैं। वहीं पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता से एजेंसी गुरुवार को पूछताछ करेगी।

ध्यान देने की बात है कि कोयला घोटाले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच शुरू होने के बाद सीबीआइ ने पिछले सप्ताह ही तत्कालीन कोयला राज्यमंत्री दासरि नारायण राव और कांग्रेस सांसद व जिंदल ग्रुप के मालिक नवीन जिंदल के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी।

दरअसल, सीबीआइ को जुलाई के पहले हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट में कोयला घोटाले की जांच की स्टेटस रिपोर्ट [स्थिति रपट] देनी है। घोटाले से जुड़ी बड़ी मछलियों पर एजेंसी के शिकंजे को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। एजेंसी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार,इस सिलसिले में सीबीआइ जल्द ही टीके नायर को पूछताछ के लिए तलब करेगी। वैसे आधिकारिक रूप में एजेंसी नायर से पूछताछ की तैयारी से इनकार कर रही है।

घोटाले की सच्चाई जानने के लिए सीबीआइ ने पिछले हफ्ते 2006 से 2009 के बीच पीएमओ में निदेशक रहीं विनी महाजन और आशिष गुप्ता से पूछताछ की। 1987 बैच की आइएएस अधिकारी विनी महाजन फिलहाल अपने मूल कैडर पंजाब में कार्यरत हैं। वहीं उत्तर प्रदेश कैडर और 1989 बैच के आइपीएस अधिकारी आशिष गुप्ता प्रधानमंत्री कार्यालय में सतर्कता अधिकारी के रूप में तैनात थे और अब अपने मूल कैडर में वापस लौट चुके हैं। सीबीआइ के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, फिलहाल इनमें से किसी को घोटाले का आरोपी नहीं बनाया गया है और उनसे एक गवाह के रूप में पूछताछ की गई है। लेकिन जांच पूरी होने तक किसी को भी क्लीन चिट नहीं देने का फैसला किया है।

वहीं कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के आरोपी बनाए गए पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता को गुरुवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। घोटाले के दौरान गुप्ता कोयला सचिव थे और इस नाते आवंटन का फैसला लेने वाली स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष भी थे। सीबीआइ का मानना है कि स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में गुप्ता ने कंपनियों के फर्जी दावों की जांच नहीं होने दी और उन्हें कोयला ब्लॉकों का आवंटन कर दिया। गुप्ता से आरोपी के रूप में पूछताछ करने को सीबीआइ ने बाकायदा सरकार से इजाजत मांगी थी। पहली बार मना करने वाली सरकार ने अंतत इजाजत दे दी। इसके बाद गुप्ता ने भारतीय प्रतिस्पद्र्धा आयोग से इस्तीफा दे दिया था।

Courtesy: Dainik Jagran

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